26/04/2026
बाबू अनन्त राम जनता कॉलेज, कौल (कैथल) के अर्थशास्त्र एवं राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, पंचकूला की स्वीकृति से “वैश्विक अर्थव्यवस्था, शासन और नीति पर डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रभाव” विषय पर एक दिवसीय अंतरविषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (हाइब्रिड मोड) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सौजन्य से प्रायोजित थी। संगोष्ठी महाविद्यालय प्रबंध समिति के प्रधान चौधरी तेजवीर सिंह की अध्यक्षता एवं प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल की देखरेख में आयोजित की गई। प्रबंध समिति के प्रधान चौधरी तेजवीर सिंह ने अपने संबोधन में महाविद्यालय की निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि के रूप में लेफ्टिनेंट (डॉ.) वीरेंद्र पाल, रजिस्ट्रार, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में उच्च शिक्षा में डिजिटलीकरण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया तथा कहा कि नई तकनीकों के समुचित उपयोग से शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं भविष्य उन्मुख बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वर्गीय बाबू अनंत राम एवं चौधरी ईश्वर सिंह को पुष्पांजलि अर्पित कर तथा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन किया। उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध-उन्मुख वातावरण तथा निरंतर प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक होती हैं। संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. अमनदीप ने विषय की प्रासंगिकता एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। प्लेनरी सत्र में समन्वयक डॉ. कुसुम कांगर ने स्वागत भाषण देते हुए सभी वक्ताओं का प्रभावशाली परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. राधिका खन्ना एवं डॉ. सुरभि अदलखा द्वारा गरिमामय ढंग से किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संयोजिका डॉ. ममता रानी, आयोजन सचिव डॉ. मुकेश चहल तथा डॉ. अमित टाया द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) मदन मोहन गोयल ने डिजिटलीकरण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं नीतिनिर्माण पर प्रभावों को विस्तार से स्पष्ट किया। मुख्य वक्ता प्रो. जयंती दत्ता, निदेशक, मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ ने विषय पर अपने विचार रखते हुए AI के अवसरों, चुनौतियों एवं उपयोग पर गहन चर्चा की तथा अपने अनूठे और विचारोत्तेजक प्रस्तुतीकरण से श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। प्लेनरी सत्र में अंतरराष्ट्रीय वक्ता प्रो. राम कुमार फुयाल (त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल) ने विषय के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। डॉ. स्मिता शर्मा (पंजाब विश्वविद्यालय) ने AI के सामाजिक एवं नैतिक पक्षों पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. हर्बर्ट बी. रोसाना (बिकोल यूनिवर्सिटी, फिलीपींस) ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर वैश्विक शांति एवं सुरक्षा में डिजिटल तकनीकों की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सत्र की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) नीरा वर्मा (गुरुग्राम विश्वविद्यालय) ने की। विशिष्ट अतिथि प्रो. वी.एन. अत्री ने ब्लू इकोनॉमी के संदर्भ में डिजिटल नवाचारों की भूमिका को रेखांकित किया। प्रो. रविंद्र सिंह बलियाला, पूर्व विधायक रतिया एवं अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष भी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। दोपहर पश्चात दस समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों द्वारा शोध-पत्रों का मूल्यांकन किया गया। साथ ही पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता में 24 टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल लगभग 550 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, यू.के., जर्मनी तथा अन्य देशों के प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान कुल 70 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। समापन सत्र में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और शोध एवं नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रमाण-पत्र वितरण, पुस्तक लोकार्पण एवं प्रतिभागियों से फीडबैक प्राप्त किया गया। राष्ट्रगान एवं धन्यवाद प्रस्ताव के साथ संगोष्ठी का सफल समापन हुआ। प्रबंध समिति के प्रधान चौधरी तेजवीर सिंह ने सभी आयोजकों को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी।