Shri Badrinath Govt Sanskrit Mahavidyalya New Tehri

Shri Badrinath Govt Sanskrit Mahavidyalya New Tehri near DIET new tehri T.G.

श्री बदरीनाथ राजकीय संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य श्री दिनेश प्रसाद बडोनी जी इस महाविद्यालय से  21 वर्ष की राजकीय सेव...
14/07/2019

श्री बदरीनाथ राजकीय संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य श्री दिनेश प्रसाद बडोनी जी इस महाविद्यालय से 21 वर्ष की राजकीय सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत के अवसर पर सम्मानित करती नई टिहरी नगर पालिका की प्रथम महिला अध्यक्षा श्रीमती सीमा कृषाली ।।
महोदय आपने दिन रात कार्य करके इस विद्यालय को एक नई ऊंचाई और पहचान दी । आपके संस्कृत शिक्षा के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए उत्तराखंड राज्य का सर्वोच्च शिक्षक सम्मान शैलेश मटियानी पुरुस्कार से भी सम्मानित किया गया ।
आपका मृदु व्यवहार , कर्तव्यनिष्ठा , तथा आदर्श शिक्षण , और शालीन व्यक्तित्व की छाप आपके द्वारा शिक्षित दीक्षित शिष्यों पर हमेसा रहेगी ,
आप हमेसा खुश , निरोगी और दीर्घायू रहें , हम सबकी ईश्वर से यही प्रार्थना है । आशा करते हैं आप भावी जीवन श्रेष्ठ शिक्षण शास्त्रीय गतिविधियों से जोड़कर समस्त छात्र और शिक्षक समाज को अनुगृहीत करेंगें । आप हमेशा हम सबके प्रेरणा स्रोत , पथ प्रदर्शक रहोगे ।। अस्तु ।।

12/03/2015

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12/03/2015

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28/02/2015

संस्कृतग्रन्थों की सूचीअभिषेक नाटक - भासअभिज्ञान शाकुन्तलम् - कालिदासअविमारक - भासअर्थशास्त्र - चाणक्यअष्टाध्यायी - पाणिनिआर्यभटीयम् - आर्यभटआर्या-सप्तशती - गोवर्धनाचार्यउरुभंग - भासऋतुसंहार - कालिदासकर्णभार - भासकादम्बरी - वाणभट्टकामसूत्र - वात्स्यायनकाव्यप्रकाश - मम्मटकाव्यमीमांसा - राजशेखरकालविलास - क्षेमेन्द्रकिरातार्जुनीयम्- भारविकुमारसंभव - कालिदासबृहत्कथा - गुणाढ्यचण्डीशतक - वाणभट्टचरक संहिता - चरकचारुदत्त भासचौरपंचाशिका - बिल्हणदशकुमारचरितम् - दण्डीदूतघटोत्कच - भासदूतवाक्य - भासन्यायसूत्र - गौतमनाट्यशास्त्र - भरतमुनिपञ्चरात्र - भासप्रतिमानाटकम् भासप्रतिज्ञायौगंधरायण - भासबृहद्यात्रा - वाराहमिहिरब्रह्मस्फुटसिद्धान्त - ब्रह्मगुप्तब्रह्मसूत्र - बादरायणबालचरित्र - भासमध्यमव्यायोग भासमनुस्मृति - मनुमहाभारत - वेद व्यासमालविकाग्निमित्र - कालिदासमुकुटतादितक - वाणभट्टमेघदूत - कालिदासमृच्छकटिकम् - शूद्रकमिमांसा - जैमिनीयोगयात्रा - वाराहमिहिरयोगसूत्र - पतंजलिरघुवंश - कालिदासरसरत्नसमुच्चय - वाग्भट्ठरसमञ्जरी - शालिनाथरसरत्नसमुच्चय - वाग्भट्ठराजतरंगिणी - कल्हणरामायण - महर्षि वाल्मीकिव्याकरणमहाभाष्य- पतंजलिवाक्यपदीय - भर्तृहरिविक्रमोर्वशीय - कालिदासवैशेषिकसूत्रम् - कणादस्वप्नवासवदत्तम- भाससमय-मातृका - क्षेमेन्द्रसाहित्य दर्पण - विश्वनाथ कविराजसांख्यसूत्र - कपिलमुनिसिद्धान्त शिरोमणि -हर्षचरित्र - वाणभट्टग्रन्थकार और ग्रन्थनिम्नलिखित सूचियाँ अंग्रेजी (रोमन) सेमशीनी लिप्यन्तरण द्वारा तैयारकी गयीं हैं। इनमें बहुतसी त्रुटियाँ हैं। विद्वान कृपया इन्हेंठीक करने का कष्ट करे।ग्रन्थकार --- ग्रन्थभर्तृहरि - वाक्यपदीयम्वामन एवं जयादित्य - काशिकावृत्तिभट्टोजिदीक्षित -वैयाकरणसिद्धान्तकौमुदीअभिनन्द --- son of जयन्त, योगवशिष्ठसार,कादम्बरीकथासार,रामचरितअभिनवगुप्त --- ध्वन्यालोकलोचन,परमार्थसारअध्यराज --- उत्साहअग्गवन्स --- सद्दनीतिअलत --- joint author of काव्यप्रकाशअमरचन्द्र --- बालभरत, काव्यकल्पलताअमरसिंह --- नामलिङ्नुगानुशासनअमरुक --- अमरुकशतकअमितगति --- धर्मपरीक्षा,सुभाषितरत्नसम्दोहआनन्द --- माधवनलकथाआनन्दगिरि --- शंकरविजयआनन्दतीर्थ --- यमकभरतआनन्दवर्धन --- देविशतक, ध्वन्यालोकअनन्त --- भरतचम्पुअनन्त --- वीरचरित्रअन्नम् भट्ट --- तर्कसंग्रहअनुभूति --- सरस्वतिप्रक्रियाअनुभूति स्वरूपाचार्य --- सरस्वतिप्रक्रियाअपदेव --- मीमांसान्यायप्रकाशअप्पय्य दीक्षित --- कुवलयानन्दअरिसिंह --- काव्यकल्पलता, शुक्र्तसम्किर्तनआर्यभट्ट --- आर्यभटिय, दशगीतिकासूत्र,आर्यस्तशत (includes गणित), कालक्रिया, गोलआर्यभट्ट ii --- आर्य सिद्धान्तआर्य देव --- चतुशतिक, हस्तवलप्रकरनवृत्तिआर्य शूर --- जातकमालाअशधर --- धर्मामृतअश्वगोश --- बुद्धचरित, गन्दिस्तोत्रगाथा, सौन्दरानन्दअश्विनिकुमार --- रसरत्नसमुच्चयअसंग --- (buddhist philosopher)महायनसूत्रलंकार, बोधिसत्त्वभुमि,योगचरभूमिशास्त्रअत्रि --- अत्रि स्मृतिआत्रेय --- आत्रेय संहिताबादरयण --- ब्रह्म सूत्रबल्ललसेन --- अद्भुतसागरबल्ललसेन --- भोजप्रबन्धबाण --- कादम्बरी, हर्षचरित,चन्डीशतकभल्लत --- शतक, शान्तिशतकमम्मट --- काव्यप्रकाशभानुदत्त --- रसमन्जरि, रसतरन्गिनिभरत --- नाट्यशास्त्रभरतचन्द्र --- विद्यासुन्दरभरतितीर्थ --- part author of पंचदशिभारवि --- किरातार्जुनीयम्भर्तृहरि --- वाक्यपदिय, वैराग्यशतक, शृन्गारशतकभास --- चारुदत्त, प्रतिज्ञयौगन्धरयन, प्रतिमनतक,स्वप्नवासवदत्ताभासर्वज्ञ --- न्यायसारभास्करचार्य --- करनकुतुहल,लीलावती, सिद्धान्तशिरोमणिभास्करचार्य --- गणित, गोल, ग्रहगणित,बीजगणितभट्टकलन्कदेव --- कर्नतकशब्दानुशासनभट्ट नायक --- ह्र्दयदर्पणभट्टि --- रावणवध (भट्टिकाव्य)भट्टोजि दीक्षित --- प्रक्रियाकौमुदि,सिद्धान्तकौमुदि, प्रौधमनोरमभट्टोत्पल --- होराशास्त्रभवभूति --- उत्तररामचरित, मालतीमाधवभावमिश्र --- भावप्रकाशभयभंजनशर्मन् --- रमलरहस्यभोज --- युक्तिकल्पतरु, राजमार्तन्ड, राजमृगान्क,राजवर्त्तिका, रामायणचम्पु (with लक्ष्मण भट्ट),शलिहोत्र,शृन्गारप्रकाश, समरंगनसूत्रधार,सरस्वतिकण्ठाभरण,भुम, भुमकभौमक --- रावणर्जुनीयबिहारी lal --- सत्सैविल्हण --- कर्णसुन्दरि, चौरपंचशिखा (orचौरिसुरतपंचशिखा),विक्रमन्कदेवचरितबिल्वमंगल --- कृष्णकर्णामृत (orकृष्णलीलामृत)ब्रह्मगुप्त --- खण्डखद्यक, ब्रह्मसिद्धान्त, स्फुतब्रह्मसिद्धान्तबुद्धभट्ट --- अगस्तिमत, रत्नपरीक्षाबुद्धघोषाचार्य --- पद्यचूडमणिबुधस्वामिन् --- बृहत्कथाश्लोकसंग्रहचक्रपाणि --- दशकुमारचरित continuesचक्रपाणिदत्त --- चिकित्सासारसंग्रहछन्द --- प्राकृतलक्षनचन्देश्वर --- स्मृतिरत्नाकर, नीतिरत्नाकरचन्द्र --- चन्द्र व्याकरणचन्द्रगोमिन् --- शिष्यलेखधर्मकाव्यचरित्रसुन्दर गनिन् --- महिपलचरित्रचिदम्बर ---राघवपाण्डवीयायदवीयचिन्तामणि भट्ट --- शुकसप्ततिदामोदर of दीर्घघोश family ---वाणीभूषणदामोदर, son of लक्ष्मीधर ---संगीतदर्पणदामोदरगुप्त --- कुत्तनिमतदण्डिन् --- दशकुमार चरित, अवन्तिसुन्दरिकथा,काव्यदर्श,द्विसंधनकाव्यदेव --- दैवदेवदत्त --- a version of शुकसप्ततिदेवनन्दिन्, पुज्यपाद --- जैनेन्द्र व्याकरणदेवन्न भट्ट --- स्मृतिचन्द्रिकदेवप्रभा सुरि --- पन्दवचरित्र, मृगवतिचरित्रधनंजय --- दशरूप, राघवपाण्डवियधनंजय --- नाममालाधनपल --- तिलकमन्जरि, पैयलच्चि, ऋशभपंचशिखाधन्वन्तरि --- author of a medical glossaryधर्मकीर्ति --- न्यायबिन्दुधर्मराज --- वेदान्तपरिभासधर्मोत्तर --- न्यायबिन्दुटीकाधो --- पवनदूतदिग्नाग --- न्यायप्रवेश (or by शंकरस्वामिन्),प्रमाणसमुच्चयदीपांकर --- अश्ववैद्यकदुर्लभराज --- समुद्रतिलकद्य द्विवेद --- नीतिमन्जरिगण --- अश्वायुर्वेदगणेश --- ग्रहलाघवगंगादास --- छन्दोमन्जरिगंगेश --- तत्त्वचिन्तामणिगौडपाद --- author of करिकास्घतकर्पर --- घतकर्परकाव्य, नीतिसार(ascr ---)गोपिनाथ --- revises दशकुमारचरितगोवर्धन --- आर्यसप्तशतिगुमणि --- उपदेशशतकगुणभद्र --- उत्तरपुराणगुणचन्द्र --- नाट्यदर्पण (with रामचन्द्र)गुणाढ्य --- बृहत्कथाहल --- सत्तसैहलायुध --- ब्राह्मणसर्वस्वहलायुध poet and grammarian --- अभिधनरत्नमालाहलायुध --- कविरहस्यहरदत्त --- पदमञ्जरीहरदत्त सुरि --- राघवनैसधीयहरिभद्र --- धर्मबिन्दु, योगदृष्टिसमुच्चय, योगबिन्दु,लोकतत्त्वनिर्णय, सद्दर्शनसमुच्चयहरिचन्द्र --- धर्मशर्मभ्युदयहरिचन्द्र --- जीवनधरचम्पुहर्षवर्धन --- अष्टमहश्रीचैत्यस्तोत्र,सुप्रभातस्तोत्रहर्ष --- नागानन्द, प्रियदर्शिखा, रत्नावलिहर्षदेव --- लिन्गनुशासनहर्षकीर्ति सुरि --- ज्योतिषसरोद्धरहेमचन्द्र --- अनेकार्थसंग्रह,अभिधनचिन्तामणि,काव्यनुशासन, छन्दोनुशासन, त्रिषष्ठिशलकापुरुषचरित,देशिनाममाला, द्व्यश्रयकाव्य,निघन्तुशेष, परिशिस्तपर्वन्,प्रमाणमीमांसा, लघुअर्हन्नीति, वीतरागस्तुति,सिद्धहेमचन्द्र,हैम व्याकरणहेमाद्रि --- चतुर्वर्गचिन्तामणि, शतश्लोकिहेमविजय --- कथारत्नाकरइरुगप --- नानार्थरत्नमालाईश्वरकृष्ण --- सांख्यकरिकाजगद्देव --- स्वप्नचिन्तामणिजगदीश --- तर्कामृतजगन्नाथ --- भामिनिविलास, रसगंगधरजैमिनि --- मीमांसा सूत्रजल्हन --- मुग्धोपदेश, सुभाषितमुक्तावलि, सोमपलविलासजम्भलदत्त --- version of वेतालपंचविन्शतिकजयदत्त --- अश्ववैद्यकजयदेव --- गीतगोविन्दजयदेव, dramatist --- चन्द्रलोकजयदेव --- रत्नमन्जरिजयादित्य --- कशिकावृत्तिजयन्त भट्ट, father of अभिनन्द --- न्यायमन्जरिजयरथ --- अलंकारविमर्शिनि, हरचरितचिन्तामणिजयवल्लभ --- वज्जलग्गजीमूतवहन --- दयाभाग, धर्मरत्नजिनकीर्ति --- चम्पकश्रेश्तिकथानक,पलगोपलकथानकजिनसेन --- हरिवंशपुराणजिनसेन --- आदिपुराण, पर्श्वभ्युदयजिनेन्द्रबुद्धि--- न्यसज्योतिरीश्वर --- पंचसयककल्हण --- राजतरंगिणीकालिदास --- ऋतुसंहार, कुमारसम्भव, मालाविकाग्निमित्र,मेघदुत,रघुवंश, विक्रमोर्वशीय, शकुन्तला,शृन्गारसश्तक (ascr ---), श्रुतबोधकल्लत --- स्पन्दकरिकाकल्याणमल्ल --- अनंगरंगकमलाकर --- निर्णयसिन्धुकमन्दकि --- नीतिसारकनद --- वैशेषिक्क सूत्रकनकसेन --- यशोधरचरितकश्यप --- बालवबोधनकश्यप --- धर्मसूत्रकात्यायन --- अनुक्रमणिस्, कात्यायन स्मृति, नाममालाकौटिल्य --- अर्थशास्त्रकविराज सुरि --- राघवपाण्डवियकेदार भट्ट --- वृत्तिरत्नाकरकेशव मिश्र --- तर्कभाषाकेशवस्वामी --- नानार्थर्नवसम्क्षेपकोक्कोक --- रतिरहस्यकृष्णलीलाशुक --- पुरुषकरक्रमदीश्वर --- संक्षिप्तसारक्षेमम्कर --- version of सिंहासनद्वत्रिन्शिकाक्षेमेन्द्र --- अवदन्कल्पलता, औचित्यविचार, कलाविलास,कविकण्ठाभरण,चतुर्वर्गसंग्रह, चारुचर्यशतक, दर्पदलन, दशावतारचरित,नृपावलि, पद्य कादम्बरी, बृहत्कथामन्जरि,भरतमन्जरि,रामायणमन्जरि, समयमातृर्क, सुवृत्ततिलक,सेव्यसेवकोपदेशकुलशेखर --- मुकुन्दमालाकुमारदास --- जानकीहरणकुमारलता --- कल्पनमन्दिटीका or सुत्रालंकारकुमारस्वामिन् --- रत्नपनकुमरिल --- तुप्तिक, तन्त्रवर्त्तिक,श्लोकवर्त्तिककुन्तल --- वक्रोक्तिजिवितकुसुमदेव --- द्र्श्तन्तशतकलक्ष्मण आचार्य --- चन्डीकुचपंचशिखालक्ष्मण भट्ट --- रामायणचम्पु (with भोज)लक्ष्मीधर --- सद्भाषाचन्द्रिकालक्ष्मीधर --- स्मृतिकपतरुलल्ल --- शिष्यधिव्र्द्धितन्त्रलौगक्सि भास्कर --- अर्थसंग्रह, तर्ककौमुदिलीलाशुक --- कृष्णकर्णामृतलोकसेन --- उत्तरपुराण continuesलोलिम्बराज --- हरिविलास, वैद्यजीवनमदनपल --- मदनविनोदनिघन्तुमाधव brother of सयन --- part author ofजीवनमुक्तिविवेक, धातुवृत्ति,न्यायमालाविस्तर, पंचदशि, पराशरस्मृतिव्याख्यामाधव --- शंकरदिग्विजयमाधव --- सर्वदर्शनसंग्रहमाधव --- जीवनमुक्तिविवेकमधव्कर --- रुग्विनिश्चयमधुसूधन सरस्वति --- प्रस्थानभेदमध्व --- तत्त्वसांख्यनमाघ --- शिशुपालवधमहनमन् --- महावन्समहावीराचार्य --- गणितसारसंग्रहमहेश्वर --- विश्वप्रकाशमहिमन् भट्ट --- व्यक्तिविवेकमैत्रेयरक्षित --- धातुप्रदीपमकरन्द --- तिथ्यादिपत्रमल्लवदिन् --- न्यायबिन्दुटीकातिप्पनिमल्लिसेन

01/02/2015

संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 ने भारतके संविधान में अंत: स्थापित अनुच्छेद 21-क, ऐसे ढंग सेजैसाकि राज्य कानून द्वारा निर्धारितकरता है, मौलिक अधिकार के रूप मेंछह से चौदह वर्ष के आयु समूह मेंसभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधानकरता है। नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा (आरटीई)अधिनियम, 2009 में बच्चों का अधिकार, जो अनुच्छेद 21क केतहत परिणामी विधान का प्रतिनिधित्व करता है,का अर्थ है कि औपचारिक स्कूल, जो कतिपय अनिवार्यमानदण्डों और मानकों को पूरा करता है, में संतोषजनक और एकसमानगुणवत्ता वाली पूर्णकालिक प्रांरभिक शिक्षा के लिएप्रत्येक बच्चे का अधिकार है।अनुच्छेद 21-क और आरटीई अधिनियम 1 अप्रैल,2010 को लागू हुआ। आरटीई अधिनियम केशीर्षक में ''नि:शुल्क और अनिवार्य'' शब्द सम्मिलितहैं। 'नि:शुल्क शिक्षा' का तात्पर्य यह हैकि किसी बच्चे जिसको उसके माता-पिता द्वारा स्कूल मेंदाखिल किया गया है, को छोड़कर कोई बच्चा, जो उचित सरकारद्वारा समर्थित नहीं है, किसी किस्मकी फीस या प्रभार या व्यय जो प्रारंभिकशिक्षा जारी रखने और पूरा करने से उसकोरोकेअदा करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।'अनिवार्य शिक्षा' उचित सरकार और स्थानीयप्राधिकारियों पर 6-14 आयु समूह केसभी बच्चों को प्रवेश, उपस्थिति और प्रारंभिकशिक्षा को पूरा करने का प्रावधान करने और सुनिश्चित करनेकी बाध्यता रखती है। इससे भारत अधिकारआधारित ढांचे के लिए आगे बढ़ा है जो आरटीई अधिनियमके प्रावधानों के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 21-क मेंयथा प्रतिष्ठापित बच्चे के इस मौलिक अधिकार को क्रियान्वित करने केलिए केन्द्र और राज्य सरकारों परकानूनी बाध्यता रखता है।आरटीई अधिनियम निम्नलिखित का प्रावधान करता है :किसी पड़ौस के स्कूल में प्रारंभिकशिक्षा पूरी करने तक नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा केलिए बच्चों का अधिकार।यह स्पष्ट करता है कि 'अनिवार्य शिक्षा' का तात्पर्य छह सेचौदह आयु समूह के प्रत्येक बच्चे को नि:शुल्क प्रारंभिकशिक्षा प्रदान करने और अनिवार्य प्रवेश, उपस्थिति और प्रारंभिकशिक्षा को पूरा करने को सुनिश्चित करने के लिए उचित सरकारकी बाध्यता से है। 'नि:शुल्क' का तात्पर्य यह हैकि कोई भी बच्चा प्रारंभिकशिक्षा को जारी रखने और पूरा करने से रोकनेवाली फीस या प्रभारों या व्ययों को अदाकरनेका उत्तरदायी नहीं होगा।यह गैर-प्रवेश दिए गए बच्चे के लिए उचित आयु कक्षा में प्रवेशकिए जाने का प्रावधान करता है।यह नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने में उचित सकारों,स्थानीय प्राधिकारी औरअभिभावकों कर्त्तव्यों और दायित्वों और केन्द्र तथा राज्य सरकारों केबीच वित्तीय और अन्यजिम्मेदारियों को विनिर्दिष्ट करता है।यह, अन्यों के साथ-साथ, छात्र-शिक्षक अनुपात(पीटीआर), भवन और अवसंरचना, स्कूलके कार्य दिवस, शिक्षक के कार्य के घंटों से संबंधित मानदण्डों औरमानकों को निर्धारित करता है।यह राज्य या जिले अथवा ब्लॉक के लिए केवल औसतकी बजाए प्रत्येक स्कूल के लिए रखे जाने वाले छात्रऔर शिक्षक के विनिर्दिष्ट अनुपात को सुनिश्चित करकेअध्यापकों की तैनाती के लिए प्रावधानकरता है, इस प्रकार यहअध्यापकों की तैनाती मेंकिसी शहरी-ग्रामीण संतुलनको सुनिश्चित करता है। यह दसवर्षीय जनगणना,स्थानीय प्राधिकरण, राज्य विधान सभा और संसद के लिएचुनाव और आपदा राहत को छोड़कर गैर-शैक्षिक कार्य के लिएअध्यापकों की तैनाती का भी निषेधकरता है।यह उपयुक्त रूप से प्रशिक्षितअध्यापकों की नियुक्ति के लिए प्रावधान करता हैअर्थात अपेक्षित प्रवेश और शैक्षिक योग्यताओं के साथअध्यापक।यह (क) शारीरिक दंड और मानसिकउत्पीड़न; (ख) बच्चों के प्रवेश के लिएअनुवीक्षण प्रक्रियाएं; (ग) प्रति व्यक्ति शुल्क; (घ)अध्यापकों द्वारा निजी ट्यूशन और (ड.) बिना मान्यता केस्कूलों को चलाना निषिद्ध करता है।यह संविधान में प्रतिष्ठापित मूल्योंके अनुरूप पाठ्यक्रम के विकासके लिए प्रावधान करता है और जो बच्चे के समग्र विकास, बच्चे केज्ञान, संभाव्यता और प्रतिभा निखारने तथा बच्चेकी मित्रवत प्रणाली एवं बच्चा केन्द्रितज्ञान की प्रणाली के माध्यम से बच्चेको डर, चोट और चिंता से मुक्त बनाने को सुनिश्चित करेगा।

14/01/2015

ॐ सर्व तीर्थं समूद भूतं पाद्य गन्धदि भिर्युतम् |प्रचंण्ड ज्योति गृहाणेदं दिवाकर भक्त वत्सलां ||happy makar sakranti..

09/01/2015

BADRINATH...

03/01/2015

"जब मुझे यकीन है के भगवान मेरे साथ है।
तो इस से कोई फर्क नहीं पड़ता के कौन कौन मेरे खिलाफ है।।"

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तजुर्बे ने एक बात सिखाई है...
एक नया दर्द ही...
पुराने दर्द की दवाई है...!!

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हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...
कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है..

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ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती..
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"

💕💕💕💕💕💕💕💕

मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि...

पत्थरों को मनाने में,
फूलों का क़त्ल कर आए हम।

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गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ....
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ....

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जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन
क्यूंकिएक मुद्दत से मैंने न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले .!!.

💕💕💕💕💕💕💕💕

एक घड़ी ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली..
वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे..!!

💕💕💕💕💕💕💕💕

सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से..
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !!!

💕💕💕💕💕💕💕💕

सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब....
बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता |

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जीवन की भाग-दौड़ में -
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है ?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है..

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एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम
और
आज कई बार
बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है..

💕💕💕💕💕💕💕💕

कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते..
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते..

💕💕💕💕💕💕💕💕

लोग कहते है हम मुस्कुराते बहोत है,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते..

💕💕💕💕💕💕💕💕

"खुश हूँ और सबको खुश रखता हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह
करता हूँ..

💕💕💕💕💕💕💕💕

चाहता तो हु की ये दुनियाबदल दू ....
पर दो वक़्त की रोटी केजुगाड़ में फुर्सत नहीं मिलती दोस्तों

💕💕💕💕💕💕💕💕

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे .
पता नही था की, 'किमत चेहरों की होती है!!'

💕💕💕💕
💕💕💕💕💕💕💕💕

"दो बातें इंसान को अपनों से दूर कर देती हैं,
एक उसका 'अहम' और दूसरा उसका 'वहम'..

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" पैसे से सुख कभी खरीदा नहीं जाताऔर दुःख का कोई खरीदार नहीं होता।"

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किसी की गलतियों को बेनक़ाब ना कर,

'ईश्वर' बैठा है, तू हिसाब ना कर...!!!

03/01/2015

Happy New Year 2015 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

नवे वर्षे नवोल्लास:
भूयात् कर्मसु चारुता ।
नश्यन्तु विपद: सर्वा:
भवंतु सस्य संपद:॥

सुयशो विमलं रम्यं
लोकं ब्याप्नोतु सर्वश: ।
भगवान वासुदेवस्य
तनोतु परमामुदम् ॥

भारते तु भवेद्राग:
विराग: दुस्प्रवृत्तिषु ।
कामये पूर्णचन्द्रो +अहं
शुभस्ते नव वत्सर: ॥
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
Happy New Year 2015.

smart sity new    t          tehri
27/12/2014

smart sity new t tehri

02/12/2014

ें
'देश की सभी शास्त्रीय भाषाओं, विशेषकर
संस्कृत का संरक्षण सरकार का काम है और
सरकार को इसके लिए मजबूर कर देना हमारा'
यह कहना है पंडित गुलाम दस्तगीर
बिराजदार का। संस्कृत के प्रकांड विद्वान,
एक प्राचीन मुस्लिम दरगाह के मुतवल्ली गुलाम
साहब शान से खुद को 'संस्कृत का गुलाम'
कहा करते हैं। इस दुर्लभ व्यक्तित्व से परिचय
कराती विमल मिश्र की रिपोर्ट।
पंडित गुलाम दस्तगीर बिराजदार - नाम
सुनकर आपको आश्चर्य होगा, पर असली आश्चर्य
तो वर्ली स्थित उनके घर पर
आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। छोटे से कमरे में
कुरान और मुस्लिम मजहबी किताबों के साथ
रामायण, महाभारत, वेद, पुराण और
उपनिषदों से भरे ताखे और आलमारियां, मुख से
धाराप्रवाह झरते मंत्र व हिंदू धार्मिक
आख्यान और उनका 'संस्कृतमय' बायोडाटा।
'बेटा और दोनों बेटियां शादी-विवाह
करके बाहर नहीं गए होते तो आपको इस
परिवार के बीच शुद्ध संस्कृत संभाषण भी सुनने
को मिलता।' यह कहना है पत्रकार मोहम्मद
वजीहुद्दीन का, जिन्होंने
हमारी जानकारी में वृद्धि की और
बताया कि गुलाम साहब ने तीनों बच्चों के
विवाह की पत्रिका भी संस्कृत में
ही छपवाई थी।
हिंदी, मराठी, कन्नड, उर्दू, अरबी और
अंग्रेजी के विद्वान, 'विश्व भाषा'
पत्रिका के संपादक, 'कुरान' व अमर चित्र
कथा के संस्कृत रूपांतरकार - पं. गुलाम दस्तगीर
बिराजदार नाम का उनके धर्म से कोई
वास्ता नहीं। वे नाम से नहीं, काम से पंडित
हैं। संस्कृत उनका प्रेम है, आदत है, जुनून है और शायद
उनकी जिंदगी भी। वे जैसे माहिर हैं हदीस,
कुरान और इस्लामी तहजीब के, संस्कृत
पुराणों और कर्मकांड के भी वैसे ही उद्भट्
विद्वान हैं।
पं. गुलाम दस्तगीर बिराजदार हिंदू
कर्मकांडों का ज्ञान भी हिंदू
धर्मशास्त्रों के ज्ञान से कम नहीं रखते।
लिहाजा, उन्हें शादी-विवाह, जैसे शुभ
संस्कार और अंत्यक्रिया कराने के आग्रह
भी मिलते रहते हैं, पर यह उन्हें मंजूर नहीं। वजह?
'क्योंकि ये शुद्ध धार्मिक संस्कार हैं', अपने घर के
पास सूफी संत सैयद अहमद
बदवी की सैकड़ों साल पुरानी दरगाह के
मुतवल्ली (प्रमुख) ने हमें समझाया।
80 वर्षीय पं. गुलाम दस्तगीर आज भी बचपन के वे
दिन भूले नहीं हैं, जब सोलापुर के अपने गांव में
खेतिहर मजदूर के रूप में दिन भर खेतों में खटने के
बाद वे रात्रिशाला में पढ़ने जाते समय पास
की संस्कृत शाला के बाहर बैठे घंटों संस्कृत के मंत्र
व श्लोक सुनने में बिता देते। उनकी लगन देखकर
शाला के ब्राह्मण शिक्षक ने आखिरकार उन्हें
कक्षा में बैठने की अनुमति दी। फिर जो हुआ वह
अब इतिहास है।
उनकी संस्कृत सेवाओं का ही पुण्यप्रताप था,
जो वर्षों महाराष्ट्र राज्य संस्कृत संगठन
का मानद राजदूत रखने के बाद महाराष्ट्र
सरकार ने देवभाषा की देख-रेख करने
वाली अपनी संस्कृत
स्थायी समिति का सदस्य बनाया और
काशी के विश्व संस्कृत प्रतिष्ठान ने
अपना महासचिव। आज भी काशी उनका दूसरे
घर जैसा है। काशी नरेश जब भी मुंबई में होते हैं,
उनके घर जरूर आया करते हैं।
पंडितजी खुद को संस्कृत के मामूली प्रचारक से
ज्यादा नहीं मानते और मराठा मंदिर स्कूल के
संस्कृत विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद देश
भर घूम-घूमकर सभा-सेमिनारों को संबोधित
कर संस्कृत और सर्वधर्म समभाव का प्रचार
किया करते हैं। उनकी संस्कृत विरासत
अभी कायम है। उनके नवासे दानिश ने
देवभाषा में संभाषण की कला सीखी है और
बेटी गयासुन्निसा ने संस्कृत में 'शास्त्री' कर
इस्लाम और हिंदू धर्मों में तुलनात्मक
शोधकार्य किया।
संस्कृत को लेकर मौजूदा विवाद से खिन्न
पंडितजी कहते है, 'संस्कृत बहुत ही सरल और ज्ञान
की भाषा है। संस्कृत को सीखने के लिए जरूरत है
सिर्फ इच्छा एवं उत्कंठा की। सरकार को उसे
प्रश्रय देना चाहिए। नहीं तो यह
हमारा काम है कि हम उसे उसके लिए मजबूर कर
दें।'
पंडित गुलाम दस्तगीर बिराजदार कहते हैं,
'वेदों और कुरान का एक ही जैसा संदेश है -
मानवता का कल्याण। केवल उसे हासिल करने के
तरीके अलग-अलग हैं।'

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