10/01/2014
मुख्यमंत्री जी के तथाकथित सामाजिक न्याय का सच
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना विश्वविदयालय के पटना वीमेंस कॅ।लेज को पहला महिला विश्वविदयालय बनाने की धोषणा की है । उनके दवारा की गयी ये घोषणा पटना विश्वविदयालय को पूरी तरह समाप्त करने की योजना है । पहले ही वे इंजीनियरिंग और मेडिकल कॅ।लेज को विश्वविदयालय से अलग कर चुके हैं अब वे महिला कॅ।लेजों को अलग करने की योजना बना चुके हैं। पहला महिला विश्वविदयालय बनने की महत्वाकांक्षी योजना मगध महिला कॅ।लेज की थी लेकिन मुख्यमंत्री महोदय ने पहला महिला विश्वविदयालय बनाने की घोषणा पटना वीमेंस कॅ।लेज के लिये की ये जानते हुये की वो कॅ।लेज अल्पसंख्यक समुदाय में विषेश रूप से ईसाइयों का कॅ।लेज है जो बहुत सारे मामलों में पटना विश्वविदयालय के नियमों की भी उपेक्षा करता है । विशेष रूप से नामांकन प्रक्रियाके संबंध में कॅ।लेज के अपने नियम हैं। मुख्यमंत्री की इस घोषणा में कहां है उनके सामाजिक न्याय का स्ररोकार और कहां है उनका गरीबों के मसीहा बनने का दावा ।
ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि पटना वीमेंस कॅ।लेज बिहारी समाज के उच्च वर्ग और मध्यम उच्च वर्ग को प्रतिनिधित्व करता है जहां प्रदेश के गरीब परिवार की लडकियों का प्रवेश संभव नहीं है। लेकिन , मुख्यमंत्री जी इसी कॅ।लेज को महिला विश्वविदयालय बनाना चाहते हैं, जबकि मगध महिला कॅ।लेज जो बिहार के मध्यम वर्गीय, निम्न मधयम वर्गीय एवम समाज के वंचित तबकों का प्रतिनिधित्व करता है उसका प्रवेश मार्ग बंद करने की योजना बना कर कंवेंशन सेंटर का निर्माण कराना, छात्राओं के आंदोलन के बाद प्रवेश मार्ग देने की घोषणा करना लेकिन किसी भी कीमत पर कंवेंशन सेंटर स्थानान्तरित न करने की जिद पर कायम रह्ना, कॅ।लेज के शिक्षकों- छात्राओं को मिलने का समय न देना, कॅ।लेज के ठीक बगल में कंवेंशन सेंटर एवम फूड कोर्ट के निर्माण कराने का आदेश निर्गत करके यहां पढने वाली लडकियों को असुरक्षित करना, कॅ।लेज के आस-पास के वातावरण को असमाजिक गतिविधियों के हवाले कर देना, और उस कॅ।लेज के विस्तार की संभावना को हमेशा के लिये रोक देना जिसमें यहां की गरीब परिवारों की लडकियां नामांकित होती हैं -- ये है मुख्यमंत्री का सामाजिक न्याय का सच।
मगध महिला कॅ।लेज में छात्राओं की पढाई का खर्च काफी कम होता है , यदि कॅ।लेज को सी टी एसपी एवम सिविल सर्जन वाली ज़मीन मिल जाती तो नामांकन के लिये सीटें बढाई जाती और वंचित समुदायों की ज्यादा-से-ज्यादा लडकिओं का नामांकन हो पाता । लेकिन, मुख्यमंत्री जी के लिये मगध महिला कॅ।लेज का विस्तार करने की जगह उसके विस्तार का रास्ता हमेशा के लिये रोक देने का निर्णय करना और फिर भी सिर्फ कागजी घोषणाओं में ये दावा करना कि उनकी सरकार हमेशा वंचित समुदायों की लडकियों को बेहतर शिक्षा देने और उनके विकास हेतु तत्पर है। ये राजनीतिक घोषणायें मुख्यमंत्री जी के सामाजिक न्याय के दावों की पोल खोलती हैं और इनकी कथनी- करनी के बीच की सच्चाई को उजागर करती हैं ।