BRABU University Department of History

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कल दिनांक 25 जुलाई 2025 को बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में पीजी फोर्थ सेमेस्टर के छात्रों द्वारा पीजी फर्स्ट सेम...
26/07/2025

कल दिनांक 25 जुलाई 2025 को बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में पीजी फोर्थ सेमेस्टर के छात्रों द्वारा पीजी फर्स्ट सेमेस्टर के छात्रों के सम्मान में एक भव्य फ्रेशर पार्टी का आयोजन किया गया। जिसमें फोर्थ सेमेस्टर के छात्रों ने उत्साह और गर्मजोशी से नए साथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्षा और विभाग के सभी शिक्षकों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन से हुई। जिसके बाद छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत कर शिक्षकों का अभिनंदन किया गया। इसके उपरांत सभी शिक्षकों को शॉल और मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया।

वहीं स्वागत भाषण में शोधार्थी हिमांशु ने छात्रों को विभाग की शैक्षणिक परंपराओं, उपलब्धियों और अध्ययन की संभावनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की, जिससे पीजी के नए छात्रों को इतिहास विभाग के शैक्षणिक वातावरण को समझने में मदद मिली।

इसके बाद फ्रेशर पार्टी में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिनमें गायन, नृत्य, कविता पाठ और हास्य प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। सीनियर और जूनियर दोनों छात्रों ने इन प्रस्तुतियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। फ्रेशर पार्टी में स्नेहा कुमारी को 'मिस फ्रेशर' और चंदन कुमार को 'मिस्टर फ्रेशर' के खिताब से नवाजा गया।

इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेणु कुमारी ने सभी नए छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें विभागीय गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।

इस आयोजन में विभाग के समस्त शिक्षकगण, पीएचडी शोधार्थी मणिरंजन, अनामिका, विद्या, प्रिंस, शुभम तथा आयोजन समिति के रिया, इरशाद, राहुल, सुशील, सौरभ, अवधेश, सुमन, रिशा, पुष्पांजलि और रौनक सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

आज दिनांक 02 जुलाई 2025 को बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में पीएचडी कोर्सवर्क 2022 के शोधार्थियों के बीच "नारी सशक...
02/07/2025

आज दिनांक 02 जुलाई 2025 को बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में पीएचडी कोर्सवर्क 2022 के शोधार्थियों के बीच "नारी सशक्तिकरण और सामाजिक क्रांति : एक ऐतिहासिक सर्वेक्षण" विषय पर एक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. अपर्णा कुमारी, पूर्व संकायाध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान एवं विभागाध्यक्ष विश्वविद्यालय इतिहास विभाग, बी. आर. अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय ने संबोधित किया।

अपने संबोधन में प्रो. अपर्णा कुमारी ने कहा कि भारतीय इतिहास में नारी की स्थिति समय के साथ बदलती रही है। ऋग्वैदिक काल में महिलाएं न केवल शिक्षित थीं, बल्कि वे वेदपाठ, नीति, दर्शन, खगोलशास्त्र जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभाती थीं। गार्गी, मैत्रेयी, अपाला, घोषा जैसी विदुषी महिलाओं ने उस युग में महिलाओं की सशक्त छवि प्रस्तुत की।

लेकिन मध्यकाल आते-आते विदेशी आक्रांताओं के आगमन और उनके कठोर सामाजिक नियमों के कारण महिलाओं की स्थिति में भारी गिरावट आई। पर्दा प्रथा, बाल विवाह, सती प्रथा और जौहर जैसे अमानवीय रिवाजों ने महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित कर दिया। वहीं महिलाओं को शिक्षा से विमुख कर उन्हें सामाजिक रूप से निर्बल बना दिया गया।

वहीं आधुनिक युग में सामाजिक सुधार आंदोलनों और स्वतंत्रता संग्राम के दौर में नारी सशक्तिकरण ने पुनः गति पकड़ी। प्रो. अपर्णा कुमारी ने जोर देकर कहा कि इस समय शिक्षित महिलाओं का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। सावित्रीबाई फुले, पंडिता रमाबाई, सरोजिनी नायडू, कस्तूरबा गांधी जैसी अनेक महिलाओं ने न केवल समाज में शिक्षा और जागरूकता का प्रसार किया, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन में भी अग्रणी भूमिका निभाई।

निष्कर्ष के तौर पर उन्होंने कहा कि वर्तमान परिपेक्ष्य में महिलाओं को संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुए है और वे राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान, खेल और सांस्कृतिक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। लेकिन आज भी समाज में व्याप्त अंधविश्वास, अशिक्षा, लैंगिक भेदभाव और रूढ़िवादी परंपराएं महिलाओं के प्रगति में बाधा बन रही हैं और दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दे आज भी चिंता का विषय बने हुए हैं।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विभागाध्यक्षा प्रो. रेणु कुमारी ने कहा कि यह व्याख्यानमाला न केवल शोधार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक रही, बल्कि यह नारी विमर्श पर एक नई सोच और दृष्टिकोण को प्रेरित करने वाली साबित हुई।

इस अवसर पर इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. शिवेश कुमार, डॉ. कहकशां, डॉ. अर्चना पाण्डेय, डॉ. सत्य प्रकाश राय, डॉ. गौतम चंद्रा, डॉ. अंशु त्यागी सहित शोधार्थी हिमांशु, अन्नू, मणिरंजन, अनुराग, अनामिका, खुशबू, पूजा, निशांत, चंदन, बाबुल सहित दर्जनों शोधार्थी उपस्थित रहे।

कल दिनांक 15 मई 2025 को बाबा साहेब भीमराव बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग और काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान, पटना क...
16/05/2025

कल दिनांक 15 मई 2025 को बाबा साहेब भीमराव बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग और काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान, पटना के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था “भारतीय स्वाधीनता के लिए संघर्षरत संग्रामियों और नेताओं के योगदान का इतिहास : एक पुनर्विचार।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने स्थानीय इतिहास लेखन की महत्ता पर प्रकाश डाला और राष्ट्र के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने के अनुरूप इतिहास लेखन की आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने कृषि, भौगोलिक विविधताओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी इतिहास लेखन में शामिल करने की जरूरत बताई।

मुख्य वक्ता के रूप में रबींद्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकाता के प्रो. हितेंद्र पटेल ने साहित्यिक स्रोतों के माध्यम से गांव, कस्बों और मोहल्लों की स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी को सामने लाने पर बल दिया।

विशिष्ट वक्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. जे. एन. सिन्हा ने स्वतंत्रता आंदोलन के उपेक्षित क्षेत्रीय नायकों को इतिहास की मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने हुस्सेपुर राज के फतेह बहादुर शाही द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध किए गए संघर्ष का उल्लेख करते हुए उसे ऐतिहासिक दस्तावेजों में दर्ज करने की अपील की।

इस अवसर पर बाबा साहेब भीमराव बिहार विश्वविद्यालय और काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान के बीच अकादमिक सहयोग हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए।

संगोष्ठी में विभागाध्यक्षा प्रो. रेणु कुमारी ने स्वागत भाषण दिया, विषय प्रवेश डॉ. गौतम चंद्रा ने कराया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिवेश कुमार ने प्रस्तुत किया। मंच संचालन डॉ. अंशु त्यागी और डॉ. शिवेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रॉक्टर प्रो. बी. एस. राय, प्रो. प्रभाकर प्रसाद सिंह, प्रो. अजीत कुमार, प्रो. पंकज कुमार राय, डॉ. अर्चना पांडेय, डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. अमर बहादुर शुक्ला, डॉ. अमानुल्लाह, शोधार्थी हिमांशु, अन्नू, मणिरंजन, निशांत, चंदन, विशाल, खुशबू, पूजा, प्रियंका सहित देशभर से आए सैकड़ों शोधार्थी, शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

*इतिहास विभाग में शोधार्थियों के लिए व्याख्यानमाला आयोजित*दिनांक 19 अप्रैल 2025 को बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग म...
25/04/2025

*इतिहास विभाग में शोधार्थियों के लिए व्याख्यानमाला आयोजित*

दिनांक 19 अप्रैल 2025 को बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में पीएचडी कोर्सवर्क 2022 के शोधार्थियों के लिए एक *व्याख्यानमाला* का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य वक्ता इतिहास विभाग के सेवानिवृत प्राध्यापक प्रो. अजीत कुमार थे।

व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए प्रो. अजीत कुमार ने शोधार्थियों को ऐतिहासिक अनुसंधान के नए दृष्टिकोणों, पद्धतियों और स्रोतों से परिचित कराया। उन्होंने शोधकार्य के दौरान इतिहास दृष्टि तथा इतिहास बोध की बारीकियों को समझने तथा पूर्वाग्रह एवं दुराग्रह से मुक्त होकर ऐतिहासिक प्रसंगों को तथ्य, तर्क, अनुभव और समय-सापेक्षता के आधार पर विश्लेषित करने पर बल दिया। भारतीय इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण तथा वैचारिक परंपरा की पृष्ठभूमि में देखने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि आरंभिक काल से ही यह देश शिक्षा, संस्कृति, आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना, राजनैतिक परिपक्वता एवं वैश्विक चेतना के स्तर पर सर्वाधिक समृद्ध था। डॉ. कुमार ने आयातित विचारों एवं जबरन थोपे गये निष्कर्षों को राष्ट्रीय संदर्भ में परखने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि युवा इतिहासकारों को चाहिए कि वे दक्षिण अथवा वाम मार्ग की जगह यथार्थ मार्ग का चयन करे तथा देश- समाज के सामने वास्तविक इतिहास रखें।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. रेणु कुमारी ने कहा कि यह व्याख्यान शोधार्थियों के अनुसंधान कार्यों में सहायक सिद्ध होगा एवं विभाग भविष्य में भी ऐसे ही ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।

इस अवसर पर विभाग के शिक्षक प्रो. शिवेश कुमार, डॉ. गौतम चंद्रा, डॉ. सत्य प्रकाश राय, डॉ. अंशु त्यागी, डॉ. अर्चना पांडेय, शोधार्थी हिमांशु, अन्नू, मणिरंजन, अनुराग सहित दर्जनों शोधार्थी उपस्थित रहे।

*पीजी फर्स्ट सेमेस्टर 2024-26 के छात्रों के लिए इतिहास विभाग में इंडक्शन मीटिंग कार्यक्रम आयोजित*कल दिनांक 11 अप्रैल 202...
12/04/2025

*पीजी फर्स्ट सेमेस्टर 2024-26 के छात्रों के लिए इतिहास विभाग में इंडक्शन मीटिंग कार्यक्रम आयोजित*

कल दिनांक 11 अप्रैल 2025 को बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में पीजी प्रथम सेमेस्टर 2024-26 के नवप्रवेशित छात्रों के लिए *इंडक्शन मीटिंग* का आयोजन किया गया।

अध्यक्षीय भाषण में विभागाध्यक्ष प्रो. रेणु कुमारी ने सभी नवागंतुक छात्रों का इतिहास विभाग में स्वागत करते हुए इतिहास विषय के महत्व और इसके बहुआयामी स्वरूप की जानकारी दी और उन्हें आगामी दो वर्षों के लिए अध्ययन के प्रति उत्साहित किया।

परिचयात्मक भाषण में विभाग के प्राध्यापक प्रो. शिवेश कुमार ने सभी छात्रों को विभाग के शिक्षकों से परिचित करते हुए यहां की शैक्षणिक परंपरा, पीजी पाठ्यक्रम की रूपरेखा तथा भविष्य की संभावनाओं से अवगत कराया।

वहीं डॉ. गौतम चंद्रा ने इतिहास विषय के पृष्ठभूमि को सामने रखकर उसके विभिन्न पहलुओं पर छात्रों का मार्गदर्शन किया।

विभाग के अन्य शिक्षक डॉ. सत्य प्रकाश राय, डॉ. अंशु त्यागी, डॉ. अर्चना पांडेय ने भी छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें उच्च शिक्षा की ओर प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा दी और सभी छात्रों को वर्ग में उपस्थित रहने, अनुशासन बनाए रखने, विभाग की गतिविधियों में सम्मिलित होने और विभागीय पुस्तकालय में पढ़ने की बात कही।

कार्यक्रम का समापन छात्रों की जिज्ञासाओं का उत्तर देने के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर शोधार्थी हिमांशु, अन्नू, मणिरंजन, अनुराग के साथ-साथ पीजी में नामांकित अधिकतर छात्र उपस्थित रहे।

कल दिनांक 1 मार्च 2025 को बी. आर. अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रो. विवेकानंद शुक्ल व्याख्यानमाला के...
02/03/2025

कल दिनांक 1 मार्च 2025 को बी. आर. अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रो. विवेकानंद शुक्ल व्याख्यानमाला के अंतर्गत पीएचडी कोर्स वर्क 2022 के शोधार्थियों के लिए एक विशेष शोध व्याख्यान का आयोजन किया गया। *कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य वक्ता प्रो. भोजनंदन प्रसाद सिंह, विशिष्ट अतिथि शिखा शरद और विभागाध्यक्षा प्रो. रेणु कुमारी* ने संयुक्त रूप से पूर्व विभागाध्यक्ष स्वर्गीय प्रो. विवेकानंद शुक्ल के चित्र पर *माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन* से किया।

व्याख्यान को संबोधित करते हुए *मुख्य वक्ता लंगट सिंह महाविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष इतिहासकार प्रो. भोजनंदन प्रसाद सिंह* ने ऐतिहासिक शोध के विभिन्न पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डाला। वक्ता ने शोध के विभिन्न दृष्टिकोण जैसे सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक को ध्यान में रखने और स्रोतों की विश्वनीयता को परखने पर बल दिया। साथ हीं वर्तमान में डिजिटल संसाधनों और अभिलेखागार के उपयोग से क्या बदलाव आएं हैं उसके बारे में भी अपने विचार रखें। इसके अलावा भविष्य में ऐतिहासिक शोध के दृष्टिकोण, विधियां और प्रौद्योगिकीयां उभर सकती है जो शोध को और सटीक तथा प्रभावी बना सकती है, पर भी ध्यान रखने की आवश्यकता को बतलाया।

विषय से इतर उन्होंने शोधार्थियों से कहा कि अगर इतिहास पढ़ना है तो हमें भारतीय ज्ञान परंपरा और पद्धति को समझना होगा वरना इतिहास अधूरा रहेगा। साथ हीं कहा कि कोई भी ज्ञान या विद्या मनुष्य के कल्याण के लिए होनी चाहिए। उन्होंने *दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान। तुलसी दया न छोड़िए, जब लगि घट में प्राण ।। दोहा कहते हुए अपनी बात खत्म की।

*कार्यक्रम संयोजक सह मंच संचालिका* डॉ. अंशु त्यागी ने कहा कि यह व्याख्यान शोधार्थियों को ऐतिहासिक शोध के समक्ष आने वाली चुनौतियों और संभावनाओं को समझने में मदद करेगा और उनके शोध कार्य को नई दिशा देगा।

*कार्यक्रम के अध्यक्षीय भाषण में प्रो. रेणु कुमारी* ने कार्यकम में उपस्थित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए इस प्रकार के व्याख्यानों की निरंतरता पर जोर दिया ताकि शोधार्थियों को उनकी शोध प्रक्रिया में मार्गदर्शन मिलता रहे।

कार्यक्रम का समापन *प्रो. शिवेश कुमार के धन्यवाद ज्ञापन* के साथ हुआ।

इस अवसर पर राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्षा प्रो. नीलम कुमारी, अर्थशास्त्र की विभागाध्यक्षा प्रो. विनीता वर्मा, दर्शनशास्र की विभागाध्यक्षा प्रो. लक्ष्मी कुमारी साह, इतिहास विभाग के अन्य शिक्षक डॉ. अर्चना पांडेय, डॉ. सत्य प्रकाश राय, डॉ. गौतम चंद्रा, शोधार्थी हिमांशु, अन्नू, कुंदन, अनुराग, मणिरंजन सहित अन्य शोधार्थी उपस्थित थे।

दिनांक 22 अक्टूबर 2024 को विश्वविद्यालय इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सत्य प्रकाश राय ने विश्वविद्यालय के नए विधि...
23/10/2024

दिनांक 22 अक्टूबर 2024 को विश्वविद्यालय इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सत्य प्रकाश राय ने विश्वविद्यालय के नए विधि अधिकारी (Law Officer) के रूप में विश्वविद्यालय कुलसचिव प्रो. अपराजिता कृष्णा के समक्ष अपना पदभार ग्रहण किया। पद ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि वे विश्वविद्यालय के विविध मामलों के निपटारे में त्वरित सुधार करने का प्रयास करेंगे ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी आए। साथ हीं उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास और छात्रों के हितों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

वहीं कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने डॉ. सत्य प्रकाश राय की नियुक्ति को विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया और आशा व्यक्त की कि डॉ. राय अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालय की कानूनी सेवाओं को सुदृढ़ करेंगे।

डॉ. सत्य प्रकाश राय को विधि अधिकारी नियुक्त किए जाने पर विश्वविद्यालय कुलानुशासक प्रो. बी. एस. राय, सीनेट सदस्य प्रो. प्रमोद कुमार, प्रो. ओमप्रकाश राय, प्रो. पंकज कुमार राय, प्रो. शैलेश कुमार, प्रो. रेणु कुमारी, डॉ. गौतम चंद्रा, डॉ. अर्चना पाण्डेय, डॉ. अमानुल्लाह, डॉ. दिलीप, हिमांशु, विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामकुमार जी, विधि कार्यालय सहायक अभिषेक जी, शरद जी, प्रशांत जी आदि भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे जिन्होंने डॉ. राय को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

दिनांक 07 अक्टूबर 2024 को बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रो. सीताराम सिंह व्याख्यानमाला के अंतर्गत "रीसेंट ट्...
08/10/2024

दिनांक 07 अक्टूबर 2024 को बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रो. सीताराम सिंह व्याख्यानमाला के अंतर्गत "रीसेंट ट्रेंड्स इन मेडाइवल हिस्टोरिओग्राफ़ी : डिबेट्स एंड डिस्कोर्सेस (मध्यकालीन इतिहासलेखन में नई प्रवृत्तियाँ : तर्क और संवाद)" विषय पर एक व्याख्यान आयोजित किया गया। जिसके मुख्य वक्ता बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रो. ताबीर कलाम ने मध्यकालीन इतिहासलेखन में हो रहे बदलावों और उनके पीछे की सोच पर गहन चर्चा की और अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

उन्होंने क्रमबद्ध तरीके से प्राचीन काल के संस्कृत इतिहासलेखन, मध्यकाल के पर्शियन इतिहासलेखन और आधुनिक काल के अंग्रेजी इतिहासलेखन तक के संबंध को दर्शाया और उसके बाद मध्यकालीन इतिहासलेखन और इतिहासकारों पर गहरी चर्चा करते हुए इसके अन्य आयामों के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि अक़बर के बारे में अबू फज़ल और बदायूनी दोनों हीं तथ्यों को लिख रहें हैं, लेकिन एक पक्ष में लिख रहा है और दूसरा विपक्ष में, यह इतिहासलेखन में तथ्यों की वैधानिकता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कैसे नए शोध और तकनीकों के माध्यम से इतिहास लेखन में विविधता आई है। इसलिए इतिहासलेखन के समय तथ्यों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। इसके साथ हीं उन्होंने छात्र समुदाय को प्रेरित किया कि वे इतिहास की बहुपरकता को समझें तथा राजनीतिक इतिहास से हटकर अन्य महत्वपूर्ण विषयों जैसे औषधि, पर्यावरण, पारंपरिक प्रथाओं, संस्कृति जैसे विषयों पर भी शोध करें। उन्होंने शोधार्थीयों को वर्तमान संदर्भ में इतिहास की पुनर्व्याख्या करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्ष इतिहास विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. रेणु कुमारी ने कहा इस तरह के आयोजनों से शोधार्थीयों को नई सोच और दृष्टिकोण प्राप्त होते हैं, जिससे वे अपने शोध में और भी अधिक गहराई ला सकते हैं। वहीं धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रो. पंकज कुमार राय ने कहा कि इस व्याख्यान ने इतिहास विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों को और मजबूती प्रदान की है।

इस व्याख्यान में विभाग के शिक्षक प्रो. शैलेश कुमार, डॉ. सत्य प्रकाश, डॉ. गौतम चंद्रा, डॉ. अर्चना पाण्डेय और शोधार्थी हिमांशु, अन्नू, कुंदन, मणिरंजन, अनुराग, नरेश, उजाला सहित सैंकड़ों छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

दिनांक 30 सितंबर 2024 को विश्वविद्यालय इतिहास विभाग में प्री. पीएच.डी कोर्सवर्क प्रतिभागियों के बीच प्रमाण-पत्र का वितरण...
01/10/2024

दिनांक 30 सितंबर 2024 को विश्वविद्यालय इतिहास विभाग में प्री. पीएच.डी कोर्सवर्क प्रतिभागियों के बीच प्रमाण-पत्र का वितरण समारोह और एक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष माननीय कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने प्री. पीएच.डी. कोर्स वर्क - 2021 के सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया।उन्होंने सभी शोधार्थीयों को पुस्तकालय जाकर पढ़ने की आदत डालने और मौलिक शोध करने पर जोर दिया। साथ हीं उन्होंने सभी छात्रों को अपने गुरु के प्रति समर्पण की भावना रखने की बात कही एवं सभी प्रतिभागियों को उनके समर्पण और मेहनत के लिए बधाई दी और भविष्य में और अधिक सफलता की कामना की।

इस अवसर पर उपस्थित विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. विनय शंकर राय ने भी सभी शोधार्थीयों का मार्गदर्शन किया और उन्हें पीएचडी से संबंधित सिनॉप्सिस, आर्टिकल एवं थीसिस खुद से लिखने की सलाह दी और कहा की आप सभी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ें और अपने विश्वविद्यालय का नाम रौशन करें।

इसके बाद विभाग में डॉ. एच. आर. घोषाल व्याख्यानमाला के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण व्याख्यान आयोजित किए गए।

जिसमे पहले व्याख्यान का विषय "भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के आयाम" था, जिसके मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेंद्र कुमर ने भारतीय संस्कृति की जड़ों और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता पर विचार किया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद केवल एक विचारधारा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा आंदोलन है जो भारतीय विविधता को एकता में पिरोता है। डॉ. कुमार ने सांस्कृतिक पहचान के संदर्भ में ऐतिहासिक घटनाओं का भी उल्लेख किया। जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कैसे भारतीय संस्कृति ने विभिन्न चुनौतियों का सामना किया है और समय के साथ विकसित हुई है।

व्याख्यान के कुछ प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं

 वैदिक सभ्यता से सांस्कृतिक विकास शुरू हुआ
 समानता के कारण जगी चेतना को हीं राष्ट्रवाद कहते हैं
 भारतीय संस्कृति संस्थागत नहीं है
 भारत की संस्कृति की विशालता के कारण हीं बाह्य आक्रमणकारियों ने भी हमारी संस्कृति को अपनाया
 मध्यकाल में एक समुदाय के आगमन से हमारी प्राचीन संस्कृति खतरे में पड़ गई
 अंग्रेजों के आगमन ने भी भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात किया।
 उपनिवेश के क्रम में भारतीय सांस्कृतिक दोहन हुआ
 भारतीय राष्ट्रवाद के पुरोधा बाल गंगाधर तिलक थे
 संस्कृति हमें आगे बढ़ने की चेतना देती है और हमें इस पर गर्व है।

वहीँ दूसरे व्याख्यान का विषय "आधुनिक बिहार के इतिहास लेखन की समीक्षा: तथ्य की भूल के संदर्भ में" था, जिसमें डॉ. राजू रंजन प्रसाद ने बिहार के इतिहास लेखन में तथ्यों की प्रस्तुति पर प्रकाश डाला। उन्होंने तर्क किया कि कई बार इतिहासकार तथ्यों को अपने पूर्वाग्रहों के अनुसार प्रस्तुत करते हैं, जिससे वास्तविकता को समझने में बाधा उत्पन्न होती है। डॉ. प्रसाद ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि कैसे इतिहास लेखन में सत्यता का अभाव कई सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं को जन्म देता है।

व्याख्यान के कुछ प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं

 बिहार के इतिहास लेखन में तथ्य को अनदेखा किया गया एवं गलत तथ्य भी दिया गया है
 सोशल मीडिया पर भी गलत एवं भ्रामक तथ्यों की भरमार है
 अयोध्या सिंह उपाध्याय के पुस्तक में प्रिंटिंग प्रेस की चर्चा है लेकिन बिहार बंधु प्रेस, बिहार बंधु पत्र आदि की चर्चा नहीं है
 साथ हीं बिहार बंधु पत्र के प्रकाशित होने की तिथि भी गलत है

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विश्वविद्यालय इतिहास विभागाध्यक्षा प्रो. रेणु कुमारी ने कहा कि यह व्याख्यान शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। उन्होंने कुलपति, कुलानुशासक और दोनों वक्ताओं का आभार जताया और आगे भी ऐसे शैक्षणिक गतिविधियों निरंतर जारी रहने की बात दोहराई।

इस अवसर पर इतिहास विभाग के प्रो. पंकज कुमार राय, डॉ. सत्य प्रकाश राय, डॉ. गौतम चंद्रा, डॉ. अर्चना पाण्डेय, डॉ. अमानुल्लाह, शोधार्थी हिमांशु, मणिरंजन, अनुराग, अन्नु, उजाला, रिया, चन्दन सहित सैंकड़ों शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहें।

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