Uttarakhand Student Federation - USF

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Official handle of USF – Uttarakhand Student Federation (Since 1988)
पहाड़ की छात्र शक्ति की आवाज • युवा नेतृत्व • छात्र अधिकार
उत्तराखंड हित के संघर्ष में सबसे आगे
यह USF का आधिकारिक पेज है, जिसे उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) द्वारा संचालित किया जाता है। USF – Uttarakhand Student Federation उत्तराखंड के छात्रों की सबसे पुरानी और जानी-मानी छात्र शक्ति है, जिसकी स्थापना 1988 में हुई थी। यह संगठन पहाड़

के युवाओं को सशक्त आवाज़, नेतृत्व और छात्र अधिकारों के लिए संघर्ष प्रदान करने के लिए समर्पित है।
USF का उद्देश्य केवल शिक्षा-संबंधी मुद्दों का समाधान नहीं है, बल्कि समाज और प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर छात्र समुदाय की आवाज़ को आगे लाना भी है।

हमारा संगठन छात्रों के शैक्षिक अधिकार, सामाजिक न्याय, रोजगार, शिक्षा नीतियाँ, परीक्षा-संबंधित समस्याएँ और लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर निरंतर काम करता है। USF छात्रों को संगठित कर एक मजबूत युवा नेतृत्व तैयार करता है जो उत्तराखंड हित के संघर्षों में सबसे आगे रहता है।

USF को उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के सहयोग और मार्गदर्शन से संचालित किया जाता है, ताकि छात्रों के हक़ और प्रदेश के विकास के लिए साझा आवाज़ बनाई जा सके।
हम अपने प्रदेश के युवाओं को प्रेरित करते हैं कि वे शिक्षा, समाज और राजनीति के हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएँ और उत्तराखंड की उन्नति और भविष्य के निर्माण में योगदान दें।

कमल जोशी जी को उत्तराखंड मैं लोग अब एक नए नाम से देघाट मैं पुकारने लगे काला पंडत कमल जोशी जिंदाबाद क्या मतलब है काला पंड...
23/02/2026

कमल जोशी जी को उत्तराखंड मैं लोग अब एक नए नाम से देघाट मैं पुकारने लगे काला पंडत कमल जोशी जिंदाबाद
क्या मतलब है काला पंडत का दोस्तो?
#छात्रसंघ

युवाओं की inspiration ashutosh negi जी
20/02/2026

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जय हो धामी जी        #गढ़वाल_कुमाऊँ_एक_हैं
15/02/2026

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उक्रांद का हल्ला बोल
15/02/2026

उक्रांद का हल्ला बोल

13/02/2026

उत्तराखंड की हालत रोजाना खराब होते जा रहे हैं , बच्चियाँ ग़ायब हो रही हैं , r**e case बढ़ते जा रहे हैं उन्ही के बीच 2026 के शुरुआती दिनों मैं ही यह आंकड़ा double हुआ, कमाल जोशी जी के वीडियो ने proof के सरकार की नाकामी को दर्शाया है , ऐसे युवा को हमारा पूरा सपोर्ट है **ecase

तीन साल का एक बच्चा… जिसके सिर से पिता का साया उठ गया।आज तक न ये पता चला कि क्या हुआ, कैसे हुआ — बस इतना पता था कि अब ज़...
01/02/2026

तीन साल का एक बच्चा… जिसके सिर से पिता का साया उठ गया।
आज तक न ये पता चला कि क्या हुआ, कैसे हुआ — बस इतना पता था कि अब ज़िंदगी आसान नहीं रहने वाली।
वो बच्चा, उसका पाँच साल का बड़ा भाई और उनकी माँ — तीनों ने वो संघर्ष देखा
जो अक्सर लोगों को भीतर से तोड़ देता है।
माँ सुबह काम पर जाती,
दोपहर तक का बच्चों के लिए भोजन बनाती। घर में दो छोटे बच्चे — एक तीन साल का, दूसरा पाँच साल का — इतनी कम उम्र में खुद अपनी देखरेख करते हुए बड़े हुए।
पिता द्वारा जोड़ा गया एक छोटा सा प्लॉट,
जिस पर नाना (Daula गाँव) की मदद से घर बना — वही उस परिवार की उम्मीद बना।
दिन बीते, साल बीते… संघर्ष ने एक जिद को जन्म दिया।
वही बच्चा आगे चलकर बना, दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ा DU से पास-आउट फिर MBA छात्र, छात्रसंघ राजनीति में सक्रिय, जिसने किताबों से निकलकर स्टार्टअप की दुनिया में अपनी पहचान बनाई और अब उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय लिख रहा है।
जी हाँ, बात हो रही है कमल जोशी की।
कमल जोशी कोई पारंपरिक राजनेता नहीं हैं।
वो एक सीरियल स्टार्टअप फाउंडर हैं — ऐसे व्यक्ति जिन्होंने हजारों लोगों को घर बैठे कमाने का माध्यम दिया।
Housewife हों,
students हों,
या working professionals — कमल जोशी ने लोगों को सिखाया कि
दिन के सिर्फ 2–3 घंटे देकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
यही वजह है कि उनके साथ सिर्फ follower नहीं, भरोसा करने वाले लोग जुड़े।
लेकिन उनकी राह कभी आसान नहीं रही।
साल 2024, हल्द्वानी।
कमल जोशी के संस्थान पर लोकल गुंडों द्वारा हमला किया गया, सामान लूटा गया, उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
उस वक्त बहुत लोग टूट जाते… लेकिन कमल जोशी का जज़्बा नहीं टूटा।
2025 में वो फिर हल्द्वानी लौटे — इस बार और मजबूत होकर।
नया स्टार्टअप खड़ा किया, और आज 4 से 5 स्टार्टअप्स के मालिक हैं। यहीं से उनकी कहानी ने राजनीति की ओर रुख लिया।
15 अगस्त 2025,
यूकेडी के अध्यक्ष पूरन सिंह कठैत ने
कमल जोशी को केंद्रीय प्रभारी (युवा) की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी।
सीधी बड़ी जिम्मेदारी — और कमल जोशी ने बहुत कम समय में बड़े-बड़े धुरंधरों को कड़ी टक्कर दी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ राजनीति के अनुभव को साथ लेकर, जब वो उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) से जुड़े, तो संगठन में एक नई ऊर्जा दिखाई देने लगी।
मात्र 3 महीनों के भीतर, उन्होंने 14 जिलों और 70 विधानसभा क्षेत्रों में
युवाओं और महिलाओं को जिम्मेदारियाँ देकर
एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया जो सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि मैदान में काम करने वाला संगठन बन गया।
आज कमल जोशी यूकेडी में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।
वो एक उभरता हुआ सितारा हैं, जो धीरे-धीरे पूरे कुमाऊँ की जान और हर युवा का मान बनता जा रहा है।
गढ़वाल उनका दिल है, तो कुमाऊँ उनकी साँसें।
अब सवाल ये नहीं है कि कमल जोशी राजनीति में क्या करेंगे — बल्कि सवाल ये है कि
उत्तराखंड की राजनीति ऐसे युवाओं को कितना आगे बढ़ने देगी, और पार्टी उन्हें कितना समर्थन दे पाएगी।
आने वाला समय बताएगा कि स्टार्टअप, संघर्ष और संगठन से निकला ये युवा
पहाड़ और प्रदेश के लिए क्या नया इतिहास रचता है।
अगर आपको कमल जोशी की ये कहानी अच्छी लगी हो, तो इसे शेयर करें, और कमेंट में अपनी राय ज़रूर दें —

अच्छी या आलोचनात्मक, बस शब्दों की मर्यादा बनी रहे।
धन्यवाद



#गढ़वाल_कुमाऊँ_एक_हैं

22/01/2026

ज्योति अधिकारी को दिलाई गई UKD की सदस्यता

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