15/05/2026
“एक बच्चे की पढ़ाई… और पूरा परिवार फिर से छात्र बन गया…”
पहले के समय में बच्चे स्कूल जाते थे…
अब पूरा घर “एजुकेशन सिस्टम” में भर्ती हो चुका है। 😄
सुबह बच्चा स्कूल जाता है,
दोपहर में मम्मी WhatsApp group check करती हैं,
शाम को पापा project print कराने भागते हैं,
और रात में पूरा परिवार dining table पर emergency meeting करता है…
“कल science model जमा करना है…” 😅
सच कहें तो
आज कई प्राइवेट स्कूलों में सिर्फ बच्चे की नहीं,
पूरा परिवार की attendance लगती है।
कहीं EVS project में मम्मी का creativity test होता है,
तो कहीं maths homework में पापा का patience check होता है।
और अगर बच्चा nursery में हो…
तो parents को फिर से A for Apple से graduation शुरू करना पड़ता है। 😂
लेकिन मज़ेदार बात ये है कि
इसी भागदौड़ में एक चीज़ अच्छी भी होती है…
मां-बाप बच्चे की पढ़ाई से जुड़ जाते हैं।
उन्हें पता चलता है कि बच्चा कहाँ struggle कर रहा है,
कहाँ डर रहा है,
और कहाँ उसे सिर्फ डांट नहीं… साथ चाहिए।
समस्या स्कूल की फीस से ज्यादा उस pressure की है
जहाँ education कभी-कभी “family assignment” बन जाती है।
हर बच्चा topper नहीं होगा,
हर parent designer नहीं होगा,
और हर घर में इतना समय भी नहीं होता कि रोज़ project factory चलाई जाए।
Education का मतलब सिर्फ fancy chart paper और glitter नहीं होना चाहिए…
बल्कि ऐसा माहौल होना चाहिए
जहाँ बच्चा खुद सीखने लगे।
क्योंकि असली पढ़ाई वही है
जो बच्चे को independent बनाए…
पूरे परिवार को unpaid tuition teacher नहीं। 🙂
कई लोग मजाक में कहते हैं —
“प्राइवेट स्कूल सस्ते हैं, एक फीस में पूरा परिवार पढ़ लेता है…”
लेकिन इस मजाक के पीछे आज के education system की सच्चाई भी छिपी है।
और शायद इसी वजह से
आज parents भी report card से ज्यादा mental peace ढूंढ रहे हैं…
“बच्चे की पढ़ाई ज़रूरी है…
लेकिन बचपन से ज्यादा नहीं।”
“आजकल स्कूल में सिर्फ बच्चे का नहीं… पूरे परिवार का होमवर्क चेक होता है 😄”
कभी-कभी education इतना complicated हो जाता है कि बच्चा कम… parents ज्यादा थक जाते हैं।
अगर आप भी teacher, parent या student हैं… तो बताइए —
आज की पढ़ाई आसान हुई है या सिर्फ expensive और stressful?