28/03/2026
माननीय मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी द्वारा “Ethical Research Integrity and Academic Responsible Publishing: Global Perspectives” पुस्तक का भव्य विमोचन
बलरामपुर/लखनऊ, 2026
मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ऑनलाइन कार्यशाला “Promoting Ethical Culture in Research Ethics and Responsible Publishing” (21–22 जनवरी 2026) के सफल आयोजन के उपरांत तैयार की गई महत्वपूर्ण पुस्तक “Ethical Research Integrity and Academic Responsible Publishing: Global Perspectives” का गरिमामय विमोचन माननीय मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी द्वारा किया गया।
पुस्तक की विशेषताएँ
यह पुस्तक शोध एवं प्रकाशन के क्षेत्र में नैतिकता, पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें निम्न प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है—
• शोध नैतिकता के मूल सिद्धांत
• प्लेज़रिज़्म (Plagiarism) एवं उससे बचाव
• रिसर्च मिसकंडक्ट (Fabrication, Falsification)
• डेटा संग्रहण एवं विश्लेषण में नैतिकता
• शोध पत्र प्रकाशन की प्रक्रिया एवं मानक
• पीयर-रिव्यू सिस्टम और गुणवत्ता नियंत्रण
• संपादन एवं नेतृत्व
इस पुस्तक के Editor-in-Chief प्रो. रवि शंकर सिंह (कुलपति, मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय) हैं, जबकि Editor के रूप में डॉ. बसंत कुमार (सदस्य, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यशाला की झलक
दो दिवसीय इस कार्यशाला में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने भाग लिया और शोध में नैतिकता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला—
• पहला दिन: शोध नैतिकता, दुराचार एवं संस्थागत नियमों पर चर्चा
• दूसरा दिन: जिम्मेदार प्रकाशन, जर्नल चयन एवं प्लेज़रिज़्म टूल्स पर मार्गदर्शन
कार्यक्रम का समापन इंटरैक्टिव सत्र एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
मुख्यमंत्री का संदेश
माननीय मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी ने अपने संदेश में कहा—
“नैतिकता पर आधारित शोध ही समाज और राष्ट्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।”
उन्होंने विश्वविद्यालय के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहलें उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा प्रदान करेंगी।
उद्देश्य एवं महत्व
इस पुस्तक और कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य—
• शोध में ईमानदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा देना
• शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रति जागरूक करना
• जिम्मेदार प्रकाशन संस्कृति को स्थापित करना
यह प्रकाशन न केवल शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा, बल्कि भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में नैतिकता-आधारित शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
MYogiAdityanath