08/04/2026
सफर-ए-कामयाबी: दो दोस्त, एक दास्तां
यह तस्वीर महज़ दो चेहरों की नहीं, बल्कि संघर्षों की तपिश में कुंदन बनी एक बेमिसाल दोस्ती की कहानी है—दीन मुहम्मद चौहान Deen Muhammad Chauhan और उस्मान अली Usman Ali की।
बचपन और शिक्षा के पड़ाव:
हर्रा गाँव की गलियों से शुरू हुई यह दोस्ती प्राथमिक विद्यालय की एक ही बेंच पर परवान चढ़ी। सन 1990 में दोनों ने एक साथ प्राथमिक विद्यालय से कक्षा 5 की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद शिक्षा का कारवां आगे बढ़ा और दोनों ने आदर्श इण्टर कॉलेज, हर्रा मेरठ (जिसे आज हम चौधरी बशीर खां इण्टर कॉलेज के नाम से जानते हैं) में दाखिला लिया। यहाँ से सन 1995 में हाई स्कूल की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने के बाद, उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए जनता इण्टर कॉलेज, सरूरपुर मेरठ का रुख किया। 12वीं के बाद बी.एससी. की पढ़ाई भी उन्होंने सरूरपुर डिग्री कॉलेज से ही पूरी की।
सपनों की बुनियाद: गुडविन पब्लिक स्कूल
पढ़ाई पूरी करने के बाद, समाज को शिक्षित करने के एक साझा जुनून के साथ इन दोनों दोस्तों ने सन 2000 में 'गुडविन पब्लिक स्कूल' की नींव रखी। यह वह समय था जब दोनों ने दिन-रात एक कर इस संस्थान को अपने खून-पसीने से सींचा।
करियर का नया मोड़:
पाँच वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद, सन 2005 में उस्मान अली ने अपने करियर को एक नई दिशा देने का निर्णय लिया और दिल्ली की एक कंपनी में अपनी सेवाएं शुरू कीं। कार्यक्षेत्र भले ही बदल गए, लेकिन उनके दिलों का जुड़ाव और एक-दूसरे के प्रति सम्मान कभी कम नहीं हुआ।
आज की गौरवमयी उपलब्धि:
तीन दशकों से अधिक का यह साथ आज सफलता के शिखर पर है। दीन मुहम्मद चौहान आज गुडविन इण्टर कॉलेज, मुल्तान नगर हर्रा (मेरठ) के सह-संस्थापक एवं अध्यक्ष के रूप में हज़ारों बच्चों का भविष्य उज्ज्वल कर रहे हैं। वहीं, उस्मान अली दिल्ली के कॉर्पोरेट जगत में एक कुशल मैनेजर के पद पर अपनी योग्यता साबित कर रहे हैं।
निष्कर्ष:
1995 की वो छोटी सी शुरुआत आज 2026 में एक विशाल वटवृक्ष बन चुकी है। यह कहानी सिखाती है कि यदि इरादे नेक हों और साथ सच्चा, तो गाँव की पगडंडियों से निकलकर इंसान आसमान की ऊंचाइयों को छू सकता है।