Kurukshetra University Central Library

Kurukshetra University Central Library Kurukshetra University Central Library The Kurukshetra University Library is centrally located and is an air conditioned three storey building having 49,230 sq.

feet plinth area and its extension as Golden Jubilee Reading Hall having plinth area of 57,500 sq. feet is also under progress. It has seating capacity of 470 users at a time and remains open on 360 days from 9.00 a.m. to 12.00 midnight. The University Library has a rich collection of 339817 volumes in the stream of Sciences, Management, Social Science, Commerce and Humanities too. The Library ERN

ET Centre with 150 computers for the faculty members, students and Research Scholars has an internet connectivity of 10 mbps leased line. Library has also provided internet connectivity to almost all the teaching and non-teaching Departments, Hostels and the entire Campus through WI FI internet connection. In addition to this, under U.G.C.-INFONET E-Journals consortium library provides an access to 8453 scholarly journals.

मखा कोईसा रह ना जाइयो इबकै!
10/05/2026

मखा कोईसा रह ना जाइयो इबकै!

Big shout out to my newest top fans! Battan Ravinder Dayalpur, Jp Banwala, Mohit Tobria, M.L. Jaidka
09/05/2026

Big shout out to my newest top fans! Battan Ravinder Dayalpur, Jp Banwala, Mohit Tobria, M.L. Jaidka

आज एक पेज के पाठक का सन्देश प्राप्त हुआ।  अभी दिल्ली के आस पास रहते हैं और काफी दुविधा में प्रतीत होते हैं।  आप ज्ञानी ज...
06/05/2026

आज एक पेज के पाठक का सन्देश प्राप्त हुआ। अभी दिल्ली के आस पास रहते हैं और काफी दुविधा में प्रतीत होते हैं। आप ज्ञानी जनों से अपेक्षा है कि यथा ज्ञान उनका मार्गदर्शन करें।
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मैं सोनीपत से सबंध रखता हूँ और मैंने 2017 में कुरुक्षेत्र विश्विद्यालय से टूरिज़्म में PG डिप्लोमा किया था। कोर्स मैंने अपने एक रिलेटिव के कहने पर किया था जिनके अनुसार आने वाले समय में इस चीज़ कि काफी डिमांड रहेगी। पर करीब 8 -9 साल से इस फील्ड में काम करके लगा कि शायद गलती करदी । अभी 5 साल से नॉएडा की एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम कर रहा हूँ जहाँ अभी 25000 सैलरी मिल रही है। सैलरी बस इतनी ही है कि अपना खर्चा चल रहा है, न कुछ बचता और न ही घर वालों की कोई मदद हो सकती है। इसी कारण से अभी शादी भी नहीं कर पा रहा हूँ क्यूंकि हमारे यहाँ रिश्ते के वक़्त सबसे पहले सैलरी ही पूछते हैं। हालांकि ठीक ठाक मिडिल क्लास फॅमिली से हूँ पर फिर भी खुद का स्टैंड तो देखा ही जाता है। अभी समझ में नहीं आ रहा की इस फील्ड में आके कुछ गलत फैसला तो नहीं ले लिया क्यूंकि डिमांड ज्यादा लगती नहीं है। हमारी कंपनी का खुद का काम भी ठीक ठाक ही चल रहा है। इसलिए अगर कोई इस फील्ड से हो तो गाइड करें किलय किया जाये। इसी फील्ड में रहा जाये कोई और कोर्स वगैरा करके या फिर कोई दूसरा काम शुरू किया जाये। कैपिटल ठीक ठाक ही लगा सकता हूँ पर बाकी किसी काम का ज्यादा अनुभव नहीं है।

05/05/2026

सारे भाइयाँ नै तड़के आली राम राम पहुंचे !

02/05/2026

पुरानी यादों का एक खूबसूरत पन्ना… 🎓
यूनिवर्सिटी कॉलेज इलेक्शन 1994–95 की वो यादगार झलक, जब जोश, दोस्ती और एकजुटता अपने चरम पर थी। उस दौर की हर बात आज भी दिल को छू जाती है — चाहे वो चुनावी माहौल हो, साथ बिताए पल हों या जीत की खुशियां!
उस समय के चमकते सितारे :
✨ जसबीर चट्ठा – प्रेसिडेंट
✨ अनुज भारद्वाज – वाइस प्रेसिडेंट
कृष्ण कुमार गुप्ता, कुलदीप चोपड़ा, जसबीर चट्ठा, वीरेंद्र सिंह, राकेश धींगरा, रणबीर जागलान, सुरेंद्र सरां, अनुज भारद्वाज और दलबीर सिंह;
ये सिर्फ नाम नहीं, बल्कि वो यादें हैं जो आज भी दिलों में बसी हुई हैं। वक्त बीत गया, लेकिन वो दोस्ती, वो जज़्बा और वो पल हमेशा हमारे साथ रहेंगे।
करो तो टैग कहाँ हैं भाई लोग आजकल !

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मैं 1962 से 1965 तक, तक़रीबन  तीन साल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में रहा। अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद मैंने यहाँ नौकरी...
30/04/2026

मैं 1962 से 1965 तक, तक़रीबन तीन साल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में रहा। अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद मैंने यहाँ नौकरी ज्वाइन की थी । विश्वविद्यालय नया था, और पुरुष शिक्षक लड़कों के छात्रावास में रहते थे। छात्रावास में पाँच ब्लॉक थे, प्रत्येक में भूतल, प्रथम और द्वितीय मंजिल पर 20 कमरे थे। प्रत्येक ब्लॉक में दो बड़े कमरे थे, जिनमें प्रत्येक मंजिल पर शौचालय थे। ये कमरे शिक्षकों के लिए थे। दो लड़कों के छात्रावास थे, जिनका नाम प्रताप भवन और नरहरि भवन था, जो उस समय के नेताओं के नाम पर रखे गए थे। मुझे प्रताप भवन की दूसरी मंजिल पर कमरा मिला। उस समय मेस में नाश्ता, दोपहर का भोजन, रात का खाना और शाम को चाय मिलती थी। उस समय भोजन का शुल्क 35 रुपये था। खाना बहुत स्वादिष्ट नहीं था, लेकिन ठीक-ठाक था। शहर ज्यादा विकसित नहीं था। रेलवे स्टेशन से हॉस्टल तक साइकिल रिक्शा से जाने का किराया चार "आने" लगते थे । खाना सिर्फ शाकाहारी ही मिलता था। कुछ समय बाद मेरा केंद्र सरकार की नौकरी में सिलेक्शन हो गया था तो मैंने विश्विद्यालय की नौकरी छोड़ दी थी। लेकिन कुरुक्षेत्र में बिताये वो तीन साल आज भी जेहन में सुकून भरी यादों को संजोये हुए हैं। अभी भी मेरी कोशिश रहती है कि साल दो साल में सपरिवार या अकेले, एक बार कुरुक्षेत्र भ्रमण पे जरूर आऊं।

~ ******* सिंह मौर्या (फिजिक्स विभाग, 1962 -65 )

21/04/2026

कुरुक्षेत्र में मौजूद नरकातारी एक अत्यंत धार्मिक पौराणिक स्थल है, जो विशेष रूप से महाभारत के पात्र भीष्म पितामह की शरशय्या (बाणों की शय्या) के लिए प्रसिद्ध है। यही वह जगह है जहाँ अर्जुन ने अपनी प्यास बुझाने के लिए तीर चलाकर सरस्वती नदी का जल निकाला था, जिसे 'बाणगंगा' या भीष्म कुण्ड कहा जाता है।

यह कुरुक्षेत्र के थानेसर से ज्योतिसर के मार्ग पर स्थित है, जहाँ भीष्म पितामह ने कौरवों की ओर से 10 दिनों तक युद्ध करने के बाद घायल होकर बाणों की शय्या पर लेटकर सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की थी। यहाँ के भीष्म कुण्ड के बारे में मान्यता है कि जब अर्जुन ने बाण से भूमि में से जल निकाला, तो वह भीष्म पितामह के लिए गंगाजल के समान माना गया।

इसे पुराणों में अनरक तीर्थ के रूप में जाना जाता है। कुछ धारणा के अनुसार, यहाँ कर्ण द्वारा अपने सोने के दांत धोकर श्री कृष्ण को अर्पित करने की कथा भी प्रसिद्ध है, जिसे बाणगंगा नरकातारी कहा जाता है।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का कम्युनिटी सेंटर एक प्रमुख स्थान है जहाँ छात्र और शिक्षकों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय भी मेल-...
20/04/2026

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का कम्युनिटी सेंटर एक प्रमुख स्थान है जहाँ छात्र और शिक्षकों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय भी मेल-जोल और सामाजिक गतिविधियों का आनंद लेते हैं। यहाँ विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं जो समाज में एकता और विकास को बढ़ावा देते हैं। यह सेंटर विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभाओं को निखारने का मंच प्रदान करता है। यहाँ पर सेमिनार, वर्कशॉप और खेलकूद की गतिविधियों का आयोजन होता है, जो युवा ऊर्जा को सही दिशा में स्थानांतरित करने में मदद करता है। कम्युनिटी सेंटर की सुंदर और सुव्यवस्थित व्यवस्था इसे एक आकर्षक स्थान बनाती है। यहाँ का माहौल मित्रता और सहयोग का प्रतीक है, जो सभी के लिए प्रेरणादायक है। यह स्थान छात्रों के अभिवृत्ति विकास और सामाजिक जिम्मेदारी का भी केंद्र है। यहाँ के आयोजन सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। कुल मिलाकर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का कम्युनिटी सेंटर एक समृद्ध और जीवंत स्थान है जो शिक्षा और समाज दोनों के बीच सेतु का कार्य करता है।

17/04/2026

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को अपना वर्तमान स्वरूप 1974 में मिलना शुरू हुआ था। उस समय हरियाणा के राज्यपाल श्री बी.एन. चक्रवर्ती थे। वे ब्रिटिश शासन के दौरान सिविल सर्विस अधिकारी थे और भारत की स्वतंत्रता के बाद राजनीतिज्ञ बने। वे 1967 में हरियाणा के राज्यपाल बने। 1975 में भारत में आपातकाल घोषित किया गया, जिससे सरकार में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हुईं। इसी दौरान, राज्यपाल पद पर रहते हुए 26 मार्च, 1976 को श्री चक्रवर्ती का निधन हो गया। उस समय हरियाणा के एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और पूर्व नेता श्री बंसी लाल देश के रक्षा मंत्री थे। श्री बंसी लाल श्री चक्रवर्ती के बहुत करीबी थे। इसी मित्रता के कारण, श्री चक्रवर्ती के निधन के बाद, श्री बंसी लाल के अनुरोध पर हरियाणा सरकार ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बी.एन. चक्रवर्ती विश्वास विश्वविद्यालय रखने का निर्णय लिया। कई लोगों ने इस निर्णय का विरोध किया और काफी असहमति व्यक्त की गई।

15/04/2026

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