Aacharya Gagan bhardwaj ji

Aacharya Gagan bhardwaj ji astro and pooja karmkand

दुनिया तुम्हे कहेगी तुम काबिल नही हो तुम मुस्कुराकर कहना वक्त बताएगा।     ्री_कालका_माँ  #आदेश_बाबा  ाँ_कामाख्या।  ाँ_ता...
08/07/2023

दुनिया तुम्हे कहेगी तुम काबिल नही हो
तुम मुस्कुराकर कहना वक्त बताएगा।
्री_कालका_माँ #आदेश_बाबा ाँ_कामाख्या। ाँ_तारा

 #तृतीय_नवरात्रि_माँ_चन्द्रघंटा_स्वरूप_प्रातः_काल #आरती_श्रृंगार_दर्शन  ्री_कालका_माँ  #आदेश_भगवन
24/03/2023

#तृतीय_नवरात्रि_माँ_चन्द्रघंटा_स्वरूप_प्रातः_काल
#आरती_श्रृंगार_दर्शन ्री_कालका_माँ
#आदेश_भगवन

1- एक मुखी रुद्राक्ष- इसे पहनने से शोहरत, पैसा, सफलता प्राप्ति और ध्‍यान करने के लिए सबसे अधिक उत्तम होता है। इसके देवता...
09/07/2022

1- एक मुखी रुद्राक्ष- इसे पहनने से शोहरत, पैसा, सफलता प्राप्ति और ध्‍यान करने के लिए सबसे अधिक उत्तम होता है। इसके देवता भगवान शंकर, ग्रह- सूर्य और राशि सिंह है।
मंत्र- ।। ॐ ह्रीं नम: ।।
2- दो मुखी रुद्राक्ष- इसे आत्‍मविश्‍वास और मन की शांति के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता भगवान अर्धनारिश्वर, ग्रह- चंद्रमा एवं राशि कर्क है।
मंत्र- ।। ॐ नम: ।।
3- तीन मुखी रुद्राक्ष- इसे मन की शुद्धि और स्‍वस्‍थ जीवन के लिए पहना जाता है। इसके देवता अग्नि देव, ग्रह- मंगल एवं राशि मेष और वृश्चिक है।
मंत्र- ।। ॐ क्‍लीं नम:
4- चार मुखी रुद्राक्ष- इसे मानसिक क्षमता, एकाग्रता और रचनात्‍मकता के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता ब्रह्म देव, ग्रह- बुध एवं राशि मिथुन और कन्‍या है।
मंत्र- ।। ॐ ह्रीं नम: ।।
5- पांच मुखी रुद्राक्ष- इसे ध्‍यान और आध्‍यात्‍मिक कार्यों के लिए पहना जाता है। इसके देवता भगवान कालाग्नि रुद्र, ग्रह- बृहस्‍पति एवं राशि धनु व मीन है।
मंत्र- ।। ॐ ह्रीं नम: ।।
6- छह मुखी रुद्राक्ष- इसे ज्ञान, बुद्धि, संचार कौशल और आत्‍मविश्‍वास के लिए पहना जाता है। इसके देवता भगवान कार्तिकेय, ग्रह- शुक्र एवं राशि तुला और वृषभ है।
मंत्र : ।। ॐ ह्रीं हूं नमः।।
7- सात मुखी रुद्राक्ष- इसे आर्थिक और करियर में विकास के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता माता महालक्ष्‍मी, ग्रह- शनि एवं राशि मकर और कुंभ है।
मंत्र- ।। ॐ हूं नम:।।
8- आठ मुखी रुद्राक्ष- इसे करियर में आ रही बाधाओं और मुसीबतों को दूर करने के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता भगवान गणेश, ग्रह- राहु है।
मंत्र- ।। ॐ हूं नम:।।
9- नौ मुखी रुद्राक्ष- इसे ऊर्जा, शक्‍ति, साहस और निडरता पाने के लिए पहना जाता है। इसके देवता माँ दुर्गा, एवं ग्रह- केतु है।
मंत्र- ।। ॐ ह्रीं हूं नम:।।
10- दस मुखी रुद्राक्ष- इसे नकारात्‍मक शक्‍तियों, नज़र दोष एवं वास्‍तु और कानूनी मामलों से रक्षा के लिए धारण किया है। इसके देवता भगवान विष्‍णु जी हैं।
मंत्र- ।। ॐ ह्रीं नम: ।।

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11-गौरी शंकर रुद्राक्ष- इसे परिवार में सुख-शांति, विवाह में देरी, संतान नहीं होना और मानसिक शांति के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता भगवान शिव-पार्वती जी, ग्रह- चंद्रमा एवं राशि कर्क है।
मंत्र- ।। ॐ गौरी शंकराय नम:।।

💮 हमारे यहां से सभी रुद्राक्ष अभिमंत्रित करके दिए जाते हैं जो भी महोदय इच्छुक हो वह हम से संपर्क करके प्राप्त कर सकता है। हमारे यहां सभी रुद्राक्ष अभिमंत्रित करके प्राप्त कराया जाता है।
हमारे द्वारा प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप या काल के माध्यम से संपर्क करें-8750598891
पंडित गगन भारद्वाज

Did you Know??  Jagannath refused❗  Sri Lakshmidevi does NOT allow Lord Jaganath to enter into Shri Mandir - the Jaganna...
08/07/2022

Did you Know?? Jagannath refused❗

Sri Lakshmidevi does NOT allow Lord Jaganath to enter into Shri Mandir - the Jagannath Puri temple?

Because Jagannath Ji left Her & went to Gundicha & did not return for so long!

Being angry, She personaly went to Gundicha to chastise Lord Jagannath & ordered Him to come back immediately.

Jagannath promised to be back soon.. But still did not return.

Today Finally ⭐⭐ Lord Jagnnath has returned to Lakshmi ji after 8 days!

She allows Baladev & Subhadra to enter the Shri Mandir

But does NOT allow Jagannath to enter❗

Beacause She is in Maan - Upset .

To pacify Her & please Her,
Jagannath offers Her Rasgullas 🍚🍚

haha 😍
Manbhanjan💙

Rasgullas are distributed all over Puri. To celebrate this lila

Jai ho Jai Jagannath Jai Lakshmi ji.....🍨🤝🏻🙌🏻🙏🏻

प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।त्रैलोक्यवासिनामीडये लोकानां वरदा भव॥अर्थ :- विश्व की पीडा दूर करनेवाली देवि...
18/04/2021

प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।
त्रैलोक्यवासिनामीडये लोकानां वरदा भव॥

अर्थ :- विश्व की पीडा दूर करनेवाली देवि! हम तुम्हारे चरणों पर पडे हुए हैं, हमपर प्रसन्न होओ। त्रिलोकनिवासियों की पूजनीया परमेश्वरि! सब लोगों को वरदान दो।
#आदेश_भगवन ्री_कालका_माँ

 ्री_गुरुदेव  ्री_कालका_माँ #माया_और_योगमाया_में_क्या_अंतर_है ।सबसे पहले यह समझ लीजिए कि माया और योगमाया यह दोनों भगवान ...
31/01/2021

्री_गुरुदेव ्री_कालका_माँ

#माया_और_योगमाया_में_क्या_अंतर_है ।

सबसे पहले यह समझ लीजिए कि माया और योगमाया यह दोनों भगवान की शक्ति है। जैसा की हम जानते हैं कि शक्ति और शक्तिमान से पृथक नहीं हो सकती। उदाहरण से समझिए आग और आग में जलाने की शक्ति। आग में जलाने की शक्ति होती है। तो आग को अलग कर दो और जलाने की शक्ति बची रहे ऐसा तो हो नहीं सकता। इसी प्रकार माया और योग माया दोनों भगवान की शक्ति है।

योग माया शक्ति क्या है ।

योग माया भगवान की अंतरंग शक्ति है। यह भगवान की अपनी शक्ति है। भगवान के जितने भी कार्य होते हैं वह योग माया से होते हैं। जैसे भगवान जो भी लीला करते हैं वह योग माया के द्वारा करते हैं। भगवान जो कुछ भी सोचते हैं वह योग माया तुरंत उस चीज को कर देती है। जैसे कि आपने सुना होगा कि कृष्ण जब जन्म लिए तो द्वारपा सो गए, द्वार अपने आप खुल गए, यमुना ने मार्ग दे दिया, यह सब योग माया से होता है।

योग माया की पहचान ।

जब भी भगवान की कोई चीज या कार्य असंभव हो और वह संभव हो रही है। तो आप समझ लीजिये की यह योग माया के द्वारा हुआ है। जैसे वेदों ने कहा कि भगवान स्वतंत्र हैं वह किसी के अधीन नहीं है। और वह यशोदा मैया के डंडे से डर जाते हैं और उनमें रस्सी से बंध जाते हैं। तो यह सर्वज्ञ भगवान सब कुछ जानने वाला भगवान, सर्वशक्तिमान भगवान, सबको मुक्त करने वाला और मैया के यशोदा के रस्सी से बंध जाते है, और माँ से मुक्त करने की विनती करते है, और वो भी अभिनय में नहीं!

वास्तव में, जैसे हम लोग माँ से डरते है, ऐसे ही। यह योग माया के कारण होता है। तो भगवान के जो लीलाएं हैं वह योगमाया से होती हैं। या ऐसा कह दो कि भगवान जो कुछ भी करते हैं, वह सब योग माया के कार्य होते हैं। और केवल भगवान नहीं जितने संत महात्मा हैं, जो सिद्ध हो चुके हैं, जिन महात्माओं ने भगवान की प्राप्ति कर ली है। वह भी योग माया की शक्ति से कार्य करते हैं।

योगमाया कैसे कार्य करती है ।

योग माया की शक्ति कुछ ऐसी है कि कार्य माया के करते हैं, लेकिन उनको माया नहीं लगती। जैसे क्रोध करना यह माया का विकार है दोष है। लेकिन महापुरुष और भगवान भी क्रोध करते हैं, पर वह माया का क्रोध नहीं होता वह योगमाया का क्रोध होता है। देखने में लगता है कि भगवान क्रोध कर रहे हैं चेहरे पर गुस्सा है महापुरुष को क्रोध कर रहे हैं चेहरे पर गुस्सा है। लेकिन वो योग माया से क्रोध करते है और हम लोग कहते हैं कि यह संत भी माया के आधीन है। लेकिन वास्तविकता यह है कि वह योग माया से कार्य कर रहे हैं अर्थात् चेहरे पर क्रोध है लेकिन अंदर कुछ क्रोध नहीं है यह योग माया का विलक्षण बात है।

गोपियों को शंका - कृष्ण अखंड ब्रह्मचारी कैसे ।

आप इस लेख में पहले पढ़ लीजिए। जिसमें गोपियों को शंका होती है कि श्री कृष्ण अखंड ब्रह्मचारी कैसे हैं और दुर्वासा जी ने अपने जीवन में दूब के अलावा कोई स्वाद नहीं लिया है? तो इस प्रश्न का उत्तर श्री कृष्ण देते हैं कि "यह कार्य योग माया से होते हैं, योग माया से माया के कार्य किए जाते हैं।

लेकिन वह भगवान और महापुरुष माया से परे रहते हैं।" दुर्वासा जी अनेक प्रकार के व्यंजन खाया हैं, यह माया का कार्य है, सबको दिख रहा है। लेकिन योग माया के कारण उनको यह माया का सामान का स्वाद उन्हें अनुभव नहीं होता। यही कार्य अर्जुन ने किया था, वह सब को मार रहा है दुनिया देख रही है कि हाँ! अर्जुन ने सबको मारा है। लेकिन वास्तव में अर्जुन ने किसी को नहीं मारा है। यह है योग माया के विलक्षणता।

माया क्या है?

माया भगवान की बहिरंग शक्ति है। माया भी भगवान की ही शक्ति है। लेकिन यह माया जो भगवान से विमुख जीव है या जो जीव भगवान को अपना नहीं मानते या अपना सब कुछ नहीं मानते या जिन जीवो को भगवत्प्राप्ति (भगवान की प्राप्ति) नहीं हुई है। उन पर यह माया हावी रहती है। जिन्होंने भगवान की प्राप्ति कर ली उनसे भगवान माया को हटा देते हैं और उन्हें योग माया की शक्ति दे देते हैं। जिससे वह महात्मा (संत, ऋषि मुनि) माया के कार्य करते हैं लेकिन माया से परे रहते हैं। माया के बारे में अधिक जानने के लिए पढ़े माया क्या है?

योग माया का स्वरूप ।

दुर्गा ,सीता ,काली ,राधा ,लक्ष्मी ,मंगला ,पार्वती का मूर्त रूप है योग माया। और इसी योगमाया से कृष्ण राधा का शरीर है राधा कृष्ण का। इसीलिए राधे श्याम हैं और सीता राम हैं। शंकर के घर भवानी है योगमाया। ये साधारण नारियां नहीं हैं दिव्या हैं। योगमाया के ही अभिनय स्वरूप प्रगट रूप में हैं। अतएव इन नारियों को नारी मत समझियेगा। ये चाहे तो स्त्री के रूप में रहे या पुरुष के रूप में। ये स्वेच्छा से किसी भी रूप को धारण कर सकती है।

तो योगमाया को स्त्री का रूप मत समझियेगा। योगमाया भगवान की शक्ति है, ये कोई भी स्वरूप में रह सकती है। योगमाया बिना किसी स्वरूप के भी भगवान और महापुरुष के साथ रहती है। जैसे नारद जी, तुलसीदास, इनके पास कोई स्त्री नहीं है, लेकिन योगमाया की शक्ति है।
#मंत्र #साधना #कर्मफल

जप माला का संस्कार कैसे करे ? (पुनः प्रेषित)〰〰🌼〰〰🌼🌼🌼〰〰🌼〰〰 कोई भी जप , साधना या अनुष्ठान मेंमाला की जरुरत होती है ! प्राय...
30/10/2020

जप माला का संस्कार कैसे करे ? (पुनः प्रेषित)
〰〰🌼〰〰🌼🌼🌼〰〰🌼〰〰
कोई भी जप , साधना या अनुष्ठान में
माला की जरुरत होती है ! प्रायः जनसाधारण बाजार से
माला खरीदकर उसी से जप आरम्भ कर देते है ! ऐसी माला से जप करना निरर्थक व निषिद्ध है क्योंकि उससे कोई लाभ या सिद्धि सम्भव नहीं है ! सर्वप्रथम माला क्रय करने के बाद विधवत उसके संस्कार करना चाहिए अन्यथा जप निष्फल है !
अधिकतम माला संस्कार की विधि जो प्राप्त होती है उसमें कुछ न कुछ कमी अवश्य रहती है जैसे संस्कार दिया है तो प्राणप्रतिष्ठा नहीं होती , आज आप सब के लाभार्थ मैं माला संस्कार की संपूर्ण विधि पर प्रकाश डाल रहा हु आशा करता हु की साधक भाई - बहनो के कुछ काम आ जाये !

व्यावहारिक विधि👉 साधक सर्वप्रथम स्नान आदि से शुद्ध हो कर अपने पूजा गृह में पूर्व या उत्तर की ओर मुह कर आसन पर बैठ जाए अब सर्व प्रथम आचमन - पवित्रीकरण करने के बाद गणेश गुरु तथा अपने इष्ट देव/ देवी का पूजन सम्पन्न कर ले तत्पश्चात पीपल के 09 पत्तो को भूमि पर अष्टदल कमल की भाती बिछा ले ! एक पत्ता मध्य में तथा शेष आठ पत्ते आठ दिशाओ में रखने से अष्टदल कमल बनेगा ! इन पत्तो के ऊपर आप माला को रख दे ! अब अपने समक्ष पंचगव्य तैयार कर के रख ले किसी पात्र में और उससे माला को प्रक्षालित ( धोये )
करे ! आप सोचे-गे कि पंचगव्य क्या है ? तो जान ले गाय
का दूध , दही , घी , गोमूत्र , गोबर यह पांच चीज
गौ का ही हो उसको पंचगव्य कहते है ! पंचगव्य से
माला को स्नान करना है - स्नान करते हुए अं आं इत्यादि सं हं पर्यन्त समस्त स्वर वयंजन का उच्चारण करे ! फिर
समस्य़ा हो गयी यहाँ कि यह अं आं इत्यादि सं हं पर्यन्त समस्त स्वर वयंजन क्या है ?

तो नोट कर ले - ॐ अं आं इं ईं उं ऊं ऋं
ऋृं लृं लॄं एं ऐं ओं औं अं अः कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं क्षं !!

यह उच्चारण करते हुए माला को पंचगव्य से धोले ध्यान रखे इन समस्त स्वर का अनुनासिक उच्चारण होगा !
माला को पंचगव्य से स्नान कराने के बाद निम्न मंत्र बोलते हुए माला को जल से धो ले

ॐ सद्यो जातं प्रद्यामि सद्यो जाताय वै नमो नमः
भवे भवे नाति भवे भवस्य मां भवोद्भवाय नमः !!

अब माला को साफ़ वस्त्र से पोछे और निम्न मंत्र बोलते हुए माला के प्रत्येक मनके पर चन्दन कुमकुम आदि का तिलक करे

ॐ वामदेवाय नमः जयेष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः कल विकरणाय नमो बलविकरणाय नमः !
बलाय नमो बल प्रमथनाय नमः सर्वभूत दमनाय नमो मनोनमनाय नमः !!

अब धूप जला कर माला को धूपित करे और मंत्र बोले -

ॐ अघोरेभ्योथघोरेभ्यो घोर घोर तरेभ्य: सर्वेभ्य: सर्व
शर्वेभया नमस्ते अस्तु रुद्ररूपेभ्य:

अब माला को अपने हाथ में लेकर दाए हाथ से ढक ले और निम्न मंत्र का १०८ बार जप कर उसको अभिमंत्रित करे -

ॐ ईशानः सर्व विद्यानमीश्वर सर्वभूतानाम
ब्रह्माधिपति ब्रह्मणो अधिपति ब्रह्मा शिवो मे अस्तु
सदा शिवोम !!

अब साधक माला की प्राण - प्रतिष्ठा हेतु अपने दाय हाथ में जल लेकर विनियोग करे -

ॐ अस्य श्री प्राण प्रतिष्ठा मंत्रस्य ब्रह्मा विष्णु रुद्रा ऋषय: ऋग्यजु:सामानि छन्दांसि प्राणशक्तिदेवता आं बीजं
ह्रीं शक्ति क्रों कीलकम अस्मिन माले प्राणप्रतिष्ठापने
विनियोगः !!

अब माला को बाय हाथ में लेकर दाय हाथ से ढक ले और निम्न मंत्र बोलते हुए ऐसी भावना करे कि यह माला पूर्ण चैतन्य व शक्ति संपन्न हो रही है !

ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शं षं सं हों ॐ क्षं सं सः ह्रीं ॐ आं
ह्रीं क्रों अस्य मालाम प्राणा इह प्राणाः ! ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं
लं वं शं षं सं हों ॐ क्षं सं हं सः ह्रीं ॐ आं ह्रीं क्रों अस्य
मालाम जीव इह स्थितः ! ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शं षं सं
हों ॐ क्षं सं हं सः ह्रीं ॐ आं ह्रीं क्रों अस्य मालाम
सर्वेन्द्रयाणी वाङ् मनसत्वक चक्षुः श्रोत्र जिह्वा घ्राण
प्राणा इहागत्य इहैव सुखं तिष्ठन्तु स्वाहा !

ॐ मनो जूतिजुर्षतामाज्यस्य बृहस्पतिरयज्ञमिमन्तनो त्वरिष्टं यज्ञं समिमं दधातु विश्वे देवास इह मादयन्ताम् ॐ प्रतिष्ठ !!

अब माला को अपने मस्तक से लगा कर पूरे सम्मान सहित स्थान दे ! इतने संस्कार करने के बाद माला जप करने योग्य शुद्ध तथा सिद्धिदायक होती है !

नित्य जप करने से पूर्व माला का संक्षिप्त पूजन निम्न मंत्र से करने के उपरान्त जप प्रारम्भ करे -

ॐ अक्षमालाधिपतये सुसिद्धिं देहि देहि सर्व मंत्रार्थ
साधिनी साधय-साधय सर्व सिद्धिं परिकल्पय मे स्वाहा ! ऐं
ह्रीं अक्षमालिकायै नमः !

जप करते समय माला पर किसी कि दृष्टि नहीं पड़नी चाहिए ! गोमुख रूपी थैली ( गोमुखी ) में माला रखकर इसी थैले में हाथ डालकर जप किया जाना चाहिए अथवा वस्त्र आदि से माला आच्छादित कर ले अन्यथा जप निष्फल होता है !
आशा करता हु अब आप जब भी माला बाजार से ख़रीदेगे तो उपरोक्त विधान अनुसार संस्कार अवश्य करेगे !
〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰

 #अभिमान नहीं होना  #चाहिए कि मुझे किसी की  #जरुरत नहीं  #पडे़गी और यह  #वहम भी नहीं होना  #चाहिए कि सबको मेरी  #जरूरत प...
30/05/2020

#अभिमान नहीं होना #चाहिए कि मुझे किसी की #जरुरत नहीं #पडे़गी और यह #वहम भी नहीं होना #चाहिए कि सबको मेरी #जरूरत पडे़गी ।
🙏🌹 ाते💕🚩

 #खामोशी लबों की  #दिखाई देती है सबको,मगर  #शोर दिल का  #आपके सिवा कोई नहीं  #सुनता मेरी  #माँ..🙏🌺  ्री_महाकाली_माँ 💕🚩
29/05/2020

#खामोशी लबों की #दिखाई देती है सबको,
मगर #शोर दिल का #आपके सिवा कोई नहीं #सुनता मेरी #माँ..
🙏🌺 ्री_महाकाली_माँ 💕🚩

❤️ माँ ❤️जिंदगी की पहली   माँजिंदगी की पहली  #दोस्त माँजिंदगी भी माँ  #क्योंकि,जिंदगी देने वाली भी माँ #मातृ दिवस के अवस...
10/05/2020

❤️ माँ ❤️
जिंदगी की पहली माँ
जिंदगी की पहली #दोस्त माँ
जिंदगी भी माँ #क्योंकि,
जिंदगी देने वाली भी माँ
#मातृ दिवस के अवसर पर #समस्त #मातृ #शक्ति को मेरा #प्रणाम।

*अमर शहीदों का बलिदान**याद रखेगा हिंदुस्तान* ।।स्वतंत्रता की बलिवेदी पर अपने शीश की आहुति देने वाले अमर हुतात्माओं को को...
15/08/2019

*अमर शहीदों का बलिदान*
*याद रखेगा हिंदुस्तान* ।।
स्वतंत्रता की बलिवेदी पर अपने शीश की आहुति देने वाले अमर हुतात्माओं को कोटि कोटि नमन एवं अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए *73वें स्वतंत्रता दिवस की आपको कोटिशः बधाइयाँ*।
एवं
भाई- बहन के स्नेह के प्रतीक भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रक्षाबंधन के पवित्र त्यौहार की आचार्य *गगन भारद्वाज* की ओर से बहुत बहुत शुभकामनायें।।

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