20/08/2021
टीएमयू में एक और पेटेन्ट ऑस्ट्रेलिया से ग्रान्ट
(पाॅलीटेक्निक प्राचार्य डाॅ. अमित शर्मा के नेतृत्त्व में पांच सदस्यीय टीम ने रचा इतिहास)
तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रोनिक्स विभाग के एक प्रोफेसर व एक भौतिकी विभाग के प्रोफेसर ने आटोमोबाइल के लिए IOT आधारित एक नायाब स्मार्ट रोडेंट रिपेलिंग सिस्टम बनाकर विश्व को एक नया तोहफा दिया, जिसे ऑस्ट्रेलिया से पेटेन्ट कराया गया। यह आविष्कार एक स्वचालित IOTआधारित इलेक्ट्रोनिक कृन्तक विकर्षक प्रणाली है जिसमें शामिल है माइक्रोप्रोसेसर / माइक्रोकंट्रोलर आधारित एम्बेडेड कंट्रोल यूनिट। इसका उद्देश्य आॅटोमोबाइल में चूहों, फील्ड माउस, मोल जैसे कृन्तकों को दूर भगाना / डराना, जो एक आॅटोमोबाइल के तारों और अन्य कमजोर भागों को नुकसान करता है।
इस सिस्टम को आसानी से बोनट के नीचे लगाया जा सकता है। आविष्कृत प्रणाली में चार अलग-अलग उपइकाइयाँ होती हैं जो कृन्तकों को प्रतिकर्षित करती हैं। आविष्कृत प्रणाली गति संवेदक है जिसमें कृन्तकों की आवाजाही का पता लगाने के लिए इन्फ्रारेड / गर्मी / मोशन सेंसर और थर्मल सेंसर का उपयोग किया गया है। मोशन सेंसर और इंफ्रारेड सेंसर तुलनित्रों के सेट से जुड़े होते हैं। जब तुलनित्र में मान एक प्रीसेट थ्रेशोल्ड मान से अधिक होता है, तुलनित्र प्रसंस्करण के लिए इलेक्ट्रोनिक नियंत्रण इकाई को संकेत भेजता है। इलेक्ट्राॅनिक नियंत्रण इकाई माइक्रोप्रोसेसर/माइक्रोकंट्रोलर एम्बेडेड प्रोग्राम के साथ प्रणाली का संचालन करता है। इलेक्ट्रोनिक नियंत्रण इकाई का प्व्ज् गेटवे के माध्यम से आॅटोमोबाइल के मालिक के स्मार्टफोन से जुड़ा है, जो अलर्ट सिग्नल को संचारित करता है।
आविष्कृत प्रणाली में कृन्तकों को प्रतिकर्षित करने के लिए चार उपइकाइयाँ हैं। पहला सबयूनिट एम्पलीफायर के साथ आॅडियो मैनिपुलेटर है जो उत्पादन करता हैं। दूसरा बसयूनिट कृन्तकों की आंखों पर असुविधा पैदा करने के लिए बहुत अधिक उज्जवल प्रकाश किरण उत्पन्न करता है। तीसरा सबयूनिट इलेक्ट्राॅनिक रूप से संचालित कृन्तक विकर्षक स्पे्र है। चैथा सबयूनिट अल्ट्रासोनिक ध्वनि उत्पन्न करता है जो तीव्र अल्ट्रासोनिक ध्वनि कृन्तकों के लिए असहनीय है। आविष्कृत प्रणाली आॅटोमोबाइल की बैटरी से जुड़ा होता है।
विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पेटेन्ट अहम् भूमिका निभा रहा है। यह सभी हिन्दुस्तान पेटेन्ट एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है, और प्रकाशित हो चुके हैं। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, कुलपति प्रोफेसर रघुवीर सिंह और वीओजी के सदस्य श्री अक्षत जैन ने इसे बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा है कि यह पेटेन्ट विश्वविद्यालय के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि साबित होगा। इस पेटेन्ट पर काम कर चुके प्रोफेसर अमित शर्मा जी ने बताया कि यह पेटेन्ट विश्व के इतिहास में अत्यन्त उपयोगी पेटेन्ट है। प्रोफेसर अमित शर्मा जी ने अपनी टीम के सभी सदस्यों का धन्यवाद किया। कोरोना महामारी के चलते भारत में पेटेन्ट विभाग की बन्दी के मद्देनजर आॅस्टेªलिया से कराने का फैसला लिया। इतिहास रचने वाली इस टीम में पाॅलीटेक्निक के प्राचार्य प्रोफेसर अमित शर्मा, भौतिक विभाग के प्रोफेसर अनुज अग्रवाल, अन्य क्षितिज सिंघल, अमित सक्सैना, प्रफुल्ल गुप्ता सदस्य थे।
डाॅ0 अमित शर्मा
प्राचार्य यूनिवर्सिटी पाॅॅलीटेक्निक