01/02/2026
तीन साल का एक बच्चा… जिसके सिर से पिता का साया उठ गया।
आज तक न ये पता चला कि क्या हुआ, कैसे हुआ — बस इतना पता था कि अब ज़िंदगी आसान नहीं रहने वाली।
वो बच्चा, उसका पाँच साल का बड़ा भाई और उनकी माँ — तीनों ने वो संघर्ष देखा
जो अक्सर लोगों को भीतर से तोड़ देता है।
माँ सुबह काम पर जाती,
दोपहर तक का बच्चों के लिए भोजन बनाती। घर में दो छोटे बच्चे — एक तीन साल का, दूसरा पाँच साल का — इतनी कम उम्र में खुद अपनी देखरेख करते हुए बड़े हुए।
पिता द्वारा जोड़ा गया एक छोटा सा प्लॉट,
जिस पर नाना (Daula गाँव) की मदद से घर बना — वही उस परिवार की उम्मीद बना।
दिन बीते, साल बीते… संघर्ष ने एक जिद को जन्म दिया।
वही बच्चा आगे चलकर बना, दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ा DU से पास-आउट फिर MBA छात्र, छात्रसंघ राजनीति में सक्रिय, जिसने किताबों से निकलकर स्टार्टअप की दुनिया में अपनी पहचान बनाई और अब उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय लिख रहा है।
जी हाँ, बात हो रही है कमल जोशी की।
कमल जोशी कोई पारंपरिक राजनेता नहीं हैं।
वो एक सीरियल स्टार्टअप फाउंडर हैं — ऐसे व्यक्ति जिन्होंने हजारों लोगों को घर बैठे कमाने का माध्यम दिया।
Housewife हों,
students हों,
या working professionals — कमल जोशी ने लोगों को सिखाया कि
दिन के सिर्फ 2–3 घंटे देकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
यही वजह है कि उनके साथ सिर्फ follower नहीं, भरोसा करने वाले लोग जुड़े।
लेकिन उनकी राह कभी आसान नहीं रही।
साल 2024, हल्द्वानी।
कमल जोशी के संस्थान पर लोकल गुंडों द्वारा हमला किया गया, सामान लूटा गया, उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
उस वक्त बहुत लोग टूट जाते… लेकिन कमल जोशी का जज़्बा नहीं टूटा।
2025 में वो फिर हल्द्वानी लौटे — इस बार और मजबूत होकर।
नया स्टार्टअप खड़ा किया, और आज 4 से 5 स्टार्टअप्स के मालिक हैं। यहीं से उनकी कहानी ने राजनीति की ओर रुख लिया।
15 अगस्त 2025,
यूकेडी के अध्यक्ष पूरन सिंह कठैत ने
कमल जोशी को केंद्रीय प्रभारी (युवा) की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी।
सीधी बड़ी जिम्मेदारी — और कमल जोशी ने बहुत कम समय में बड़े-बड़े धुरंधरों को कड़ी टक्कर दी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ राजनीति के अनुभव को साथ लेकर, जब वो उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) से जुड़े, तो संगठन में एक नई ऊर्जा दिखाई देने लगी।
मात्र 3 महीनों के भीतर, उन्होंने 14 जिलों और 70 विधानसभा क्षेत्रों में
युवाओं और महिलाओं को जिम्मेदारियाँ देकर
एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया जो सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि मैदान में काम करने वाला संगठन बन गया।
आज कमल जोशी यूकेडी में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।
वो एक उभरता हुआ सितारा हैं, जो धीरे-धीरे पूरे कुमाऊँ की जान और हर युवा का मान बनता जा रहा है।
गढ़वाल उनका दिल है, तो कुमाऊँ उनकी साँसें।
अब सवाल ये नहीं है कि कमल जोशी राजनीति में क्या करेंगे — बल्कि सवाल ये है कि
उत्तराखंड की राजनीति ऐसे युवाओं को कितना आगे बढ़ने देगी, और पार्टी उन्हें कितना समर्थन दे पाएगी।
आने वाला समय बताएगा कि स्टार्टअप, संघर्ष और संगठन से निकला ये युवा
पहाड़ और प्रदेश के लिए क्या नया इतिहास रचता है।
अगर आपको कमल जोशी की ये कहानी अच्छी लगी हो, तो इसे शेयर करें, और कमेंट में अपनी राय ज़रूर दें —
अच्छी या आलोचनात्मक, बस शब्दों की मर्यादा बनी रहे।
धन्यवाद
#गढ़वाल_कुमाऊँ_एक_हैं