20/12/2025
मैंने दो घंटे कि डिबेट पुरी लाईव देखी हैं मुझे पहले से अंदेशा था कि मुफ्ती स्माइल नदवी साहब एक मुलाहिद के उकसावे या दबाव में आकर नरमी दिखा सकते हैं, लेकिन जो कुछ सामने आया, उसने मेरी इस धारणा को पूरी तरह ग़लत साबित कर दिया।
मुफ्ती साहब न सिर्फ़ मजबूती से खड़े नज़र आए, बल्कि जावेद अल-मलऊन जैसे शख़्स के सामने जिस आत्मविश्वास, इल्मी गहराई और बेबाकी के साथ उन्होंने बात रखी, वह काबिले-तारीफ़ है।
उन्होंने न किसी दबाव को तवज्जो दी, न किसी सस्ती बहस में उलझे, बल्कि हक़ को हक़ और बातिल को बातिल कहने का हौसला दिखाया, और अपनी बात से साबित किया है कि वाकई में खुदा का वजूद दुनिया में मौजूद है, सच तो यह है कि मुफ्ती स्माइल नदवी साहब मेरी उम्मीद से कहीं ज़्यादा पावरफुल, वाज़ेह और असरदार साबित हुए।
यह रवैया बताता है कि जब इल्म, ईमान और इस्तिक़ामत एक साथ खड़े हों, तो सबसे ऊँची आवाज़ भी बौनी लगने लगती है।