Sahakari Inter College ,Mihrawan,Jaunpur, UP India

Sahakari Inter College ,Mihrawan,Jaunpur, UP India सन् 1948 में स्व० ठाकुर राम उग्रह सिंह द्वारा स्थापित, राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त इंटर कालेज

आज दिनांक 20/ 05/ 2026 को सहकारी इन्टर कालेज मिहरावां जौनपुर में विद्यालय के नवनिर्मित स्मार्ट क्लास,कम्प्यूटर रूम के उद...
20/05/2026

आज दिनांक 20/ 05/ 2026 को सहकारी इन्टर कालेज मिहरावां जौनपुर में विद्यालय के नवनिर्मित स्मार्ट क्लास,कम्प्यूटर रूम के उद्घाटन के लिए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र कुमार सिंह (I.P.S.) पुलिस अधीक्षक आगरा (उ०प्र०) ने विद्यालय के नवनिर्मित स्मार्ट क्लास, कम्प्यूटर रूम का उद्घाटन फीता काट कर किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ० प्रमोद कुमार सिंह, विशिष्ट अतिथि श्री सन्तोष कुमार सिंह, विद्यालय के प्रबन्धक श्री राजीव कुमार सिंह उप प्रबन्धक श्री कमलेश राय, प्रधानाचार्य डॉ० राम दत्त सिंह मन्चस्थ रहे।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर तथा घूप, दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। तत्पश्चात मन्चस्थ अतिथियों का माल्यार्पण कर तथा शाल एवं अंगवस्त्र पहनाकर और स्मृति चिन्ह् प्रदान कर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में स्काउट गाइड के सभी छात्र छात्रायें उपस्थित रहे। पूर्व में हुए स्काउट गाइड के ग्रैंड फिनाले और डायमंड जुबली के 19 वीं नेशनल जंबूरी लखनऊ (उ०प्र०) मे दिनांक 23 नवंबर से 29 नवंबर तक, वृंदावन के प्रांगण में वाराणसी मंडल के जनपद जौनपुर से सहकारी इंटर कॉलेज मिहरावां जौनपुर के 25 गाइड और 17 स्काउट तथा एक स्काउटर और एक बार, एक गाइडर ने प्रतिभाग किया जिसमें विद्यालय एवम् जनपद का नाम रोशन किया और सभी प्रतियोगिताओं में शामिल हुए विद्याथियों का कार्यक्रम बहुत ही सराहनीय रहा, जिसमें भारत के सभी राज्य तथा सभी केंद्र शासित प्रदेश तथा रेलवे विभाग के सभी विंग और श्रीलंका, सऊदी अरब, नेपाल आदि जैसी देशों ने इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालय के सभी स्काउट गाइड को मुख्य अतिथि एवं सभी मन्चस्थो द्वारा मेडल्स पहनाकर तथा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र कुमार सिंह ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि जीवन में सकारात्मक सोच रखने वाले मनुष्यों को हमेशा इस बात पर विश्वास रहता है कि आने वाला कल, बीते हुए कल से अच्छा रहेगा, बीते हुए कल के बारे में शिकायत करके, समय व्यर्थ करने की अपेक्षा, समय का पूरा उपयोग करके आने वाले कल को बेहतर बनाना ज्यादा अच्छा है। विद्यार्थियों को अपने जीवन में कभी भी नकारात्मक सोच नहीं रखनी चाहिए। नकारात्मक सोच रखने वाला व्यक्ति जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता है। कभी भी अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटना चाहिए। जो व्यक्ति ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, उन्हें देर सबेर सफलता अवश्य मिलती है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डाॅ० राम दत्त सिंह उपस्थित सभी को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विद्यालय के विद्यार्थियों को स्काउट गाइड प्रोग्राम में ऐतिहासिक सफलता के लिए विद्यालय की अध्यापिका श्रीमती रेनू यादव एवं श्री निशार अहमद के योगदान की प्रशंसा करते हुए उनके कार्यो की सराहना की, उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समस्या रुपी अवरोधों से विचलित हुए बिना अपने कर्तव्य पथ पर गतिमान रहता है, वही सफलता के लक्ष्य को प्राप्त कर पाता है।
"शिक्षक केवल ज्ञान का दान ही नहीं करते, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का आधार भी तैयार करते हैं। एक अच्छे शिक्षक की प्रेरणा, विद्यार्थियों के जीवन को संवारकर समाज और देश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है। जिनके मार्गदर्शन से हमारी नई पीढ़ी उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होती है।
विद्यालय के प्रबंधक श्री राजीव कुमार सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि स्वयं के पुरुषार्थ के बिना जीवन में उन्नति एवं उत्थान के द्वार भी स्वतः बंद हो जाते हैं। दूसरे आपको केवल सलाह दे सकते हैं, लेकिन उस पर चलना आपके स्वयं के हाथों में ही है। केवल आप ही इस दुनिया में स्वयं अपनी तकदीर बदल सकते हैं। केवल आप ही स्वयं के चेहरे पर मुस्कुराहट ला सकते हैं एवं केवल आप ही स्वयं अपने जीवन को सुखी और आनंदमय बना सकते हैं। आपका स्वयं का पुरुषार्थ ही आपकी सफलता एवं प्रसन्नता का आधार है। आपकी किसी भी समस्या का श्रेष्ठ हल आपके सिवा किसी और के पास नहीं हो सकता है। केवल आप स्वयं ही अपनी प्रत्येक समस्या का हल ढूँढ सकते हैं एवं अपने जीवन को एक आदर्श जीवन बना सकते हैं। गहराई से मनोमंथन करने पर आप पाओगे कि आपके सिवा कोई और नहीं जो आपके जीवन को सुखमय एवं आनंदमय बना सकता है क्योंकि दूसरे केवल मार्ग दिखा पायेंगे, चलना स्वयं को ही पड़ेगा।
कार्यक्रम में, अपने अध्यक्षिय सम्बोधन में डाॅ० प्रमोद कुमार सिंह सभी के सम्बोधनो की समीक्षा करने के उपरांत अपने सम्बोधन में कहा कि उपदेश करना जितना आसान है, उन्हें आचरण में धारण करना उतना ही कठिन है। वाणी के बजाय कार्य से दिए गए उदाहरण कही अधिक प्रभावी होते हैं। कोरा उपदेश भी तब तक कोई काम नहीं आता जब तक उसे चरितार्थ न किया जाये। प्रत्येक सफल व्यक्तियों में एक बात की समानता मिलती है और वो ये कि उन्होंने केवल वाणी से नहीं अपितु अपने कार्यों से भी उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। उन्होंने जो कहा वही किया। बिना पुरुषार्थ के हमारे महान से महान संकल्प भी केवल रेत के विशाल महल का निर्माण करने जैसे हो जाते हैं। हमारे पास संकल्प रूपी मजबूत आधारशिला तो होनी ही चाहिए पर साथ में पुरुषार्थ रूपी पिलर भी होने चाहिए, जिस पर सफलता रुपी गगनचुम्बी महल का निर्माण संभव हो सके। संकल्प और पुरुषार्थ ही किसी व्यक्ति के जीवन में सफलता का आधार है। श्रेष्ठ उपदेशों को आचरण में उतारना ही जीवन को श्रेष्ठ बनाने की अनिवार्यता भी है। कार्यक्रम का कुशल संचालन विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक श्री ओम प्रकाश सिंह ने अत्यंत कुशलता पूर्वक किया। विद्यालय के विद्यार्थियों का आज के शिक्षण के पश्चात् ग्रीष्मा अवकाश के कारण आज विद्यालय के शिक्षण कार्य का अन्तिम दिन होने पर, उपस्थित सभी विद्यार्थियों को लगभग चालीस दिनो के अवकाश का सदुपयोग करने आवश्यक बताई गई, तथा आज स्मार्ट क्लास,कम्प्यूटर रूम के उद्घाटन अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षिकाओं, विद्यार्थीयों तथा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीयों के द्वारा उपस्थित रह कर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया गया।

सहकारी इन्टर कालेज मिहरावां जौनपुर में आज दिनांक20/05/2026 को विद्यालय के नवनिर्मित स्मार्ट क्लास,कम्प्यूटर रूम के उद्घा...
20/05/2026

सहकारी इन्टर कालेज मिहरावां जौनपुर में आज दिनांक20/05/2026 को विद्यालय के नवनिर्मित स्मार्ट क्लास,कम्प्यूटर रूम के उद्घाटन के लिए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र कुमार सिंह (I.P.S.) वर्तमान में पुलिस अधीक्षक आगरा (उ०प्र०) जो विद्यालय के पुर्व छात्र रहे हैं और क्षेत्र के हड़ही गाँव के मूल निवासी है और पूर्व में विद्यालय के पुरातन छात्र सम्मेलन कार्यक्रम में अपनी प्रशासनिक व्यस्तता के कारण उपस्थित न होने के कारण अपने छोटे भाई श्री सन्तोष कुमार सिंह के साथ, विद्यालय की प्रार्थना सभा में उपस्थित होकर विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रार्थना मात पिता वंन्दन "मुझे इस दुनिया में लाया मुझे बोलना चलना सिखाया" तथा "जन गण मन अधिनायक" को विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सुन कर अपने सम्बोधन में उनकी प्रशंसा करते हुए अपने जीवन में ऊॅचा लक्ष्य रखने का मूल मंत्र देत हुए, अपने परिवार, समाज, क्षेत्र तथा देश के विकास के लिए अपनी पूरी निष्ठा एवं लगन से कार्य करने का आशीर्वाद दिया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ० प्रमोद कुमार सिंह, विद्यालय के प्रबन्धक श्री राजीव कुमार सिंह उप प्रबन्धक श्री कमलेश राय, प्रधानाचार्य डॉ० राम दत्त सिंह विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ सभी शिक्षक, शिक्षिकाये, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

आज दिनांक 20/ 05/ 2026 को सहकारी इन्टर कालेज, मिहरावां, जौनपुर के एन० सी० सी० कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर देने के पश्चात...
20/05/2026

आज दिनांक 20/ 05/ 2026 को सहकारी इन्टर कालेज, मिहरावां, जौनपुर के एन० सी० सी० कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर देने के पश्चात, संस्थापक प्रबंधक स्व० ठा० राम उग्रह सिंह की प्रतिमा पर सर्वप्रथम कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र कुमार सिंह, अध्यक्ष डॉ० प्रमोद कुमार सिंह, प्रबंधक श्री राजीव कुमार सिंह,विशिष्ट अतिथि श्री सन्तोष कुमार सिंह ने संस्थापक प्रबंधक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। विद्यालय के उप प्रबंधक श्री कमलेश राय, इन्टर कालेज के प्रधानाचार्य डॉ० राम दत्त सिंह, विद्यालय के उप प्रधानाचार्य श्री बृजेश कुमार सिंह, वरिष्ठ शिक्षक श्री राजेश कुमार सिंह, श्री ओम प्रकाश सिंह, श्री अवधेश कुमार सिंह, श्री बृजेश कुमार सिंह, श्री देवेंद्र कुमार यादव, श्री दिनेश कुमार सरोज द्वारा माल्यार्पण व श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया।
शत् शत् नमन......🙏

सहकारी इन्टर कालेज मिहरावां जौनपुर में आज दिनांक20/05/2026 को विद्यालय के नवनिर्मित स्मार्ट क्लास,कम्प्यूटर रूम के उद्घा...
20/05/2026

सहकारी इन्टर कालेज मिहरावां जौनपुर में आज दिनांक20/05/2026 को विद्यालय के नवनिर्मित स्मार्ट क्लास,कम्प्यूटर रूम के उद्घाटन के लिए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र कुमार सिंह (I.P.S.) वर्तमान में पुलिस अधीक्षक आगरा (उ०प्र०) जो विद्यालय के पुर्व छात्र रहे हैं और क्षेत्र के हड़ही गाँव के मूल निवासी है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री सन्तोष कुमार सिंह के साथ, विद्यालय के नवीकृत (Renovated) प्रधानाचार्य कक्ष में उनका स्वागत सम्मान किया गया। तत्पश्चात् इस अवसर पर विद्यालय के एन० सी० सी० कैडेटों द्वारा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र सिंह को गार्ड आफ आनर देकर सम्मानित किया। इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ० प्रमोद कुमार सिंह, विद्यालय के प्रबन्धक श्री राजीव कुमार सिंह उप प्रबन्धक श्री कमलेश राय, प्रधानाचार्य डॉ० राम दत्त सिंह भी गार्ड आफ आनर्स कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के साथ सम्मलित रहे। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ सभी शिक्षक, शिक्षिकाये, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

*त्रिदिवसीय समर कैम्प एवं एडवेंचर प्रोग्राम*सहकारी इण्टर कालेज मिहरावाँ जौनपुर के प्रांगण में  दिनांक- 10/ 05/ 2026 को भ...
11/05/2026

*त्रिदिवसीय समर कैम्प एवं एडवेंचर प्रोग्राम*

सहकारी इण्टर कालेज मिहरावाँ जौनपुर के प्रांगण में दिनांक- 10/ 05/ 2026 को भारत स्काउट एवं गाइड संस्था की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय समर कैंप एवं एडवेंचर प्रोग्राम का भव्य समापन हुआ।
इस कार्यक्रम में कुल चार विद्यालयों के चयनित विद्यार्थियों ने भाग लिया। समापन समारोह में कार्यक्रम की अध्यक्षता इन्टर कालेज समोधपुर जौनपुर के पूर्व प्रधानाचार्य एवं भारत स्काउट गाइड संस्था के जौनपुर मुख्य आयुक्त डाॅ० रणजीत सिंह ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सचिव भारत स्काउट एवं गाइड डाॅ० आलोक कुमार सिंह प्रधानाचार्य राणा प्रताप इण्टर कालेज, रामद‌यालगंज एवं विशिष्ट अतिथि श्री सुधाकर सिंह (मंडल अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ) रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ० आलोक कुमार सिंह ने समर कैंप के सफल आयोजन के लिए मेजबान प्रधानाचार्य डॉ० आर० डी० सिंह की प्रशंसा की और विद्याथियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए ऐसे कार्यक्रम को आवश्यक बताया।
विशिष्ट अतिथि श्री सुधाकर सिंह ने इसी संस्था में विद्यार्थी जीवन में ग्रहण किये गये अपने जिवन को याद करते हुए, खेल-कूद को छात्रों के लिए आवश्यक बताया। अपने अध्यक्षीय उद्‌बोधन में डाॅ० रणजीत सिंह ने कहा कि जब हम मुश्किल परिस्थतियों में होते हैं तब हमें साहस की आवश्यकता होती है और साहस ऐसे ही साहसी खेलों के माध्यम से छात्रों में भरा जा सकता है।
अन्त में सम्मानित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रधानाचार्य डाॅ० राम दत्त सिंह जो स्वाउट गाइड संस्था के सहायक जिला कामेश्नर भी है ने कहा कि डॉ० रणजीत सिंह जी ने जनपद जौनपुर में स्काउट/गाइड- प्रशिक्षण में अपना अप्रितम योगदान दिया है। पूरा जीवन छात्रहित में समर्पित कर दिया है। आप हमारे सच्चे मार्गदर्शक है। जिला सचिव डॉ०आलोक कुमार सिंह की प्रशंसा करते हुए हुए कहा कि जब से आप जिला सचिव बने हैं, तब से स्काउट गाइड के कार्यक्रमों में और भी निखार आया है। विद्यालय के लिए हमेशा उपलव्ध रहने वाले श्री सुधाकर सिंह जी की भी आपने तारीफ की। प्रधानाचार्य जी ने कानपुर से पधारे विशेष प्रशिक्षक श्री रमाकान्त जी के निर्देशन में कार्य कर रहे स्काउट गाइड काउंसलरों की भी विशेषरूप से प्रशंसा की।
कार्यक्रम का संचालन श्री ओम प्रकाश सिंह और श्री निशार अहमद द्वारा सयुंक्त रूप से किया गया।
अन्त में राष्ट्रगान के साथ समापन समारोह सम्पन्न हुआ।

*त्रिदिवसीय समर कैम्प एवं एडवेंचर प्रोग्राम*सहकारी इण्टर कालेज मिहरावाँ जौनपुर के प्रांगण में  दिनांक- 10/ 05/ 2026 को भ...
11/05/2026

*त्रिदिवसीय समर कैम्प एवं एडवेंचर प्रोग्राम*

सहकारी इण्टर कालेज मिहरावाँ जौनपुर के प्रांगण में दिनांक- 10/ 05/ 2026 को भारत स्काउट एवं गाइड संस्था की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय समर कैंप एवं एडवेंचर प्रोग्राम का भव्य समापन हुआ।
इस कार्यक्रम में कुल चार विद्यालयों के चयनित विद्यार्थियों ने भाग लिया। जो निम्नवत् है-
1-एम० एस० एस० पब्लिक स्कूल जमालपुर, जौनपुर -56 बच्चे
2- नेहरू बालोद्यान इन्टर कालेज जौनपुर - 25 बच्चे
3- सहकारी इण्टर कालेज मिहरावों जौनपुर - 22 बच्चे
4- नेशनल चिल्ड्रेन एकेड‌मी दुधौरा जौनपुर - 03 बच्चे
कुल 106 विद्यार्थियों के समापन समारोह में, कार्यक्रम की अध्यक्षता इन्टर कालेज समोधपुर, जौनपुर के पूर्व प्रधानाचार्य एवं भारत स्काउट एवं गाइड संस्था जौनपुर के मुख्य आयुक्त डाॅ० रणजीत सिंह ने किया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सचिव भारत स्काउट एवं गाइड डाॅ० आलोक कुमार सिंह प्रधानाचार्य, राणा प्रताप इण्टर कालेज, रामद‌यालगंज जौनपुर एवं विशिष्ट अतिथि श्री सुधाकर सिंह (मंडल अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ) रहे।
कार्यक्रम में सभी मन्चस्थो द्वारा सर्वप्रथम माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यापर्ण तथा धूपदीप प्रज्ज्वलित कर पूजन अर्पण किया गया।
कार्यक्रम के मा० अध्यक्ष, मुख्य अतिथि एवं अतिथियों तथा बाहर से आये प्रशिक्षकों, कार्यक्रम के टीम प्रभारियों का विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ० आर०डी० सिंह ने स्वागत किया। मा० अध्यक्ष, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का विद्यालय के कार्यक्रम प्रभारी श्री ओमप्रकाश सिंह, विद्यालय की अध्यापिका शालिनी मिश्रा एवं अन्य अध्यापकों द्वारा अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न एवं माल्यापर्ण द्वारा स्वागत किया गया । विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सुन्दर सरस्वती वन्दना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्री ओम प्रकाश सिंह और श्री निशार अहमद द्वारा सयुंक्त रूप से किया गया।

*सेवा करना ही स्काउट गाइड का परम उद्देश्य*  डॉ० रणजीत सिंह (जिला मुख्यायुक्त भारत स्काउट गाइड उत्तर प्रदेश)स्काउट गाइड क...
10/05/2026

*सेवा करना ही स्काउट गाइड का परम उद्देश्य* डॉ० रणजीत सिंह (जिला मुख्यायुक्त भारत स्काउट गाइड उत्तर प्रदेश)
स्काउट गाइड के अन्तर्गत समर कैंप एवं एडवेंचर प्रोग्राम्स का तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 08/05/2026 को सहकारी इंटर कॉलेज मिहरावां जौनपुर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ० रणजीत सिंह ( जिला मुख्य आयुक्त भारत स्काउट गाइड उ०प्र०) रहे, उन्होंने अपने संबोधन ने कहा कि सेवा करना स्काउट गाइड का परम उद्देश्य है। कार्यक्रम मे जनपद के कई प्रतिष्ठित विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। मुख्यरूप से सहकारी इंटर कॉलेज मिहरावां जौनपुर ,नेशनल चिल्ड्रेन एकेडमी दूधोरा , एम० एस० एस० पब्लिक स्कूल पुरानी बाजार, जौनपुर, नेहरू बालोद्यान कन्हईपुर जौनपुर के छात्र छात्राओं ने प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। जिसमें साहसिक क्रियाकलापो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ० शैलेंद्र कुमार सिंह (मुख्यालय आयुक्त भारत स्काउट गाइड) प्रधानाचार्य बयालसी इंटर कॉलेज जलालपुर जौनपुर रहे।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम मन्चस्थ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा धूप दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। तत्पश्चात विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ० राम दत्त सिंह तथा विद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा मन्चस्थ अतिथियों का माल्यार्पण कर एवं अंगवस्त्र प्रदान करके तथा प्रतिक चिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में शारीरिक सक्षमता, आत्मरक्षा के प्रति जागरूकता एवं खेल भावना को बढ़ावा देना है। प्रशिक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं को एडवेंचर की मूलभूत तकनीकों, संतुलन, गति नियंत्रण एवं फिटनेस से संबंधित विभिन्न अभ्यासों की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ० शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें अनुशासन एवं स्वस्थ जीवन शैली की ओर भी प्रेरित करते हैं। उन्होंने बताया कि नियमित अभ्यास से छात्र-छात्राएँ राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने योग्य बन सकते हैं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ० राम दत्त सिंह ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्याथियों के प्रयासों की सराहना की तथा छात्रों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
विद्यालय के तीन दिवसीय एडवेंचर कैंप एवं समर कैंप के आयोजन में प्रतिभागियों ने बड़े ही उत्साह पूर्वक अपने प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विभिन्न प्रकार की साहसिक गतिविधिया सीखी, जिसमें रोपवे मंकी ब्रिज, लेटर क्लाइंब, टायर टनल, टायर जंपिंग,रोप क्लाविंग जिगजग क्लाइंबिंग, राइफल शूटिंग, कैंप फायर जिपलाइन नेट करावलिंग रशियन वॉल, टायर वॉल आदि कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों और कुछ अध्यापकों ने भी प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी अध्यापक और अध्यापिकाए एवं भारी संख्या मे छात्र-छात्राएं इस समर कैंप एवं एडवेंचर कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

🚩‼️🏵जय श्री राम🏵‼️ 🚩भगवान राम के जन्मदिवस के पावनतम शुभ अवसर पर शीतल मंद सुगंध पवन लेकर बसंत ऋतु आई हैकूक रही पेड़ों पर ...
27/03/2026

🚩‼️🏵जय श्री राम🏵‼️ 🚩
भगवान राम के जन्मदिवस के पावनतम शुभ अवसर पर शीतल मंद सुगंध पवन लेकर बसंत ऋतु आई है
कूक रही पेड़ों पर कोयल ध्वनि लगती शहनाई है ।

जग में अब तक जो भी आए भगवान राम सर्वोत्तम हैं
उनका प्यार न्यारा जीवन आदर्श और अति उत्तम है
आओ हम सब मिलकर के श्री राम नाम स्मरण करें
उनका जीवन अपना कर हम खुद का भी जीवन धन्य करें
आप सभी को चैत्र रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं , प्रभु श्री रामचन्द्र जी महाराज की कृपा दृष्टि आप सब पर सदैव बनी रहे आज श्री रामनवमी और महानवमी के परम पावन अवसर पर आप सभी सनातनीयो और देशभक्त देशवासियों के लिए,भारत के लिए देश धर्म की उन्नति के लिए, सुख शांति समृद्धि ऐश्वर्य सद्बुद्धि और दिव्या गुणों की उत्पत्ति के लिए, ईश्वर से प्रार्थना करते हुए श्री राम नवमी की हार्दिक बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएं प्रेषित कर रहा हूं।♥🙏🚩
जय श्री राम ‼️🚩🙏

🚩‼️🏵🪷जय माता दी🪷🏵‼️🚩   🚩‼️"माँ सिद्धिदात्री"‼️🚩या देवी सर्वभूतेषु माँ  सिद्धिदात्री  रूपेण संस्थिता।      नमस्तस्यै     ...
27/03/2026

🚩‼️🏵🪷जय माता दी🪷🏵‼️🚩

🚩‼️"माँ सिद्धिदात्री"‼️🚩
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियाँ होती हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है। इनके नाम इस प्रकार हैं-
माँ सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं। देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में 'अर्द्धनारीश्वर' नाम से प्रसिद्ध हुए। माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है। प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह माँ सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करे। उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो। इनकी कृपा से अनंत दुख रूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।
नवदुर्गाओं में माँ सिद्धिदात्री अंतिम हैं। अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना में प्रवत्त होते हैं। इन सिद्धिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है। सिद्धिदात्री माँ के कृपापात्र भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण करना चाहे। वह सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और स्पृहाओं से ऊपर उठकर मानसिक रूप से माँ भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता हुआ, विषय-भोग-शून्य हो जाता है। माँ भगवती का परम सान्निध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है। इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती। माँ के चरणों का यह सान्निध्य प्राप्त करने के लिए भक्त को निरंतर नियमनिष्ठ रहकर उनकी उपासना करने का नियम कहा गया है। ऐसा माना गया है कि माँ भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन, हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है। विश्वास किया जाता है कि इनकी आराधना से भक्त को अणिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा गया है कि यदि कोई इतना कठिन तप न कर सके तो अपनी शक्तिनुसार जप, तप, पूजा-अर्चना कर माँ की कृपा का पात्र बन सकता ही है। माँ की आराधना के लिए इस श्लोक का प्रयोग होता है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में नवमी के दिन इसका जाप करने का नियम है।

या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

अर्थ :- हे माँ ! सर्वत्र विराजमान और माँ सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे अपनी कृपा का पात्र बनाओ।
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"जय माँ सिद्धिदात्री"

‼️🚩🚩🪷जय माँ महागौरी🪷🚩🚩‼️आज माता रानी का आठवा जगराता है जिसे हम महागौरी के रूप मे मनाते है              माँ का ये रूप सुख...
26/03/2026

‼️🚩🚩🪷जय माँ महागौरी🪷🚩🚩‼️
आज माता रानी का आठवा जगराता है जिसे हम महागौरी के रूप मे मनाते है
माँ का ये रूप सुख प्रदान करने नवरात्री के आठवें दिन आदि शक्ति माँ दुर्गा के महागौरी स्वरूप की उपासना विधि
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माँ महागौरी स्वरूप एवं पौरिणीक महात्म्य
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श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बर धरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

माँ दुर्गा का अष्टम रूप महागौरी हैं। महागौरी की चार भुजाएं हैं उनकी दायीं भुजा अभय मुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में त्रिशूल शोभता है। बायीं भुजा में डमरू डम डम बज रही है और नीचे वाली भुजा से देवी गौरी भक्तों की प्रार्थना सुनकर वरदान देती हैं। जो स्त्री इस देवी की पूजा भक्ति भाव सहित करती हैं उनके सुहाग की रक्षा देवी स्वयं करती हैं। कुंवारी लड़की मां की पूजा करती हैं तो उसे योग्य पति प्राप्त होता है। पुरूष जो देवी गौरी की पूजा करते हैं उनका जीवन सुखमय रहता है देवी उनके पापों को जला देती हैं और शुद्ध अंत:करण देती हैं। मां अपने भक्तों को अक्षय आनंद और तेज प्रदान करती हैं। इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इसलिए ये महागौरी कहलाती हैं। नवरात्रि के अष्टम दिन इनका पूजन किया जाता है। इनकी उपासना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। माँ महागौरी की आराधना से किसी प्रकार के रूप और मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है। उजले वस्त्र धारण किये हुए महादेव को आनंद देवे वाली शुद्धता मूर्ती देवी महागौरी मंगलदायिनी हों।

इनका वर्ण पूर्णतः गौर है। इस गौरता की उपमा शंख, चन्द्र और कून्द के फूल की गयी है। इनकी आयु आठ वर्ष बतायी गयी है। इनका दाहिना ऊपरी हाथ में अभय मुद्रा में और निचले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। बांये ऊपर वाले हाथ में डमरू और बांया नीचे वाला हाथ वर की शान्त मुद्रा में है। पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि व्रियेअहं वरदं शम्भुं नान्यं देवं महेश्वरात्। गोस्वामी तुलसीदास के अनुसार इन्होंने शिव के वरण के लिए कठोर तपस्या का संकल्प लिया था जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था। इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर जब शिव जी ने इनके शरीर को पवित्र गंगाजल से मलकर धोया तब वह विद्युत के समान अत्यन्त कांतिमान गौर हो गया, तभी से इनका नाम गौरी पड़ा।
महागौरी आदी शक्ति हैं इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाश-मान होता है इनकी शक्ति अमोघ फलदायिनी हैम माँ महागौरी की अराधना से भक्तों को सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा देवी का भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है।

दुर्गा सप्तशती में शुभ निशुम्भ से पराजित होकर गंगा के तट पर जिस देवी की प्रार्थना देवतागण कर रहे थे वह महागौरी हैं। देवी गौरी के अंश से ही कौशिकी का जन्म हुआ जिसने शुम्भ निशुम्भ के प्रकोप से देवताओं को मुक्त कराया। यह देवी गौरी शिव की पत्नी हैं यही शिवा और शाम्भवी के नाम से भी पूजित होती हैं।

माँ महागौरी पूजा विधि
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नवरात्रे के दसों दिन कुवारी कन्या भोजन कराने का विधान है परंतु अष्टमी के दिन का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। देवी गौरी की पूजा का विधान भी पूर्ववत है अर्थात जिस प्रकार सप्तमी तिथि तक आपने मां की पूजा की है उसी प्रकार अष्टमी के दिन भी देवी की पंचोपचार सहित पूजा करें। देवी का ध्यान करने के लिए दोनों हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करें👇

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं।देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देव और ऋषिगण कहते हैं

माँ महागौरी के मंत्र
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1👉 श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

2👉 या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

माँ महागौरी ध्यान
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वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥
पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥

माँ महागौरी स्तोत्र पाठ
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सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

माँ महागौरी कवच
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ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, हृदयो।
क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥

माँ महागौरी की कथा
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देवी पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, एक बार भगवान भोलेनाथ ने पार्वती जी को देखकर कुछ कह देते हैं। जिससे देवी के मन का आहत होता है और पार्वती जी तपस्या में लीन हो जाती हैं। इस प्रकार वषों तक कठोर तपस्या करने पर जब पार्वती नहीं आती तो पार्वती को खोजते हुए भगवान शिव उनके पास पहुँचते हैं वहां पहुंचे तो वहां पार्वती को देखकर आश्चर्य चकित रह जाते हैं। पार्वती जी का रंग अत्यंत ओजपूर्ण होता है, उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत और कुन्द के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती है, उनके वस्त्र और आभूषण से प्रसन्न होकर देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं।

एक कथा अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ जाता है। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान इन्हें स्वीकार करते हैं और शिव जी इनके शरीर को गंगा-जल से धोते हैं तब देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं तथा तभी से इनका नाम गौरी पड़ा। महागौरी जी से संबंधित एक अन्य कथा भी प्रचलित है इसके जिसके अनुसार, एक सिंह काफी भूखा था, वह भोजन की तलाश में वहां पहुंचा जहां देवी उमा तपस्या कर रही होती हैं। देवी को देखकर सिंह की भूख बढ़ गयी परंतु वह देवी के तपस्या से उठने का इंतजार करते हुए वहीं बैठ गया। इस इंतजार में वह काफी कमज़ोर हो गया। देवी जब तप से उठी तो सिंह की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आती है, और माँ उसे अपना सवारी बना लेती हैं क्योंकि एक प्रकार से उसने भी तपस्या की थी। इसलिए देवी गौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं।

देवी महागौरी का ध्यान, स्रोत पाठ और कवच का पाठ करने से ‘सोमचक्र’ जाग्रत होता है जिससे संकट से मुक्ति मिलती है और धन, सम्पत्ति और श्री की वृध्दि होती है। इनका वाहन वृषभ है।

माँ महागौरी आरती
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नवरात्रि में विशेष है महागौरी का ध्यान।
शिव की शक्ति देती हो अष्टमी को वरदान॥

मन अपना एकाग्र कर नन्दीश्वर को पाया।
सुबह शाम के दूप से काली हो गई काया॥

गंगा जल की धार से शिव स्नान कराया।
देख पति के प्रेम को मन का कमल खिलाया॥

बैल सवारी जब करे शिवजी रहते साथ।
अर्धनारीश्वर रूप में आशीर्वाद का हाथ॥

सर्व कला सम्पूरण माँ साधना करो सफल।
भूलूं कभी ना आपको याद रखूं पल पल॥

जय माँ महागौरी।
जय जय महागौरी॥

माँ दुर्गा की आरती
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जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…
कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय माता दी 🚩

🚩‼️🏵🪷जय माता दी🪷🏵‼️🚩नवरात्री के सातवे दिन आदि शक्ति माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की उपासना विधि 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰माता ...
25/03/2026

🚩‼️🏵🪷जय माता दी🪷🏵‼️🚩
नवरात्री के सातवे दिन आदि शक्ति माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की उपासना विधि
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माता कालरात्रि स्वरूप एवं पौरिणीक महात्म्य
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श्री माँ दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। संसार में कालो का नाश करने वाली देवी कालरात्री ही है। भक्तों द्वारा इनकी पूजा के उपरांत उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती है। दुश्मनों का नाश करती है तथा मनोवांछित फल प्रदान कर उपासक को संतुष्ट करती हैं। दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है। इनके शरीर का रंग घने अंधकार की भाँति काला है, बाल बिखरे हुए, गले में विद्युत की भाँति चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं जो ब्रह्माण्ड की तरह गोल हैं, जिनमें से बिजली की तरह चमकीली किरणें निकलती रहती हैं। इनकी नासिका से श्वास, निःश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालायें निकलती रहती हैं। इनका वाहन ‘गर्दभ’ (गधा) है। दाहिने ऊपर का हाथ वरद मुद्रा में सबको वरदान देती हैं, दाहिना नीचे वाला हाथ अभयमुद्रा में है।

बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और निचले हाथ में खड्ग है। माँ का यह स्वरूप देखने में अत्यन्त भयानक है किन्तु सदैव शुभ फलदायक है। अतः भक्तों को इनसे भयभीत नहीं होना चाहिए । दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन सहस्त्रारचक्र में अवस्थित होता है। साधक के लिए सभी सिध्दैयों का द्वार खुलने लगता है। इस चक्र में स्थित साधक का मन पूर्णत: मां कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है, उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य का वह अधिकारी होता है, उसकी समस्त विघ्न बाधाओं और पापों का नाश हो जाता है और उसे अक्षय पुण्य लोक की प्राप्ति होती है।

मधु कैटभ नामक महापराक्रमी असुर से जीवन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु को निंद्रा से जगाने के लिए ब्रह्मा जी ने इसी मंत्र से मां की स्तुति की थी। यह देवी काल रात्रि ही महामाया हैं और भगवान विष्णु की योगनिद्रा हैं। इन्होंने ही सृष्टि को एक दूसरे से जोड़ रखा है।
देवी काल-रात्रि का वर्ण काजल के समान काले रंग का है जो अमावस की रात्रि से भी अधिक काला है। मां कालरात्रि के तीन बड़े बड़े उभरे हुए नेत्र हैं जिनसे मां अपने भक्तों पर अनुकम्पा की दृष्टि रखती हैं। देवी की चार भुजाएं हैं दायीं ओर की उपरी भुजा से महामाया भक्तों को वरदान दे रही हैं और नीचे की भुजा से अभय का आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं। बायीं भुजा में क्रमश: तलवार और खड्ग धारण किया है। देवी कालरात्रि के बाल खुले हुए हैं और हवाओं में लहरा रहे हैं। देवी काल रात्रि गर्दभ पर सवार हैं। मां का वर्ण काला होने पर भी कांतिमय और अद्भुत दिखाई देता है। देवी कालरात्रि का यह विचित्र रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है अत: देवी को शुभंकरी भी कहा गया है।

दुर्गा सप्तशती के प्रधानिक रहस्य में बताया गया है कि जब देवी ने इस सृष्टि का निर्माण शुरू किया और ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश का प्रकटीकरण हुआ उससे पहले देवी ने अपने स्वरूप से तीन महादेवीयों को उत्पन्न किया। सर्वेश्वरी महालक्ष्मी ने ब्रह्माण्ड को अंधकारमय और तामसी गुणों से भरा हुआ देखकर सबसे पहले तमसी रूप में जिस देवी को उत्पन्न किया वह देवी ही कालरात्रि हैं। देवी कालरात्रि ही अपने गुण और कर्मों द्वारा महामाया, महामारी, महाकाली, क्षुधा, तृषा, निद्रा, तृष्णा, एकवीरा, एवं दुरत्यया कहलाती हैं।

माँ कालरात्रि पूजा विधि
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देवी का यह रूप ऋद्धि सिद्धि प्रदान करने वाला है। दुर्गा पूजा का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है, सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं। इस दिन मां की आंखें खुलती हैं। षष्ठी पूजा के दिन जिस विल्व को आमंत्रित किया जाता है उसे आज तोड़कर लाया जाता है और उससे मां की आँखें बनती हैं। दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व बताया गया है। इस दिन से भक्त जनों के लिए देवी मां का दरवाज़ा खुल जाता है और भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन हेतु पूजा स्थल पर जुटने लगते हैं। सप्तमी की पूजा सुबह में अन्य दिनों की तरह ही होती परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है। इस दिन अनेक प्रकार के मिष्टान एवं कहीं कहीं तांत्रिक विधि से पूजा होने पर मदिरा भी देवी को अर्पित कि जाती है। सप्तमी की रात्रि सिद्धियों की रात भी कही जाती है। कुण्डलिनी जागरण हेतु जो साधक साधना में लगे होते हैं आज सहस्त्रसार चक्र का भेदन करते हैं।

पूजा विधान में शास्त्रों में जैसा वर्णित हैं उसके अनुसार पहले कलश की पूजा करनी चाहिए फिर नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। देवी की पूजा से पहले उनका ध्यान करना चाहिए।

देवी कालरात्रि शप्तशती मंत्र
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१ या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

२ एक वेधी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

३ देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्तया, निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां, भक्त नता: स्म विदाधातु शुभानि सा न:..

माँ कालरात्रि का ध्यान मंत्र
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करालवंदना धोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम॥
दिव्यं लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयं वरदां चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम॥
महामेघ प्रभां श्यामां तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवं सचियन्तयेत् कालरात्रिं सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥

माँ कालरात्रि स्तोत्र पाठ
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हीं कालरात्रि श्री कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं हीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

माँ कालरात्रि कवच पाठ
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ऊँ क्लीं मे हृदयं पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततं पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥
रसनां पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशंकरभामिनी॥
वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

भगवती कालरात्रि का ध्यान, कवच, स्तोत्र का जाप करने से ‘भानुचक्र’ जागृत होता है। इनकी कृपा से अग्नि भय, आकाश भय, भूत पिशाच स्मरण मात्र से ही भाग जाते हैं। कालरात्रि माता भक्तों को अभय प्रदान करती है।
माँ कालरात्रि पार्वती काल अर्थात् हर तरह के संकट का नाश करने वाली है इसीलिए कालरात्रि कहलाती है। देवी की पूजा के बाद शिव और ब्रह्मा जी की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए।

माँ कालरात्रि की आरती
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कालरात्रि जय-जय-महाकाली।
काल के मुह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतार॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खडग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें।
महाकाली माँ जिसे बचाबे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि माँ तेरी जय॥

माँ दुर्गा की आरती
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जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…
कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥

ॐ जय माता दी 🚩

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