30/01/2026
*उदयरामपुर, कोटद्वार में “दीदी की पाठशाला” को मिला नया आयाम: जय दुर्गा सामाजिक कल्याण संस्थान ने भेंट किया ‘बाल पुस्तकालय’*
दिनांक: 28 जनवरी 2026
जय दुर्गा सामाजिक कल्याण संस्थान द्वारा उदयरामपुर, कोटद्वार में “दीदी की पाठशाला” का संचालन पिछले एक वर्ष से निरंतर किया जा रहा है। यह पाठशाला समाज के आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है।
इस पाठशाला का संचालन श्री गौरव जखमोला द्वारा किया जा रहा है। वे दिव्यांग होने के बावजूद अपने अद्भुत आत्मबल, इच्छाशक्ति और सेवा-भाव से बच्चों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका समर्पण यह सिद्ध करता है कि दृढ़ संकल्प के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती।
⸻
*एक ही वर्ष में 8 से 60 बच्चों तक का प्रेरक सफ़र*
“दीदी की पाठशाला” की शुरुआत 29 जनवरी 2025 को केवल 8 बच्चों के साथ हुई थी। किंतु आज एक वर्ष के भीतर यहाँ 60 बच्चे नियमित रूप से अध्ययन कर रहे हैं। यहाँ पढ़ने वाले सभी बच्चे आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों से आते हैं, जिनके लिए कॉपी-किताब, कलम जैसी मूलभूत शैक्षणिक सामग्री जुटाना भी कठिन होता है।
ऐसे बच्चों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जय दुर्गा सामाजिक कल्याण संस्थान समय-समय पर उन्हें स्कूल बैग, स्टेशनरी, लंच बॉक्स, पानी की बोतल तथा खेल सामग्री जैसे कैरमबोर्ड, बैडमिंटन, चेस, योगा मैट आदि उपलब्ध कराता रहा है, ताकि बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास भी समान रूप से हो सके। इसके साथ-साथ बच्चों के लिए समय-समय पर खाद्य सामग्री एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण भी संस्था द्वारा किया जाता है।
⸻
*28 जनवरी 2026 को ‘बाल पुस्तकालय’ की शुरुआत: ज्ञान की दुनिया की ओर एक नई शुरुआत*
बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करने, ज्ञान-क्षमता बढ़ाने तथा उन्हें पुस्तकों के माध्यम से एक बेहतर सोच और उज्ज्वल भविष्य की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से दिनांक 28 जनवरी 2026 को “दीदी की पाठशाला” में जय दुर्गा सामाजिक कल्याण संस्थान द्वारा ‘बाल पुस्तकालय’ की शुरुआत की गई।
यह बाल पुस्तकालय बच्चों के लिए केवल किताबें रखने का स्थान नहीं, बल्कि उनके सपनों, कल्पनाओं और सीखने की निरंतर प्रक्रिया को गति देने वाला एक ज्ञान-केंद्र है। संस्था द्वारा बच्चों को एक अलमारी (बुक-केस) भेंट की गई, ताकि सभी पुस्तकें व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखी जा सकें और बच्चों में लाइब्रेरी कल्चर (पुस्तकालय संस्कृति) विकसित हो।
इसके साथ ही संस्था द्वारा बच्चों के लिए अनेक प्रकार की ज्ञानवर्धक पुस्तकें भी भेंट की गईं, जिनमें:
• बच्चों के लिए कहानी/प्रेरक पुस्तकें,
• सामान्य ज्ञान एवं नैतिक शिक्षा से जुड़ी पुस्तकें,
• ड्राइंग बुक व रचनात्मक सामग्री,
• डिक्शनरी एवं भाषा-विकास में सहायक पुस्तकें,
• तथा अन्य उपयोगी अध्ययन सामग्री शामिल हैं।
इन पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को न केवल पढ़ाई में सहायता मिलेगी, बल्कि वे नई चीजें सीखकर अपनी शब्दावली, भाषा-ज्ञान, कल्पनाशक्ति, अभिव्यक्ति क्षमता और आत्मविश्वास को भी मजबूत कर पाएंगे।
बाल पुस्तकालय का उद्देश्य यह भी है कि बच्चे स्कूल के पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करें और पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि आनंद और रुचि के रूप में अपनाएँ। यह पहल बच्चों में नियमित अध्ययन, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
⸻
*सिर्फ स्कूली पढ़ाई नहीं, बाहरी ज्ञान व व्यक्तित्व विकास पर भी जोर*
“दीदी की पाठशाला” में बच्चों को केवल स्कूली शिक्षा की पुनरावृत्ति ही नहीं कराई जाती, बल्कि उन्हें जीवनोपयोगी ज्ञान भी दिया जाता है। बच्चों को अंग्रेजी-गढ़वाली बोलने का अभ्यास, व्यक्तित्व विकास (Personality Development), अनुशासन, आत्मविश्वास एवं व्यवहारिक जीवन कौशल पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
⸻
*संस्था का संकल्प*
जय दुर्गा सामाजिक कल्याण संस्थान का यह प्रयास शिक्षा के माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े बच्चे तक अवसर पहुँचाने का संकल्प है। “दीदी की पाठशाला” और “बाल पुस्तकालय” के माध्यम से संस्था यह सुनिश्चित करने हेतु सतत कार्य कर रही है कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई केवल संसाधनों के अभाव में न रुके।