Doctor Harisingh Gour Vishwavidyalaya, Sagar

Doctor Harisingh Gour Vishwavidyalaya, Sagar Doctor Harisingh Gour Vishwavidyalaya Sagar (A Central University), formerly University of Saugor,

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वैली कैम्पस में एक हजार सीट की क्षमता का बनेगा भव्य कन्वेंशन सेंटरविश्वविद्यालय के वैली कैंपस का हो रहा विस्तार, कुलपति ...
15/05/2026

वैली कैम्पस में एक हजार सीट की क्षमता का बनेगा भव्य कन्वेंशन सेंटर

विश्वविद्यालय के वैली कैंपस का हो रहा विस्तार, कुलपति ने भूमि पूजन कर रखी आधार शिला

डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के वैली कैंपस में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने भूमि पूजन कर कन्वेंशन सेंटर की आधार शिला रखी. भूमि पूजन में कुलसचिव डॉ. एस पी उपाध्याय भी उपस्थित थे. यह भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. गौरतलब है कि ग्राम पथरिया जाट स्थित वैली कैंपस में विश्वविद्यालय के विभिन्न अकादमिक भवनों का निर्माण कर परिसर को विस्तारित किया जा रहा है. अभी हाल ही में वाणिज्य भवन और आई टी भवन की आधार शिला रखी गई थी जिसका निर्माण कार्य प्रगति पर है. इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि आगामी समय में अन्य भवनों जैसे बालक-बालिका छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र आदि का भी निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कई नवीन पाठ्यक्रमों के संचालन और कई नई इकाईयों और प्रकोष्ठों के स्थापित होने, विद्यार्थियों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अध्ययन-अध्यापन इत्यादि उद्देश्य से परिसर का विस्तार आवश्यक है. कुलसचिव डॉ. उपाध्याय ने बताया कि इस सेंटर की डिजाइन आधुनिक मानकों के अनुसार हैं. इसमें 500 सीट और 250-250 सीट के तीन बड़े कांन्फ्रेंस हाल होंगे जो आई टी सुविधाओं से युक्त होंगे. ये सभी नए भवन निर्धारित समय सीमा में बनकर तैयार होंगे और विद्यार्थियों के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ उपयोग हेतु तैयार किये जायेंगे.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के यंत्री राहुल गिरी गोस्वामी, सुहैल कुरैशी, निधि जैन, मीडिया अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल सहित अन्य कई शिक्षक और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे.

उन्नत अनुसंधान केंद्र द्वारा ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी तकनीक पर कार्यशाला का आयोजन डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्या...
15/05/2026

उन्नत अनुसंधान केंद्र द्वारा ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी तकनीक पर कार्यशाला का आयोजन

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के कुलपति प्रोफेसर यशवंत सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन व सी.ए.आर. की मुख्य समन्वयक, प्रोफेसर श्वेता यादव की पहल पर उन्नत अनुसंधान केंद्र (सी.ए.आर.) के द्वारा उन्नत माइक्रोस्कोपी और नैनोस्केल सामग्री लक्षण वर्णन में प्रतिभागियों की तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ाने के लिए ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप ( टी.ई.एम.) तकनीक पर एक दिवसीय हैंड्स ऑन प्रशिक्षण का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया।
डॉ. विवेक कुमार पांडेय (प्रभारी, सी.ए.आर.) ने केंद्र के संक्षिप्त परिचय के साथ सत्र की शुरुआत की और ऐसे कार्यक्रमों के महत्व के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी । उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सी.ए.आर. में उपलब्ध विभिन्न परिष्कृत उपकरणों पर कार्यशालाओं का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी तकनीकों का अनुभव प्रदान करके तकनीकी दक्षता का निर्माण करना और अनुसंधान उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है। व्याख्यान सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. योगेश भार्गव रहे। डॉ. भार्गव ने वैज्ञानिक नवाचार और औद्योगिक गुणवत्ता विश्लेषण में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने ने टी.ई.एम. की सैद्धांतिक नींव और व्यावहारिक अनुप्रयोगों दोनों पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे प्रतिभागियों को आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने में सक्षम बनाया गया। उनके द्वारा फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलॉजी, फार्मास्युटिकल साइंस, फॉरेंसिक साइंस, मेडिकल साइंस, बायाटेक्नोलॉजी, जियोलॉजी, मटेरियल साइंस आदि विषयों में रिसर्च के लिए टी.ई.एम. तकनीक की उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उनके द्वारा सैम्पल तैयार करने के बारे में बहुत ही बुनियादी से लेकर उन्नत स्तर तक जानकारी भी दी गई।
हैंड्स ऑन सत्र टी.ई.एम. उपकरण के हार्डवेयर भाग और इसके सहायक उपकरणों के संक्षिप्त परिचय के साथ शुरू हुआ, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि से सैम्पल तैयार करने के बारे में बहुत ही बुनियादी से लेकर उन्नत स्तर तक जानकारी दी गई। सैम्पल तैयार करने के लिए प्रतिभागियों को समूहों में विभाजित किया गया। प्रत्येक प्रतिभागी ने सैम्पल तैयार किया और अपने सैम्पल का विश्लेषण किया। प्रतिभागियों को उच्च-रिजॉल्यूशन इमेजिंग, इलेक्ट्रॉन विवर्तन और अत्याधुनिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोगों में उपयोग की जाने वाली उन्नत विश्लेषणात्मक विधियों से भी परिचित कराया गया। प्रतिभागियों की रुचि के क्षेत्र से संबंधित प्रश्नों पर विचार किया गया एवं उनका उत्तर दिया गया। टी.ई.एम. तकनीक पर संपूर्ण हैंड्स ऑन सत्र सी.ए.आर. तकनीकी टीम के डॉ. विवेक कुमार पांडेय, श्री शिवप्रकाश सोलंकी, श्री सौरभ साह, श्री आशीष चढ़ार, श्री अरविन्द चडार और श्री चंद्रप्रकाश सैनी की तकनीकी देखरेख में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव व्याख्यान, प्रयोगशाला प्रदर्शन और चर्चा सत्र शामिल थे जो प्रतिभागियों को माइक्रोस्कोपी प्रौद्योगिकियों में व्यावहारिक चुनौतियों और हाल के विकास का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करते है।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के उपलक्ष्य में भौतिकी विभाग द्वारा दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजितडॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्याल...
15/05/2026

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के उपलक्ष्य में भौतिकी विभाग द्वारा दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित

डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के उपलक्ष्य में टेक्नोलॉजीकल एडवांसमेंट एंड इनोवेशन विषय पर दिनांक 11-12 मई 2026 को स्वर्ण जयंती सभागार में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई । इस दो दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं जैसे फंडामेंटल मटेरियल्स, एडवांस मटेरियल्स, एनर्जी स्टोरेज एंड कन्वर्ज़न मटेरियल्स, हेल्थकेयर, इंडस्ट्री एप्लिकेशन, सेंसर्स, सस्टेनेबल मटेरियल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेषज्ञों द्वारा मार्ग दर्शन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाई.एस. ठाकुर द्वारा दीप प्रज्जवल कर कार्यक्रम की शुरूआत की गयी जिसमें मुख्य अतिथि प्रो. रविन्द्र कुमार पांडे मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, यूएसए द्वारा उद्बोधन में बताया कि मटेरियल को नैनों स्वेल लेब पर कैसे सेमुलेशन एवं मॉडलिंग की जाती है और उसे कैसे प्रायोगिकीय के डाटा को मिलाया जाता है। प्रो. आशीष वर्मा एवं डॉ. अभिषेक बंसल द्वारा भी ए.आई एवं एमबेडेड सिस्टम पर व्याख्यान दिया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम में 76 प्रतिभागियों ने भाग लिया और अपनी-अपनी प्रस्तुति पोस्टर एवं व्याख्यान के रूप में प्रस्तुत की। प्रो. अशोक सिंह (ओ.एन.जी.सी.) द्वारा पृथ्वी के गर्त से कैसे ऑयल गैस एवं खनिज को खोजना एवं निकालने पर व्याख्यान कर विजेताओं को पुरूस्कार एवं प्रमाण-पत्र वितरण कार्य किया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अन्य विभागों से आये हुए प्रो. दीपक व्यास, प्रो. विजय वर्मा, प्रो. श्वेता यादव (डायरेक्टर, रिसर्च एवं डिवलपमेन्ट), डॉ. के.बी. जोशी, प्रो. ए.के. सिंह, प्रो. नेत्रपाल सिंह, डॉ. रेखा गर्ग सोलंकी, डॉ. संध्या पटेल, डॉ. महेश्वर पांडा, डॉ. प्रशांत शुक्ला, डॉ. अनुपमा चन्दा, डॉ. शिवा कुमार सिंह, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. शिखा रानी साहू, डॉ. सोनू कुमार, डॉ. धनंजय कुमार गौर एवं छात्र-छात्राऐं सम्मिलित हुये।

विश्वविद्यालय में आईपीसीए लैबोरेट्रीज लिमिटेड द्वारा कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव का सफल आयोजन डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, ...
15/05/2026

विश्वविद्यालय में आईपीसीए लैबोरेट्रीज लिमिटेड द्वारा कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव का सफल आयोजन

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के प्लेसमेंट सेल द्वारा जैव प्रौद्योगिकी विभाग एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के सहयोग से 12 मई 2026 को आईपीसीए लैबोरेट्रीज लिमिटेड की कैंपस भर्ती प्रक्रिया का सफल आयोजन किया गया। इस भर्ती प्रक्रिया में एम.एससी. माइक्रोबायोलॉजी, एम.एससी बायोटेक्नोलॉजी, बी. फार्मा एवं एम.फार्मा के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर विद्यार्थियों को औषधि उद्योग से जुड़ी रोजगार संभावनाओं एवं उद्योग विशेषज्ञों से संवाद का अवसर प्राप्त हुआ। जैव प्रौद्योगिकी विभाग से डॉ. सी.पी. उपाध्याय एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग से प्रो. नवीन कांगो की विशेष उपस्थिति एवं सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। प्लेसमेंट एवं स्टार्टअप सेल के समन्वयक डॉ. अभिषेक बंसल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। विद्यार्थियों को कैंपस प्लेसमेंट से जुड़ी जानकारी प्रदान की तथा अन्य रोजगार अवसरों के बारे में बताते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन प्रो. नवीन कांगो, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, संकाय सहयोगियों एवं विद्यार्थियों को इस कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव में भागीदारी हेतु शुभकामनाएँ दी गई।

सृजन से समावेशन अध्यापक व्यवसाय का मुख्य द्वार है- प्रो. ठाकुरडॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वार...
11/05/2026

सृजन से समावेशन अध्यापक व्यवसाय का मुख्य द्वार है- प्रो. ठाकुर

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा “सृजन से समावेशन एक समागम” कार्यक्रम का भव्य आयोजन विश्वविद्यालय के अभिमंच सभागार में किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, नवाचार एवं समावेशी शिक्षण से जुड़े विविध आयामों पर सार्थक संवाद हुआ, जिसमें शिक्षाविदों, अधिकारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के समन्वयक मंडल में डॉ .रश्मि जैन, डॉ. पुष्पिता राजावत, डॉ. रजनीश अग्रहरि, डॉ. नवीन सिंह, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव एवं डॉ. शिव शंकर यादव शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर ने की। विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार जैन ने कार्यक्रम निर्देशक के रूप में अतिथियों का सम्मान किया। मुख्य अतिथि के रूप में जिला शिक्षा अधिकारी सागर श्री अरविंद जैन तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव प्रो. नवीन कानगो ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसकी भावपूर्ण प्रस्तुति महिमा, सुधा एवं अनुष्का द्वारा दी गई। मंच संचालन बी.एस.सी. बी.एड एवं बी.ए.बी.एड. छात्रों द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया, जिसने पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा।
इस अवसर पर सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के स्कूल प्रशिक्षण कार्यक्रम में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्यालय प्राचार्यों का सम्मान किया गया। विद्यार्थियों द्वारा अतिथियों को पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक रहा।
कार्यक्रम में आर्मी पब्लिक स्कूल, जैन पब्लिक स्कूल, केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-01, केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-04 तथा जैन हायर सेकेंडरी स्कूल सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों एवं प्राचार्यों की सक्रिय सहभागिता रही।
बी.एससी.-बी.एड. एवं बी.ए.-बी.एड. आठवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत डॉक्यूमेंट्री कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। विद्यार्थियों द्वारा तैयार इस प्रस्तुति में विद्यालयी शिक्षा, नवाचार, शिक्षण पद्धतियों एवं समावेशी शिक्षा तथा दिव्यांग विद्यार्थियों पर बनी डाक्यूमेंट्री की उपस्थित अतिथियों एवं शिक्षकों ने सराहना की।
कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकगण प्रो. सुनील कुमार सेन, डॉ. रानी दुबे, डॉ. चंद्रकांता जैन, डॉ. प्रीति वाधवानी, डॉ. धर्मेंद्र कुमार सर्राफ, डॉ. अभिषेक कुमार प्रजापति, डॉ. चिंतन वर्मा, डॉ. मेघादास, डॉ. सावन कुमारी, डॉ. प्रवीण टीडी, डॉ. अखण्ड शर्मा, डॉ. रमाकांत एवं डॉ. शकीला खान सहित अन्य शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उपस्थित शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं रचनात्मक बताया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पुष्पिता राजावत द्वारा प्रस्तुत किया गया।
यह आयोजन शिक्षा में सृजनात्मकता, समावेशिता एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।

दर्शनशास्त्र विभाग में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165 वीं जन्मजयंती मनाई गईडॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग...
11/05/2026

दर्शनशास्त्र विभाग में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165 वीं जन्मजयंती मनाई गई

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में रवीन्द्र्नाथ टैगोर की 165 वीं जन्म जयंती 07 मई, 2026 को मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता प्रो. नागेश दुबे रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन तथा माँ सरस्वती, रवीन्द्रनाथ टैगोर एवं डॉ. हरीसिंह गौर के चित्रों पर माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत रवीन्द्र संगीत से हुई जिसे बी.फार्मा के विद्यार्थी अनुभव पॉल ने प्रस्तुत किया। इसके पश्चात दर्शन-विभाग के विद्यार्थी अथर्व मिश्रा व सौम्या शार्मा ने रवीन्द्रनाथ टैगोर की कुछ कविताओं का पाठ किया। विभाग के शोधार्थी अक्षरा सिंघई व गौरव कुमार ने टैगोर की कविताओं व उनके दर्शन पर चर्चा की।
कार्यक्रम में भौतिक विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. महेश्वर पाण्डा ने रवीन्द्रनाथ टैगोर के मूल्यों पर चलने की बात पर बल दिया। तत्पश्चात दर्शन-विभाग की सहायक आचार्या डॉ. अर्चना वर्मा ने कहा कि टैगोर मानवीय गरिमा व मानव जाति की आध्यात्मिक एकता के समर्थक थे। डॉ. नरेन्द्र कुमार बौद्ध ने कहा कि टैगोर के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति विशिष्ट एवं गरिमामय है। दर्शन-विभाग के ही शिक्षक डॉ. सत्यनारायण देवलिया ने टैगोर के दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव का धर्म उसके अनिवार्य आन्तरिक स्वरूप की अभिव्यक्ति है जो उसे सीम से असीम की ओर ले जाती है। रसायन विभाग के डॉ. विवेक तिवारी ने दर्शन विभाग की समृद्ध परम्परा का स्मरण किया। जीव विज्ञान स्नातक के विद्यार्थी अंकित शाह ने टैगोर की रचना पर गायन प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि प्रो. नागेश दुबे ने रवीन्द्रनाथ टैगोर व डॉ. हरीसिंह गौर के व्यक्तित्वों में समानता बताते हुए कहा कि दोनों ही प्रकृति प्रेमी थे तथा दोनों ने ही शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किये। दर्शन-विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मनुष्य और ब्रह्माण्ड के स्वरूप में तादात्म्य पर बल दिया। डॉ. तिवारी ने सभी का आभार ज्ञापन भी किया। दर्शन विभाग की आचार्या डॉ. देवस्मिता चक्रबर्ती ने कार्यक्रम का संचालन किया। इसका समापन राष्ट्रगान से हुआ।

पाणिनीय व्याकरण आज भी महत्वपूर्ण है - डॉ. अभिज्ञान द्विवेदीडॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के भाषा अध्ययन शाला "लिटरे...
11/05/2026

पाणिनीय व्याकरण आज भी महत्वपूर्ण है - डॉ. अभिज्ञान द्विवेदी

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के भाषा अध्ययन शाला "लिटरेरी फ्यूचर नाउ" सीरीज में द्वितीय वक्तव्य का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भाषा विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिज्ञान द्विवेदी ने " एक्सप्लोरिंग द लिंकगेस ऑफ़ ट्रांस्फोर्मेशनल जेनेरेटिव ग्रामर टू पाणिनीय ग्रामर" विषय पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया । उन्होंने पाणिनि के व्याकरण और अष्टाध्यायी के तमाम सिद्धांत और उस पर लिखे गए सभी ग्रंथों की विस्तार से चर्चा की तथापि व्याकरण को पाश्चात्य जगत के विद्वानों ने किस रूप में परिभाषित किया इस पर भी प्रकाश डाला । उन्होंने 19वीं और 20वीं शताब्दी में हुए भाषाई और व्याकरणिक बदलावों पर भी गहन दृष्टि से चर्चा की । कार्यक्रम की अध्यक्षता भाषा अध्ययनशाला की अधिष्ठाता प्रो. रश्मि सिंह ने की । कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हिमांशु कुमार ने दिया एवं आभार हिंदी विभाग के प्रोफेसर राजेंद्र यादव द्वारा प्रकट किया गया और साथ ही साहित्य और व्याकरण के अंतर्संबंध पर चर्चा की । मंच संचालन भाषा विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य बबलू रे द्वारा किया गया । कार्यक्रम के समन्वयक के रूप में प्रोफेसर राजेंद्र यादव एवं सह समन्वयक के रूप में डॉ. वंदना राजोरिया एवं डॉ. हिमांशु कुमार उपस्थित रहे । कार्यक्रम में अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी विभाग के समस्त अध्यापकगण एवं शोधार्थी-विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दर्शनशास्त्र विभाग में बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में हुआ आयोजन डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में ...
11/05/2026

दर्शनशास्त्र विभाग में बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में हुआ आयोजन

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में 2570 वीं बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में एक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इतिहास विभाग के प्रो. बी.के. श्रीवास्तव रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने की।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. नरेन्द्र कुमार बौद्ध ने सिद्धार्थ के जन्म से लेकर बुद्ध बनने की यात्रा एवं उनके संघर्ष पर प्रकाश डाला और एक लघु फिल्म प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. बी.के. श्रीवास्तव ने बौद्ध धर्म के अष्टांग मार्ग की व्यावहारिक महत्ता को बताते हुए कहा कि मनुष्य के चरित्र निर्माण में यह अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने भारत के तीन सर्वश्रेष्ठ बौद्ध विचारकों का जिक्र करते हुए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, डॉ. हरीसिंह गौर और राहुल सांकृत्यायन को याद किया और बताया कि डॉ. गौर को उनकी कृति “दि स्प्रिट ऑफ बुद्धिज्म” के लिए जापान में द्वितीय बुद्ध की उपाधि से नवाजा गया था।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने दर्शनशास्त्र विभाग, सागर विश्वविद्यालय के दार्शनिक डॉ. प्रतापचन्द्र की रचनाओं “आदि बौद्ध दर्शन अनात्मवादी परिप्रेक्ष्य” एवं “द हिन्दू‍ माइण्ड” का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लेखन से हम न केवल तार्किक विचारों से परिचित होते हैं बल्कि शोध प्रविधि भी सीखते हैं।
विभाग के शिक्षक डॉ. सत्यनारायण देवलिया ने बौद्ध एवं वैदिक दर्शन में समन्वय दिखाते हुए ब्रह्मविहार के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. देवस्मिता चक्रबर्ती ने व्यावहारिक बौद्ध दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बौद्ध धर्म केवल एक सिद्धान्त नहीं है बल्कि सभी के प्रति करुणा के साथ-साथ बेहतर तरीके से सभी के साथ जीवन जीने की एक व्यावहारिक, चिकित्सीय पद्धति है।
विभाग के शोध-छात्र मयंक विनायक राय ने आधुनिक काल में आपा-धापी भरे जीवन में बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता बताई। शोध-छात्रा अक्षरा संघई ने सक्रिय बौद्ध धर्म पर अपने विचार व्यक्त किये। शोध-छात्र गौरव कुमार ने जे. कृष्णामूर्ति के विचारों पर प्रकाश डाला। छात्र मेधांश शर्मा ने बौद्ध विपश्य‍ना की महत्ता बताते हुए अपने अनुभव व्यक्त किये।
कार्यक्रम के अन्त में डॉ. देवस्मिता चक्रबर्ती ने आभर ज्ञापित किया। इस अवसर पर दर्शनशास्त्र विभाग की शिक्षिका डॉ. अर्चना वर्मा, छात्र इकबालजीत सिंह, पूजा, प्रा.भा. इतिहास विभाग के डॉ. शिवकुमार पारोचे, इतिहास विभाग के शोध-छात्र दीपा अहिरवार, विजय प्रकाश, बालचंद, अथर्व, प्रियंका आदि सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय में आयोजित चतुर्थ सारस्वत व्याख्यान माला में डॉ. सञ्जय कुमार ने आयुर्वेदीय आचार्य परम्परा एवं स्वास्थ्य वि...
04/05/2026

विश्वविद्यालय में आयोजित चतुर्थ सारस्वत व्याख्यान माला में डॉ. सञ्जय कुमार ने आयुर्वेदीय आचार्य परम्परा एवं स्वास्थ्य विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया

आयुर्वेदीय आचार्य परम्परा ब्रह्मा से आरम्भ होती है- डॉ. सञ्जय कुमार

डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्त्वावधान में चतुर्थ सारस्वत व्याख्यान माला का ऑनलाइन आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में IQAC के निदेशक डॉ. अनिल कुमार जैन ने कहा कि आयुर्वेद सभी चिकित्सा पद्धतियों की जननी है और यह केवल रोग उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की कला और विज्ञान सिखाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आयुर्वेद की आचार्य परम्परा के जीवित रहने से ही इसकी निरंतरता और प्रासंगिकता बनी हुई है।
इस व्याख्यानमाला का मुख्य विषय ‘आयुर्वेदीय आचार्य परम्परा एवं स्वास्थ्य’ था। विषय के मुख्य वक्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत प्राध्यापक डॉ. संजय कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि आयुर्वेद का अस्तित्व सृष्टि के प्रारंभ से ही माना जाता है और यह केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन जीने का विज्ञान है। उन्होंने बताया कि मानव जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है, जो स्वस्थ रहते हुए धर्म, अर्थ आदि पुरुषार्थों के माध्यम से संभव होती है।
उन्होंने व्याधियों को मुख्यतः दो वर्गों शारीरिक व मानसिक में विभाजित करते हुए स्पष्ट किया कि शारीरिक रोगों की निवृत्ति वात, पित्त और कफ के संतुलन से होती है, जबकि मानसिक विकारों को रजस् और तमस् के संतुलन द्वारा दूर किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने मानव जीवन को अत्यंत दुर्लभ बताते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन में आयुर्वेद की भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. सञ्जय कुमार ने आयुर्वेद की आचार्य परम्परा को ब्रह्मा से आरंभ मानते हुए चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदयम् तथा अथर्ववेद संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों के उद्धरणों के माध्यम से अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किये।
संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र यादव जी ने आयुर्वेद विषय पर होने वाले व्याख्यान को प्रासंगिक बताते हुए कहा कि आज जहां भीषण गर्मी में लोग रोगग्रस्त हो रहे हैं वहां हमारी भारतीय ज्ञान परम्परा का आयुर्वेद ही एकमात्र पूर्ण निदान है। भाषाध्ययनशाला की अध्यक्षा प्रो. रश्मिसिंह ने इस कार्यक्रम के लिए संस्कृत विभाग को शुभकामनाएं दीं और इस तरह के सुंदर प्रासंगिक कार्यक्रम को निरंतर करते रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. किरण आर्या ने अपने संबोधन में आयुर्वेद के सिद्धांतों को आधुनिक जीवन शैली से जोड़ने पर बल दिया, ताकि वर्तमान पीढ़ी इसके लाभों को समझकर अपने दैनिक जीवन में अपना सके।
इस व्याख्यान माला में संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. शशि कुमार सिंह, डॉ. नौनिहाल गौतम, और डॉ. रामहेत गौतम ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बनाया।
इस व्याख्यान माला में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत ठाकुर, भाषा अध्ययन शाला की अधिष्ठाता प्रो. रश्मि सिंह, संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र यादव, वैदिक अध्ययन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ आयुष गुप्ता, पांडुलिपि अध्ययन केन्द्र से ऋषभ भारद्वाज तथा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर और शोधार्थी भी जुड़े। प्रतिभागी बिहार, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और अन्य राज्यों से जुड़े थे। स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. सुकदेव वाजपेयी भी उपस्थित हुए। लगभग 100 प्रतिभागियों ने इस व्याख्यान माला में भाग लिया।
यह व्याख्यान माला विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक माह नियमित रूप से विभिन्न विषयों पर आयोजित की जाती है । कार्यक्रम का संचालन संस्कृत विभाग के शोधार्थी शैलेश तिवारी ने किया तथा वैदिक मङ्गलाचरण एम.ए की छात्रा शिक्षा नायक ने प्रस्तुत की। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के सहसंयोजक शोधार्थी भूपेंद्र लोधी ने किया।

पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में साप्ताहिक संगोष्ठी एवं व्याख्यान ऑनलाइन माध्यम से संपन्न डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सा...
04/05/2026

पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में साप्ताहिक संगोष्ठी एवं व्याख्यान ऑनलाइन माध्यम से संपन्न

डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के वनस्पति विभाग द्वारा आयोजित 22 से 29 अप्रैल 2026 तक पृथ्वी दिवस संगोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया गया। संगोष्ठी के छठवें दिन सत्र की मुख्य वक्ता राजस्थान के बनस्थली विद्यापीठ स्थित जैव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग की डॉ. गरिमा श्रीवास्तव थीं। उन्होंने खाद्य अपशिष्ट प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन पर इसके प्रभाव विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन ने मौसम के स्वरूप को तेजी से प्रभावित किया है। राजस्थान में भीषण बाढ़, गुरुग्राम में भीषण ठंड, उत्तराखंड में आग और सामान्य से कम मानसून इसके कुछ परिणाम हैं। जलवायु जोखिम सूची में भारत अब नौवें स्थान पर है। ग्रीनहाउस प्रभाव इन सभी जलवायु परिवर्तनों का मुख्य कारण है। इसके साथ ही, कार्बन उत्सर्जन और उत्पादन, पैकेजिंग आदि के लिए ऊर्जा के उपयोग से उत्पन्न खाद्य अपशिष्ट ने भी जलवायु परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। खाद्य अपशिष्ट कृषि अवशेषों और खाद्य प्रसंस्करण से उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा, उत्पादित भोजन का एक तिहाई हिस्सा बर्बाद हो जाता है। इस अपशिष्ट भोजन को अक्सर लैंडफिल में फेंक दिया जाता है, जहाँ यह विघटित नहीं होता, बल्कि ग्रीनहाउस गैसें, विशेष रूप से मीथेन, उत्सर्जित करता है। सबसे अधिक खाद्य अपशिष्ट आवासीय घरों, रेस्तरां और किराना दुकानों से उत्पन्न होता है। इन सभी से जल, भूमि, ऊर्जा और अर्थव्यवस्था जैसे संसाधनों का क्षरण होता है। यह अप्रत्यक्ष रूप से जल, वायु और मिट्टी को प्रदूषित कर सकता है, जिससे गरीबी और आर्थिक नुकसान और भी बढ़ जाता है। वक्ता ने आगे बताया कि भोजन को बचाना, साझा करना और खाद बनाना महत्वपूर्ण है। इससे भोजन की बर्बादी को रोका जा सकता है। एक अन्य विकल्प खाद्य अपशिष्टों का अवायवीय पाचन है, जिससे बायोगैस और उर्वरक उत्पन्न किए जा सकते हैं।

साप्ताहिक संगोष्ठी के अंतिम दिन समापन समारोह के अवसर पर मुख्य वक्ता बहुमुखी प्रतिभा के धनी अमन सोम्या बिश्वास थे, जो बी.वी.एससी. एवं एएच के छात्र, वन्यजीव शोधकर्ता और संरक्षणवादी हैं। उन्होंने 'अस्तित्व का विज्ञान और वन्यजीव संरक्षण' विषय पर उत्कृष्ट व्याख्यान दिया। उन्होंने वास्तविक जीवन के परिदृश्यों से कई वीडियो और चित्र दिखाए, जिनसे जानवरों, सरीसृपों और पक्षियों को बचाने का संदेश मिला, क्योंकि इन सभी जीवों की पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वन्यजीव संरक्षण जैव विविधता को बनाए रखने और दीर्घकालिक अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए जंगली प्रजातियों, उनके आवासों और पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करने का वैज्ञानिक अभ्यास है। उन्होंने बताया कि जैव विविधता के लिए प्रमुख खतरे मानव विस्तार के कारण आवासों का विखंडन और नुकसान, लुप्तप्राय प्रजातियों का शिकार और तस्करी, जलवायु परिवर्तन और विषाक्त पदार्थों का जैव संचय हैं जो प्रजातियों और पारिस्थितिक तंत्रों को नुकसान पहुंचाते हैं। वक्ता ने समझाया कि विज्ञान निर्णयकर्ताओं को समझाने और प्रभावी संरक्षण उपायों को लागू करने के लिए आवश्यक आंकड़े प्रदान करता है। उन्होंने पोषण गतिशीलता का उल्लेख किया, जिसमें पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से ऊर्जा और पोषक तत्वों की आवाजाही और खाद्य श्रृंखलाओं और खाद्य जालों में जीवों की परस्पर क्रिया शामिल है। इसमें, जीवों को उनके भोजन व्यवहार के आधार पर उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक समूहों में बांटा गया है। साथ ही, जीवन का जाल एक पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर सभी जैविक और अजैविक तत्वों के बीच जटिल, परस्पर जुड़े संबंधों को संदर्भित करता है, जहां प्रत्येक जीव जीवित रहने के लिए दूसरों पर निर्भर करता है। उन्होंने पशुओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गैर-स्टेरॉयड सूजनरोधी दवा डाइक्लोफेनाक का उदाहरण भी दिया, जिसके कारण शवों के माध्यम से सेवन करने पर दक्षिण एशियाई गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट आई और गुर्दे की विफलता से उनकी मृत्यु हो गई। अब वे मध्य प्रदेश में संस्कृतियों के संरक्षण में लगे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण भी अंतर्ग्रहण, उलझने और आवास विनाश के माध्यम से कई प्रजातियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे भुखमरी, घुटन और घातक आंतरिक चोटें होती हैं। इसके बाद उन्होंने विदेशी जनित रोगों, वन वन्यजीवों की निगरानी, एक स्वास्थ्य प्रणाली और रेबीज तथा सांप के काटने से बचाव के बारे में बात की।

व्याख्यान के बाद, आयोजन टीम के सभी सदस्यों ने सेमिनार पर अपने विचार रखे और वक्ता को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के दौरान छात्रों के बीच विभाग के सक्सेना हॉल में स्लोगन लेखन और पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। जिसमें स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों ही छात्रों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का विषय पृथ्वी दिवस था। पोस्टरों का मूल्यांकन किया गया| पोस्टर पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की गई जिसमें प्रथम श्रेणी: अर्मिता चक्रवर्ती, द्वितीय श्रेणी: योगिता अहिरवार और तृतीय श्रेणी: रूपाली जेना। अन्य प्रतिभागी छात्रों को भी सांत्वना पुरस्कार दिए गए। इसके बाद धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में विभाग के समस्त शिक्षक, शोधार्थी एवं प्रतिभागी एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

संस्कृत विभाग में विशेष व्याख्यान, डॉ. रामरतन पांडे लिखित पुस्तक का हुआ विमोचन डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के ...
04/05/2026

संस्कृत विभाग में विशेष व्याख्यान, डॉ. रामरतन पांडे लिखित पुस्तक का हुआ विमोचन

डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के संस्कृत विभाग एवं आर्ष परिषद् सागर के संयुक्त तत्त्वाधान में राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त पंडित प्रेमनारायण द्विवेदी के 20वें पुण्य स्मरण पर भारतीय ज्ञान परंपरा तथा पंडित प्रेमनारायण द्विवेदी विषय पर तत्त्ववबोध व्याख्यान एवं श्रद्धांजलि सभा रंगनाथन सभागार में आयोजित की गई। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र यादव, मुख्य अतिथि प्रो. कुसुम भूरिया, सारस्वत अतिथि प्रो. रश्मि सिंह तथा विशिष्ठ अतिथि डॉ. रामहेत गौतम थे। कार्यक्रम मुख्य अतिथि प्रो. कुसुम भूरिया ने कहा कि पंडित प्रेमनारायण द्विवेदी शास्त्र- लोक दोनों के दृष्टा ऋषि थे। महात्मा पंडित प्रेमनारायण द्विवेदी पारंपरिक जहां शास्त्रीय पंडित थे, वहीं लोक को बारीकी से समझने वाले पंडित थे ।उन्होंने मौलिक साहित्य में समाज की ज्वलन्तसमस्याएं, तात्कालिक परिदृश्यों को साहित्य में उकेरा है । शनि चालीसा की रचना करके यह सिद्ध किया कि लोक सर्वोपरि है, लोक मंगल में ही हमारा मंगल है, शनि चालीसा की रचना मंगलकारी है इसके पारायण से संसार के लोगों को तीनों प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलेगी। कार्यक्रम की सारस्वत अतिथि प्रो रश्मि सिंह ने कहा कि पंडित प्रेमनारायण द्विवेदी का साहित्य बहुआयामी एवं बहुउपयोगी है। द्विवेदी जी का साहित्य बहुआयामी है, उनके मौलिक और अनूदित साहित्य में विविध विधाओं को सम्मिलित किया है। अध्यक्षता करते हुए प्रो. राजेंद्र यादव ने कहा कि संस्कृत देवभाषा के पूर्व प्रकृति की भाषा है। संस्कृत भाषा देव भाषा है। इसे धरती की सबसे प्राचीन भाषा होने का गौरव प्राप्त है। यह प्रकृति के सन्निकट हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. रामहेत गौतम ने कहा कि द्विवेदी जी का साहित्य लोक मुक्ति का पथ प्रशस्त करता है

पुस्तक विमोचन

डॉ. रामरतन पांडे द्वारा लिखित सागर की सारस्वत साधना पुस्तक का लोकार्पण हुआ। पुस्तक सागर में जन्में या सागर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले देश के लब्ध प्रतिष्ठित 44 विद्वानों विद्वानों के जीवन और कृत्तित्व पर केंद्रित है। संचालन डॉ. नौनिहाल गौतम ने स्वागत वक्तव्य डॉ. ऋषभ भारद्वाज ने तथा आभार डॉ. भुवनेश्वर तिवारी ने किया। कार्यक्रम में डॉ. अनिल कुमार तिवारी, डॉ. सत्यनारायण देवलिया, डॉ. राम रतन पांडे, टीकाराम त्रिपाठी, डॉ. सुखदेव मिश्र, डॉ. भुवनेश्वर प्रसाद तिवारी, डॉ. किरण आर्य, डॉ. अश्विनी सागर, डॉ. अभय कुमार, डॉ. शशिकुमार सिंह, ममता भूरिया, दीक्षा सबले, राजनंदनी दांगी, डॉ. खुशबू ठाकुर, सूर्यकांत द्विवेदी, दीपाली बहादुर, संघमित्रा गुरु, आर्ची जैन, शिक्षा नायक, शक्ति दुबे, संतोष कुमार, सौरभ मिश्र, शैलेश तिवारी, त्रिलोक दुबे, अभिनव सिंह, अभिषेक लखेरा, लोकेश कुमार, राकेश अहिरवार, रविभूषण कुमार, अनुराग पराशर, सुधांशु कुमार, जगदेव पांडे, चंद्रपाल लोधी, अनूप नारायण गौतम, योगेश गुरु, राजा सिंह राजपूत, पं. शक्ति मिश्र रोशन सिंह, संजना सिंह, उमेश दत्त अग्निहोत्री, आदित्य ताम्रकार, दिग्विजय तिवारी, मनीष मांझी, नेहा मालवीय, प्रीति लोधी, कंचन साहू, सत्यम प्रकाश उपस्थित रहे।

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