Vatayan : Poetry on South Bank

Vatayan : Poetry on South Bank Winner of Frederick Pincott UK and Arts Council of England’s awards Vatayan was founded on 28-11-2003

Vatayan : Poetry on South Bank was inaugurated by Dr Satyendra Srivastva, former Reader at the Cambridge University, on Friday, the 28th of November 2003 and on the very same day, its first Goshthi took place (William Blake’s Birthday) in the foyer of the Royal Festival Hall at the South Bank, London. Last year, Javed Akhtar and Prasoon Joshi from Mumbai were awarded by Lord Desai and Baroness Fla

ther along with Shabana Azmi, Javed Akhtar was also honoured with the Life Time Achievement Award in the same ceremony. Vatayan has presented several eminent poets/poetic evenings since its inception in 2004 including Javed Akhtar, Neeraj, Balswarup Rahi, Ashok Chakradhar, Mangal Naseem, Mohan Rana, Alka Sinha, Sarvesh Saksena, Sohan Rahi, Usha Varma, Amarjit Chandan, Naresh Shandilya, Shail Agrawal, Sita Sagar, Dr Budhinath Misra, Acharya Sarathi, Prof Pushpita, Keshri Nath Tripathi, Dr Nikhil Kaushik, Susham Bedi, Harish Naval and the late Shailendra Srivastava in the past. http://youtu.be/wQRhgaAlQbA (Javed Akhtar)
and
http://youtu.be/4Mk9yVIdcFI (prasoon Joshi)

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www.youtube.com

23 May (8 pm India time, 3.30 GMT)
15/05/2026

23 May (8 pm India time, 3.30 GMT)

स्वागत है, दिल्ली में मेरे दो अंतिम दिन, समय और सुविधा हो तो आइएगा, 65 वर्षों के संस्मरणों की बात होगी, पल पल बदलती दुनि...
17/04/2026

स्वागत है, दिल्ली में मेरे दो अंतिम दिन, समय और सुविधा हो तो आइएगा, 65 वर्षों के संस्मरणों की बात होगी, पल पल बदलती दुनिया और रिश्तों की बात होगी 😘🥰😘

आज रात 8 बजे मिलिए प्रसिद्ध लेखक शिवमूर्ति जी से। कार्यक्रम से जुडने का लिंक है: https://us02web.zoom.us/j/87612432009 (...
28/03/2026

आज रात 8 बजे मिलिए प्रसिद्ध लेखक शिवमूर्ति जी से। कार्यक्रम से जुडने का लिंक है:
https://us02web.zoom.us/j/87612432009 (Password: 898796)
यू-ट्यूब पर लाइव प्रसारण: https://bit.ly/2KQGo2W

बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय-झाँसी में हिंदी विज्ञान सम्मेलन में आमंत्रित और फिर हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ पुनीत बिसारिया ज...
25/03/2026

बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय-झाँसी में हिंदी विज्ञान सम्मेलन में आमंत्रित और फिर हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ पुनीत बिसारिया जी और उनकी पूरी टीम, विद्यार्थियों और शोधार्थियो के साथ कुछ समय व्यतीत करना बहुत अच्छा लगा। आयोजकों का हार्दिक आभार और धन्यवाद। 🥰😘🥰

आज सुबह दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों और उनके प्राध्यापकों के समूह के साथ संवाद...
22/01/2026

आज सुबह दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों और उनके प्राध्यापकों के समूह के साथ संवाद करना मेरे लिए एक असाधारण अनुभव रहा। प्रधानाचार्य प्रो बिजयालक्ष्मी नंदा, जो स्वयं लेखिका हैं, और हिंदी विभाग की प्रमुख डॉ अनु के साथ घनिष्ट बातचीत हुई। बावजूद एक आवश्यक मीटिंग के, प्रो नंदा काफ़ी देर तक कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। डॉ निशा नाग, सीनियर मोस्ट फैकल्टी, के साथ मेरा वार्तालाप बड़ा सहज और रोचक रहा। छात्राओं के प्रश्न प्रवासी जीवन और उनके अपने भविष्य को लेकर थे, जिनके उत्तर, जितना संभव हो सका, मैंने ईमानदारी और सच्चाई से दिए। विभाग द्वारा स्वादिष्ट दोपहर के भोजन का आयोजन करना भी बहुत अच्छा लगा, जिसके दौरान हमने बातचीत जारी रखी।

प्रधानाचार्य और पूरे हिंदी विभाग का धन्यवाद जिन्होंने मेरा खुले दिल से स्वागत किया और रोचक एवं दिलचस्प प्रश्न पूछे। काश कि मैं सबका नाम लेकर धन्यवाद कर सकती पर मुझे सबके नाम याद नहीं। अंकिता चौहान, राजेश मीणा और प्रियंका का हार्दिक आभार। शुभ कामनाओं सहित एवं सस्नेह, दिव्या माथुर, divyamathur.com, vatayaneurope.com, [email protected],

कल दोपहर वतायन-यूरोप ने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए - कुलपति आशु रानी के स...
21/01/2026

कल दोपहर वतायन-यूरोप ने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए - कुलपति आशु रानी के साथ। प्रो प्रदीप श्रीधर जी की पहल और सुन्दर प्रबन्धन के तहत, देखिए आगे आगे होता है क्या🙏🏼
ताज तो हम आगरा पहुँचते ही देख चुके थे, फ्रैंच के प्राध्यापक कृष्ण कुमार मार्ग दर्शन में।
आगरा जायें और केंद्रीय हिंदी संस्थान न जा पायें, इसका झटपट इन्तज़ाम किया मित्र लेखिका बीना शर्मा जी ने - 24 देशों के छात्रों और प्राध्यापकों से मिलकर तो मन मयूर नाच उठा। परमान सिंह जी और कुछ छात्रों से विश्वरंग-भोपाल में और हाल ही में भारतीय भाषा सम्मेलन-दिल्ली में मुलाक़ात हुई थी; देखिए आप किन किन को पहचान सकते हैं!
काश कि हमारे समय होता और हम खूब बतिया पाते, बेमन से दिल्ली लौटना पड़ा। Action packed two days.

पुस्तक मेले में आज बहुत से लेखक मित्रों, शोधार्थियों और प्रकाशकों से मुलाकात, 'तिलिस्म' और 'शाम भर बातें' का तीसरा संस्क...
15/01/2026

पुस्तक मेले में आज बहुत से लेखक मित्रों, शोधार्थियों और प्रकाशकों से मुलाकात, 'तिलिस्म' और 'शाम भर बातें' का तीसरा संस्करण भी आउट ऑफ़ स्टॉक 🙃

The driver got off to move the sheep off The Road, they look like kids refusing to move😘😘😘
22/12/2025

The driver got off to move the sheep off The Road, they look like kids refusing to move😘😘😘

प्रेस विज्ञप्ति: 'मायाजाल' का लोकार्पण कस्तूरी द्वारा आयोजित साहित्यिक श्रृंखला ‘किताबें बोलती हैं: सौ लेखक, सौ रचना’ के...
08/12/2025

प्रेस विज्ञप्ति: 'मायाजाल' का लोकार्पण

कस्तूरी द्वारा आयोजित साहित्यिक श्रृंखला ‘किताबें बोलती हैं: सौ लेखक, सौ रचना’ के अंतर्गत 6 दिसंबर 2025 को साहित्य अकादमी सभागार-दिल्ली में सुप्रसिद्ध कथाकार दिव्या माथुर के कहानी–संग्रह ‘मायाजाल’ (प्रभात प्रकाशन) पर पुस्तक–परिचर्चा का आयोजन किया गया। दिव्या माथुर ब्रिटेन में बसी भारतीय मूल की हिंदी लेखिका हैं, जिनकी कहानियाँ संवेदनशील, यथार्थवादी और सामाजिक सरोकारों से भरी होती हैं। उनकी रचनाओं में जीवन के जटिल यथार्थ, विशेषतः महिला संघर्ष और प्रवासी जीवन की चुनौतियों का सजीव और मार्मिक चित्रण मिलता है। उनकी कहानियाँ रिश्तों की जटिलताओं, मानवीय मन की गहराइयों, विवाह, प्रेम, विरह, अकेलेपन और पारिवारिक संबंधों की नाज़ुक डोरियों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करती हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार उदय प्रकाश जी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में कवि एवं आलोचक अनामिका जी उपस्थित रहीं। वक्ताओं में शिक्षाविद किरण नंदा जी कथाकार अंजू वेद जी और शिक्षाविद गीता पाण्डेय जी सम्मिलित हुईं। कार्यक्रम का संचालन साहित्य एवं कला–अध्येता विशाल पाण्डेय जी ने कुशलता से किया।

गीता पाण्डेय जी ने कहा कि विदेशी परिवेश में रची गई लेखिका की सत्रह कहानियों में भारतीय जीवन–मूल्यों का सशक्त प्रारूप उभरकर आता है - बाल–मन की मनोवैज्ञानिक जटिलताएँ, संबंधों के बंधन–विच्छेद, व्यक्तिगत व्यस्तता, शंका–संदेह, स्त्री–बिखराव तथा एकनिष्ठ प्रेम जैसी विविध मानवीय अनुभूतियाँ संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त हुई हैं। शीर्षकों में किया गया नवीन प्रयोग उनकी संवेदना को प्रभावी रूप में उकेरता है और पाठकों को आकर्षित करता है।

अंजू वेद जी ने कहा कि ये कहानियाँ पाठक के मन में सहज ही जगह बना लेती हैं और उन्हें अंत तक जोड़े रखती हैं। ब्रिटेन की पृष्ठभूमि पर आधारित इन कथाओं में बुजुर्गों की स्थितियाँ, लड़कियों और लड़कों के बीच अंतर, सांस्कृतिक भिन्नताएँ, पंजाबी संस्कृति की छवियाँ, सामाजिक दबाव तथा भय के विभिन्न आयाम प्रभावशाली रूप में उभरते हैं। किरण नंदा जी ने कहा कि इन कहानियों में भारतीय परिवेश प्रत्यक्ष–अप्रत्यक्ष रूप से उपस्थित है और प्रवासी जीवन का नौसटैलजिया गहराई से झलकता है। ये कथाएँ मानवता को सर्वोपरि मानते हुए जीवन की भागदौड़, चिकित्सीय षड्यंत्र, नर–नारी संबंध, समझौते, बुजुर्गों का अकेलापन और अवसाद जैसे यथार्थों को प्रभावी ढंग से उभारती हैं।

मुख्य अतिथि अनामिका जी ने कथाओं की मार्मिक प्रकृति पर बात करते हुए अज्ञेय और राहुल सांकृत्यायन के संदर्भों का उल्लेख किया। उन्होंने मृत्युबोध की सूक्ष्म अनुभूति पर चर्चा करते हुए कहा कि ये कहानियाँ जीवन की सीधी, स्पष्ट और अनावृत्त धारा की तरह प्रवाहित होती हैं। उनके अनुसार, स्त्री–मुक्ति का मार्ग उसे पुरुष–प्रधान अवधारणाओं से परे एक स्वतंत्र चेतना प्रदान करता है, जहाँ पूर्वाग्रहों के विरुद्ध संघर्ष ही उसके अस्तित्व की वास्तविक पहचान रचता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में उदय प्रकाश जी ने कहा कि दिव्या माथुर की कहानियाँ अपनी सीधी और सहज भाषा के कारण विशेष रूप से प्रभावशाली बनती हैं। इन कथाओं में पितृसत्ता का प्रश्न बिना किसी पक्ष–पक्षधरता के सादगी से प्रस्तुत हुआ है। साथ ही, कथाओं में पूर्वानुमान की उपस्थिति इन्हें और अधिक अर्थपूर्ण बनाती है, जिनसे लेखिका के रुझान की भी संकेत मिलता है। उनके अनुसार, लेखिका किसी एक दृष्टिकोण का समर्थन नहीं करतीं, बल्कि कहानी को निष्पक्षता से सामने लाती हैं।

समापन में उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, विद्वानों, श्रोताओं तथा आयोजनकर्ता कस्तूरी और उनकी समर्पित टीम के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध कथाकार, आलोचक, संपादक, वक्ता, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल साहित्यिक विमर्श का मंच बना, बल्कि कहानी और जीवन के पारस्परिक संबंधों को समझने का एक सुंदर अवसर भी सिद्ध हुआ।

रिपोर्ट : सृष्टि असवाल, कस्तूरी

कृपया दोनों टीमों को प्रोत्साहित करने के लिए रविवार दोपहर 1.30 बजे अंतिम कविता प्रतियोगिता में शामिल हों। https://youtub...
11/10/2025

कृपया दोनों टीमों को प्रोत्साहित करने के लिए रविवार दोपहर 1.30 बजे अंतिम कविता प्रतियोगिता में शामिल हों। https://youtube.com/

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