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19/06/2016
छात्रों भगत सिंह को कभी मत पढ़नाWritten by : रवीश कुमारDate : 2016-03-23नोट: वर्ना भगत सिंह को पढ़कर तुम्हारे विचार बदल ...
24/03/2016

छात्रों भगत सिंह को कभी मत पढ़ना

Written by : रवीश कुमार
Date : 2016-03-23
नोट: वर्ना भगत सिंह को पढ़कर तुम्हारे विचार बदल सकते हैं। तुम राजनीति करने लगोगे और सरकारें तुम्हें बाग़ी करार देंगी। पिछले एक महीने से ‘मूर्खता के विद्वानों’ ने कह कहकर पका दिया है कि छात्र पढ़ने जाते हैं या राजनीति करने। सोचिये यही बात छात्रों ने मान ली होती तो हमारी आजादी का क्या होता। बेहतर है कि भगत सिंह पर बनी दोयम दर्जे की फ़िल्में देखो, उनके पोस्टर कमरे में लगाकर तेईस मार्च को एक ट्वीट कर दो। यह लेख मैंने भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण दस्तावेज़ पुस्तक से आपके लिए टाइप किया है। लखनऊ के राहुल फ़ाउंडेशन ने सत्यम के संपादन में छापा है। 1928 में भगत सिंह ने इसे किरती के लिए लिखा था।)

इस बात का बड़ा भारी शोर सुना जा रहा है कि पढ़ने वाले नौजवान राजनीतिक या पोलिटिकल कामों में हिस्सा न लें। पंजाब सरकार की राय बिल्कुल ही न्यारी है। विद्यार्थियों से कालेज में दाख़िल होने से पहले इस आशय की शर्त पर हल्ताक्षर करवाये जाते हैं की वे पोलिटिकल कामों में हिस्सा नहीं लेंगे। आगे हमारा दुर्भाग्य कि लोगों की और से चुना हुआ मनोहर, जो अब शिक्षा मंत्री है, स्कूल कॉलेजों के नाम एक सर्कुलर भेजता है कि कोई पढ़ने पढ़ाने वाला पोलिटिक्स में हिस्सा न ले। कुछ दिन हुए जब लाहौर में स्टुडेंड्स की ओर से विद्यार्थी सप्ताह मनाया जा रहा था। वहाँ भी सर अब्दुल कादर और प्रोफेसर ईश्वरचन्द्र नन्दा ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को पोलिटिक्स में हिस्सा नहीं लेना चाहिए ।

पंजाब को राजनीतिक जीवन में सबसे पिछड़ा हुआ कहा जाता है। इसका क्सा कारण है? क्या पंजाब ने बलिदान कम किये हैं? क्या पंजाब ने मुसीबतें कम झेली हैं? फिर क्या कारण है कि हम इस मैदान में सबसे पीछे हैं? इसका कारण स्पष्ट है कि हमारे शिक्षा विभाग के अधिकारी लोग बिल्कुल ही बुद्धु हैं। आज पंजाब कैंसिल की कार्रवाई पढ़ कर इस बात का अच्छी तरह पता चलता है कि इसका कारण यह है कि हमारी शिक्षा निकम्मी होती है और फ़िज़ूल होती है। विद्यार्थी युवा-जगत अपने देश की बातों में कोई हिस्सा नहीं लेता। उन्हें इस संबंध में कोई भी ज्ञान नहीं होता। जब वे पढ़कर निकलते हैं तब उनमें से कुछ ही आगे पढ़ते हैं लेकिन वे ऐसी कच्ची कच्ची बातें करते हैं कि सुनकर स्वयं ही अफ़सोस कर बैठ जाने के सिवाय कोई चारा नहीं होता। जिन नौजवानों को कल देश की बागडोर हाथ में लेनी है, उन्हें आज ही अक़्ल के अन्धे बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे जो परिणाम निकलेगा वह हमें ख़ुद ही समझ लेना चाहिए। यह हम मानते हैं कि विद्यार्थियों का मुख्य काम पढ़ाई करना है, उन्हें अपना पूरा ध्यान उस ओर लगा देना चाहिए लेकिन क्या देश की परिस्थितियों का ज्ञान और उनके सुधार के उपाय सोचने की योग्यता पैदा करना उस शिक्षा में शामिल नहीं है? यदि नहीं तो हम उस शिक्षा को भी निकम्मी समझते हैं जो सिर्फ क्लर्की करने के लिए हासिल की जाए। ऐसी शिक्षा की ज़रूरत ही क्या है? कुछ ज़्यादा चालाक आदमी यह कहते हैं कि काका तुम पोलिटिक्स के अनुसार पढ़ो और सोचो ज़रूर लेकिन कोई व्यावहारिक हिस्सा न लो। तुम अधिक योग्य होकर देश के लिए फ़ायदेमन्द साबित होगे।

बात बड़ी सुन्दर लगती है। लेकिन हम इसे भी रद्द करते हैं क्योंकि यह भी सिर्फ ऊपरी बात है। इस बात ये यह स्पष्ट हो जाता है कि एक दिन विद्यार्थी एक पुस्तक ‘appeal to the young’ Prince Kropotkin पढ़ रहा था। एक प्रोफेसर साहब कहने लगे यह कौन सी पुस्तक है? और यह तो किसी बंगाली का नाम जान पड़ता है! लड़का बोल पड़ा- प्रिन्स क्रोपोटकिन का नाम बड़ा प्रसिद्ध है। वे अर्थशास्त्र के विद्वान थे। इस नाम से परिचित होना प्रत्येक प्रोफेसर के लिए बड़ा ज़रूरी था। प्रोफेसर की ‘योग्यता’ पर लड़का हंस भी पड़ा और उसने फिर कहा- ये रूसी सज्जन थे। बस ! रूसी ! क़हर टूट पड़ा। प्रोफेसर ने कहा कि तुम बोल्शेविक हो, क्योंकि तुम पोलिटिकल पुस्तकें पढ़ते हो

देखिये आप प्रोफेसर की योग्यता! अब उन बेचारे विद्यार्थियों को उनसे क्या सीखना है? ऐसी स्थिति में वे नौजवान क्या सीख सकते हैं?

दूसरी बात यह है कि व्यावहारिक राजनीति क्या होती है? महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू ओर सुभाषचंद्र बोस का स्वागत करना और भाषण सुनना तो हुई व्यावहारिक राजनीति, पर कमिशन या वायसराय का स्वागत करना क्या हुआ? क्या वह पोलिटिक्स का दूसरा पहलू नहीं है? कहा जायेगा कि इससे सरकार ख़ुश होती है और दूसरी से नाराज़? फिर सवाल तो सरकार की खुशी या नाराज़गी का हुआ। क्या विद्यार्थियों को जन्मते ही ख़ुशामद का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए? हम तो समझते हैं कि जप तक हिन्दुस्तान में विदेशी शासन कर रहे हैं तब तक वफ़ादारी करने वाले वफ़ादार नहीं बल्कि गद्दार हैं, पेट

24/06/2015

dosto b.tech biotechnology k form nikle huye jald apply kare

glimpses of UNIVERSITY STUDENTS WORKSHOP''THE CHALLENGES AGAINST HIGHER EDUCATION IN PRESENT SCENARIO''vishya par huye s...
05/04/2015

glimpses of UNIVERSITY STUDENTS WORKSHOP''THE CHALLENGES AGAINST HIGHER EDUCATION IN PRESENT SCENARIO''vishya par huye seminar me bolte huye mukhya vaktaDr. rajiv kunwar{president ,democratic teachers front ,delhi university}hmare talented comrades k dwara khubsurat rangoli.

Salute to Shaheed Bhagat Singh,Rajguru &Sukhdev on their 84th martyrdom anniversary."If the deaf are to hear, the sound ...
23/03/2015

Salute to Shaheed Bhagat Singh,Rajguru &Sukhdev on their 84th martyrdom anniversary.
"If the deaf are to hear, the sound has to be very loud. When we dropped the bomb, it was not our intention to kill anybody. We have bombed the British Government. The British must quit India andmake her free."
-Bhagat Singh
On 8 April 1929 Martyrs Bhagat Singh & Batukeshwar Dutt threw two bombs into the assembly chamber from its gallery while it was in session as per plan not hurt to any one just as protest.While pronouncing the life imprisonment punishmentto them, Judge Midlton had written in the judgment that " Those people (Dutt & Singh) come to court raising slogans " INQLAB ZINDABAD ( Long live revolution),SARVHARA ZINDABAD ( Long live porlitanet)" which made it clear that what type of political philosophy ( thoughts) they profess . To scuttle the propaganda of these thoughts I Sentence them to life imprisonment.
Inquilab Jindabad.

Sfi Kurukshetra ne VC office k bahar Bhagat Singh,Sukhdev aur Rajguru ka Shaheedi Divas manaya.If the deaf are to hear, ...
21/03/2015

Sfi Kurukshetra ne VC office k bahar Bhagat Singh,Sukhdev aur Rajguru ka Shaheedi Divas manaya.
If the deaf are to hear, the sound has to be very loud. When we dropped the bomb, it was not our intention to kill anybody. We have bombed the British Government. The British must quit India and make her free.यदि बहरों को सुनना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा. जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं थ. हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था . अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आज़ाद करना चहिये.VC OFFICE PAR SHAHIDI DIWAS MNATE HUYE,PRASHASAN K DWARA OUTERSOURCING KARMCHARIYO KA SAMRTHAN KRNE K KAARAN RK SADAN NHI DIYAkya kisi ki samsaayo par unka samarthan krna bhagat singh singh ne nhi kaha tha kya?
Inquilab Jindabad.

SFi kurukshetra ne Himachal Sarkar dwara Students par lathicharge karne aur RUSA,CBCS ec. chatrvirodhi rule lagu kiye ja...
20/03/2015

SFi kurukshetra ne Himachal Sarkar dwara Students par lathicharge karne aur RUSA,CBCS ec. chatrvirodhi rule lagu kiye jane ke virodh mein himachal sarkar ka putla fuka.

Kal 20-03-2015 ko sfi k*k sahid bhagat singh sahidi diwas v.c office par manayegi.Sab sathi 11:00 Am  pahunch kar is kar...
19/03/2015

Kal 20-03-2015 ko sfi k*k sahid bhagat singh sahidi diwas v.c office par manayegi.
Sab sathi 11:00 Am pahunch kar is karyakarm ko safal bnaye.
Inquilaab Jindabad.
Sfi k*k🚩

Tribute to Kalpna Chawla on her birth anneversary. 'भारत की बेटी' कल्पना चावला जिसने दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया,...
18/03/2015

Tribute to Kalpna Chawla on her birth anneversary.
'भारत की बेटी' कल्पना चावला जिसने दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया, को उनके जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि.

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