REET 2015

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12/12/2015

पटवारी के 1 पद के लिए 186 में होगा मुकाबला, 8.18 लाख आवेदन आए -

जयपुर। राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली पटवार भर्ती परीक्षा में एक पद के लिए 186 अभ्यर्थियों में मुकाबला होगा। यह परीक्षा अधीनस्थ बोर्ड की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। इस परीक्षा के लिए बोर्ड के पास करीब 8 लाख 18 हजार आवेदन आए हैं। 4400 पदों के लिए आयोजित हो रही इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि गुरुवार को थी।

बोर्ड की ओर से पटवार भर्ती परीक्षा (प्रारंभिक एवं मुख्य) दो चरणों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा फरवरी माह में प्रस्तावित है। बोर्ड अभ्यर्थियों को पहले ही सलाह दे चुका है कि वे ऐसे बहकावे व धोखे में नहीं आवें जिससे किसी व्यक्ति व संस्था द्वारा प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाने या परीक्षा में उत्तीर्ण व चयन कराए जाने की गारंटी दी जाती हो।
बोर्ड ने कहा था कि परीक्षाओं में चयन कराए जाने की जिम्मेदारी लेने वाले आपराधिक व्यक्तियों को चेतावनी दी जाती है कि किसी भी व्यक्ति के गैर कानूनी कार्यों में संलिप्त पाए जाने अथवा सहयोग किए जाने पर उनके विरुद्घ कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

08/12/2015
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21/11/2015

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23/10/2015

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14/10/2015

समास शोर्ट ट्रिक्स
और शब्द का लोप होय द्वन्द बने समास
संख्यावाची प्रथम पद आता दिवगु के साथ
अव्ययीभाव में प्रथम पद होता क्रिया विशेषण
कह " विक्रम कविराय" बहुब्रिही में होय अर्थ का अन्य
विक्रम रावत

R**T 2015
03/10/2015

R**T 2015

27/09/2015

➨ TRICK Q.→ राज. के उच्च दशकीय वृध्दि दर वाले 6जिले

दुनिया TRICK की ➨ “बाजे जो जबांजा” ➨

►-बा – बाड़मेर 32.55%
►-जे – जैसलमेर 32.22%
►-जो – जोधपुर 27.69%
►-ज – जयपुर 26.91%
►-बां – बांसवाडा 26.58%
►-जा – जालोर 26.31%

27/09/2015

➨ TRICK Q.→ पाक से सटा भारत के राज्य कौन-कौनसे हैँ

दुनिया TRICK की ➨ “पंगुराज” ➨

पं – पंजाब
गु – गुजरात
रा – राजस्थान
ज – जम्मुकश्मीर

27/09/2015

Trick:- राजस्थान के 7 किलों के नाम
राजस्थान के 7 किलों के नाम यूनेस्को (UNESCO) ने विश्व विरासत में शामिल किये।

Trick-”चीकू जंगा घर आजै”

1.चित्तौड़गढ़ किला
2.कुंभलगढ़ किला
3.जंतर-मंतर
4.गागरोन किला
5.घना पक्षी विहार भरतपुर (उद्यान)
6.रणथंभौर किला
7.आमेर किला
8.जैसलमेर किला

27/09/2015

भूमि अधिग्रहण विधेयक

भारत में 2013 क़ानून के पास होने तक भूमि अधिग्रहण का काम मुख्यत: 1894 में बने क़ानून के दायरे में होता था. लेकिन मनमोहन सरकार ने मोटे तौर पर उसके तीन प्रावधानों में बदलाव कर दिए थे. ये भूमि अधिग्रहण की सूरत में समाज पर इसके असर, लोगों की सहमति और मुआवज़े से संबंधित थे. पिछले साल दिसंबर में मोदी सरकार ने एक अध्यादेश लाया. यूपीए के भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ बदलाव करते हुए. लेकिन विपक्ष को ये बदलाव खटक रहे हैं. आइए, जानते हैं इस बिल से जुड़ी बारीकियों के बारे में-

1. समाज पर असर वाले प्रावधान को ख़त्म किया गया है
सोशल इंपैक्ट असेसमेंट की मदद से ये बात सामने आ सकती थी कि भूमि लिए जाने से वहां के समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा. क्योंकि भूमि अधिग्रहण का असर सिर्फ बड़े किसानों या जमीन मालिकों पर ही नहीं होता, छोटे किसान और मजदूर भी वहां होते हैं, जो वर्षों से उस जमीन पर काम कर रहे होते हैं. यदि जमीन ले गई तो वे क्या करेंगे, कहां रहेंगे.

2. लोगों की रज़ामंदी हासिल करने से छुटकारा
2013 के क़ानून में एक प्रावधान रखा गया था लोगों से सहमति लेने का. सरकार और निजी कंपनियों के साझा प्रोजेक्ट में प्रभावित जमीन मालिकों में से 80 फीसदी की सहमति जरूरी थी. सरकारी परियोजनाओं के लिए ये 70 प्रतिशत था. नए क़ानून में इसे ख़त्म कर दिया गया है. रक्षा, ग्रामीण बिजली, ग़रीबों के लिए घर और औद्योगिक कॉरीडोर जैसी परियोजनाओं में 80 फीसदी लोगों के सहमिति की आवश्यकता नहीं होगी.

3. नहीं बढ़ा मुआवज़ा
संशोधन में भी मुआवज़े की दर को पहले जैसा ही रखा गया है. जमीन की कीमत के बाजार मूल्य का ग्रामीण इलाकों में चार गुना और शहरों में दोगुना. फर्क सिर्फ इस बात का है कि सामाज पर पड़ने वाले असर के प्रावधान को खत्म करके सरकार ने मुआवजे की सीमा सिर्फ उन्हीं लोगों तक सीमित कर दी है, जिनके नाम जमीन है. जबकि पुराने कानून में ऐसे सभी लोगों को मुआवजा देने का प्रावधान था, जो उस जमीन पर निर्भर हैं.

4. जमीन बंजर हो या उपजाऊ फर्क नहीं पड़ेगा
सरकार ने जिन पांच सेक्टरों को प्राथमिकता की सूची में डाला है, उनके लिए जमीन अधिग्रहण करते वक्त यह नहीं देखा जाएगा कि वह जमीन बंजर है या उपजाऊ. जैसा कि सिंगूर के मामले था. अब बिना कोई पूछताछ के उसे सरकार ले लेगी.

5. 13 और कानूनों को भूमि अधिग्रहण में शामिल कर लिया
इस कदम को किसानों के पक्ष में माना जा रहा है. देश में 13 कानून और हैं, जिनके तहत जमीन तो अधिग्रहित की जाती है. लेकिन मुआवजे और पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी. अब भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ऐसे सभी मामलों में मुआवजा दिया जाएगा और पुनर्वास कराया जाएगा. जिन मामलों में इसका फायदा मिलेगा, वे हैं नेशनल हाईवे एक्ट, एटॉमिक एनर्जी एक्ट, पेट्रोलियम एंड मिनरल पाइप लाइंस एक्ट, इलेक्‍ट्रिसिटी एक्ट आदि.

भूमि अधिग्रहण विधेयक (बिल) क्या है?

भूमि अधिग्रहण विधेयक ज़मीन के अधिग्रहण और पुनर्वास के मामलों को एक ही क़ानून के तहत लाए जाने की योजना है। वर्ष 2013 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने संसद में भूमि अधिग्रहण बिल पास किया था। जिसमें किसानों के हित के लिए कई निर्णय लिए गये थे। फिलहाल भारत में जमीन अधिग्रहण 1894 में बने कानून के तहत होता है।

29 अगस्त, 2013 को लोकसभा से पारित होने के बाद इस विधेयक को 4 सितंबर, 2013 को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई। राज्यसभा में बिल के पक्ष में 131 और विरोध में 10 वोट पड़े वहीं लोकसभा में 216 पक्ष में और 19 मत विरोध में पड़े थे।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक 119 साल से चल रहे ब्रिटिश हुकुमत वाले भूमि अधिग्रहण बिल की जगह ले लेगा। एक सदी से चल रहे भूमि अधिग्रहण बिल की कई खामियां को इसमें सुधारा गया है।

आइये अब जा‍नते हैं, यूपीए सरकार और मोदी सरकार के अध्यादेश में अंतर क्या है?

यूपीए सरकार का भूमि अधिग्रहण अध्यादेश
जबरन अधिग्रहण नहीं – किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण की इजाजत नहीं देता था। इसके लिए गांव के 70 प्रतिशत किसानों की सहमति जरूरी थी।

5 वर्ष तक इस्तेमाल नहीं करने पर भूमि वापसी का प्रावधान – अधिग्रहित भूमि पर अगर 5 वर्ष में विकास नहीं हुआ तो वही भूमि फिर से किसानों को वापस मिलने की भी व्यवस्था की गई थी।

बंजर भूमि का ही अधिग्रहण – बहुफसली सिंचित भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा सकेगा। जमीन के मालिकों और जमीन पर आश्रितों के लिए एक विस्तृत पुनर्वास पैकेज की व्यवस्था की गई थी।

अधिग्रहण के खिलाफ किसान कोर्ट जा सकते थे – 2013 के कानून में यह व्यवस्था की गई थी कि अगर किसी ज़मीन के अधिग्रहण को कागज़ों पर 5 साल हो गए हैं, सरकार के पास जमीन का कब्जा नहीं है और मुआवज़ा नहीं दिया गया, तो मूल मालिक ज़मीन को वापस मांग सकता है।

मोदी सरकार का भूमि अधिग्रहण अध्यादेश

2014 में आयी मोदी सरकार ने एक नया अध्यादेश जारी किया और 2013 के कानून की कई व्यवस्था को बदलते हुए नये संसोधन किये–

सहमति जरूरी नहीं – अब किसानों की सहमति जरूरी नहीं। नए कानून में इसे ख़त्म कर दिया गया है।

भूमि वापसी का कोई प्रावधान नहीं – अगर सरकार ने जमीन लेने की घोषणा कर दी और उस भूमि पर कोई काम शुरू हो या नहीं यह जमीन सरकार की हो जाएगी।

उपजाऊ एवं सिंचित भूमि का भी अधिग्रहण – यूपीए सरकार में यह व्यवस्था थी कि सरकार खेती योग्य जमीन नहीं ले सकती लेकिन नये अध्यादेश के मुताबिक सरकार खेती लायक और उपजाऊ जमीन भी ले सकती है।

अधिग्रहण के खिलाफ किसान कोर्ट नहीं जा सकते हैं – अगर सरकार किसी की जमीन ले लेती है तो वह इसके खिलाफ किसी भी कोर्ट में सुनवाई के लिये नहीं जा सकता।

27/09/2015

Short tricks;- प्रमुख दर्रे
प्रमुख जल अंतराल = Major Water Gap

मामी और, लक्ष्मी, छोटी कार में निकली
8, 9, 10
मालदीव और मिनिकाय
लक्ष्य द्वीप और मिनिकाय
छोटा अंडमान और कार निकोबार

प्रमुख दर्रे
Trick — “सिक्किम से* जल ना मत*”
1. जल—–जैलेप्ला दर्रा
2. ना——-नाथुला दर्रा.
*silent words.

हिमाचल के प्रमुख दर्रे
Trick — “हिमाचल का* रोहतांग बड़ा श रारती* है”
1. रोहतांग——रोहतांग दर्रा
2. बड़ा———-बड़ालाचा दर्रा
3. श————शिप्कीला दर्रा
*silent words.

उत्तराखंड के प्रमुख दर्रे
Trick—” उत्तराखंड में* नीति को*मना लि या*”

1. नीति—-नीति दर्रा
2. मना—–माना दर्रा
3. लि——-लिपुलेख दर्रा
*silent words.

जम्मू-कश्मीर के प्रमुख दर्रे

Trick — “J&K जाकर* जों का पानी*पी बाबु ”

1. जों——जोजीला दर्रा
2. का——काराकोरम दर्रा
3. पी——पीरपंजाल दर्रा
4. बा——बनिहाल दर्रा
5. बु——-बुर्जिल दर्रा
*silent words.

अरुणाचल प्रदेश के दर्रे
Trick — “अरुण ने* बीज* बो दिया”

1. बो——-बोमडिला दर्रा
2. दि——-दिफू दर्रा
3. या——-यांग्याप दर्रा

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