VCSG Government Medical College, Srinagar Uttarakhand

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first Government Medical college in uttarakhand

समाचार पत्रों के माध्यम से...
15/05/2026

समाचार पत्रों के माध्यम से...

मरीजों को हर स्तर पर बेहतर सुविधा देना प्राथमिकता-- डॉ आशुतोष सयाना प्राचार्य ने किया बेस अस्पताल के विभिन्न वार्डों का ...
14/05/2026

मरीजों को हर स्तर पर बेहतर सुविधा देना प्राथमिकता-- डॉ आशुतोष सयाना

प्राचार्य ने किया बेस अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण

श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने गुरुवार को बेस अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से लेकर विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा के प्रदेश के माननीय चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल जी के चिकित्सा सुविधा बेहतर बनाने के लगातार निर्देश है।
प्राचार्य ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को वार्डों में लगे कंप्यूटरों के माध्यम से ही मरीजों के डिस्चार्ज तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही भर्ती मरीजों के सैंपल वार्ड बॉय के जरिए लैब भेजने तथा मरीजों की रिपोर्ट भी वार्ड में ही कंप्यूटर के माध्यम से उपलब्ध कराने को कहा, ताकि समय की बचत हो सके और मरीजों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए शुक्रवार को बैठक आयोजित कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। प्राचार्य ने वार्डों में लगी इंटरकॉम सेवा का प्रभावी उपयोग करने पर जोर देते हुए नर्सिंग स्टाफ को सभी जरूरी नंबर वार्डों में चस्पा करने या याद रखने के निर्देश दिए।
डॉ. सयाना ने कहा कि मरीजों से संबंधित किसी भी समस्या के समाधान के लिए मरीज सहायता संपर्क केंद्र का उपयोग किया जाए, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को त्वरित सहायता मिल सके।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने मेडिसिन विभाग के आईसीयू का भी जायजा लिया और भर्ती मरीजों की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। चारधाम यात्रा पर आए महाराष्ट्र के एक मरीज की पूरी हिस्ट्री लेते हुए बेहतर उपचार का भरोसा दिलाया।
इस मौके पर प्राचार्य ने मेडिसिन विभाग के पीजी डॉक्टरों द्वारा दी जा रही सेवाओं की सराहना करते हुए उन्हें आगे भी जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। निरीक्षण के दौरान डॉ. मैर्टन, फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ मौजूद रहे।
✍️ Manmohan ✍️

समान कार्य समान वेतन लागू होने पर राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के कर्मचारियों में खुशी277 कर्मचारियों को मिलेगा समान वेतन...
14/05/2026

समान कार्य समान वेतन लागू होने पर राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के कर्मचारियों में खुशी

277 कर्मचारियों को मिलेगा समान वेतन का लाभ

धामी सरकार के फैसले से कर्मचारियों को राहत

श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के कर्मचारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किए जाने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल, स्थानीय विधायक एवं शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत सहित मेडिकल कॉलेज प्रशासन का आभार व्यक्त किया। कर्मचारियों ने इस निर्णय को लंबे समय से लंबित मांग पूरी होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ आशुतोष सयाना एवं वित्त नियंत्रक प्रशांत कुमार शर्मा के प्रयासों की भी कर्मचारियों ने सराहना की।
इस निर्णय से मेडिकल कॉलेज के लगभग 277 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। इनमें टैक्निशियन, क्लर्क, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, ओटी टैक्निशियन, नर्सिंग स्टाफ, एक्स-रे टेक्नीशियन तथा फार्मासिस्ट शामिल हैं। कर्मचारियों ने कहा कि समान कार्य के अनुरूप वेतन मिलने से उनका मनोबल बढ़ेगा और कार्यक्षमता में भी सुधार आएगा।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ आशुतोष सयाना ने सभी कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि सभी कर्मचारी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करें तथा अस्पताल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मेडिकल कॉलेज की प्राथमिकता है और कर्मचारियों का सहयोग इसमें अहम रहेगा।
कार्यक्रम में अमित मलवाल, प्रदीप नौटियाल, त्रिलोक रावत, सोहन बर्तवाल, सचिन फोंदणी, आशुतोष मलासी, प्रीति जुयाल, नीतू जोशी, गीता, मोनिका, मोहर सिंह, विवेक त्यागी, पंकज बर्तवाल और अनुराग बर्तवाल सहित कई कर्मचारी उपस्थित रहे।
-----✍️ मनमोहन ✍️

बेस अस्पताल में पूर्व सैनिकों की मुस्तैदी से सुरक्षित बना अस्पताल का माहौलशराब के नशे में वार्ड में पहुंचे दो तीमारदारों...
13/05/2026

बेस अस्पताल में पूर्व सैनिकों की मुस्तैदी से सुरक्षित बना अस्पताल का माहौल

शराब के नशे में वार्ड में पहुंचे दो तीमारदारों को सुरक्षा कर्मियों ने किया बाहर

अस्पताल का माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त निगरानी, प्रशासन अलर्ट

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने सुरक्षा कर्मियों की कार्यशैली की सराहना की

श्रीनगर। बेस अस्पताल में मरीजों और उनके तीमारदारों की सुरक्षा तथा अस्पताल के शांतिपूर्ण वातावरण को बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पूर्व सैनिक पूरी मुस्तैदी और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहे हैं। सीमाओं पर देश सेवा का अनुभव रखने वाले ये पूर्व सैनिक अब स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अस्पताल परिसर को अनुशासित और सुरक्षित बनाए रखने में जुटे हैं। वहीं सीसीटीवी कैमरे से लगातार निगरानी चल रही है और वॉकी टॉकी से तुरंत सूचनाएं आदान-प्रदान होती है।

अस्पताल प्रशासन द्वारा लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि मरीजों को उपचार के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो और अस्पताल का वातावरण शांत एवं व्यवस्थित बना रहे। इसी क्रम में विगत रात्रि बेस अस्पताल के सर्जरी वार्ड में भर्ती एक मरीज के साथ आए दो तीमारदार शराब के नशे में अस्पताल पहुंचे और वार्ड में शोर-शराबा करने लगे। उनके व्यवहार से मरीजों और अन्य तीमारदारों को परेशानी होने लगी।

स्थिति को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों व्यक्तियों को रोका और पूछताछ की। जांच के दौरान एक व्यक्ति की जेब से शराब का पव्वा भी बरामद हुआ। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने सख्ती दिखाते हुए दोनों शराबियों को अस्पताल परिसर से बाहर कर दिया। सुरक्षा कर्मियों की तत्परता से अस्पताल में किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकी और वार्ड का माहौल जल्द सामान्य कर दिया गया।

बेस अस्पताल के सुरक्षा निरीक्षक वीरेंद्र कुंवर एवं राजेन्द्र प्रसाद भट्ट ने बताया कि अस्पताल परिसर में अनुशासन भंग करने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि सर्जरी वार्ड में भर्ती मरीज के साथ आए दो लोगों के शराब के नशे में पाए जाने पर सुरक्षा कर्मी पूर्व सैनिक विशाल सिंह, युद्धवीर सिंह तत्परता दिखाते हुए उन्हें अस्पताल से बाहर कर दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में शराब पीकर आने वाले या माहौल खराब करने वाले लोगों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा कर्मियों को नियमित रूप से अस्पताल परिसर में निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीजों को शांतिपूर्ण वातावरण में उपचार मिल सके। सीसीटीवी कैमरा इंचार्ज शिव दर्शन नेगी भी कैमरों की मदद से सर्तकता बनाए हुए हैं।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता और जिम्मेदार कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि अस्पताल में मरीजों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अनुशासन और मर्यादा का पालन करना चाहिए, ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल के अनुशासित वातावरण को बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। पूर्व सैनिकों की सक्रियता और सतर्कता से अस्पताल परिसर में सकारात्मक माहौल बना हुआ है तथा मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित वातावरण मिल रहा है। -✍️✍️ मनमोहन ✍️✍️

डिजिटल सेवा..
12/05/2026

डिजिटल सेवा..

नवजात शिशुओं की देखभाल का संकल्प
11/05/2026

नवजात शिशुओं की देखभाल का संकल्प

11/05/2026

डिजिटल होगी फॉरेंसिक प्रक्रिया, मेडिकल कॉलेज श्रीनगर ने शुरू की नई व्यवस्था

हाथ से लिखी नहीं, अब डिजिटल मिलेगी एमएलसी रिपोर्ट

MedLEaPR-Uttarakhand प्रणाली से एमएलसी प्रक्रिया होगी हाईटेक

सड़क हादसे और आपराधिक मामलों की एमएलसी रिपोर्ट अब ऑनलाइन उपलब्ध

श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल में अब मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) से जुड़ी रिपोर्ट मरीजों और उनके परिजनों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। यह व्यवस्था चिकित्सा-कानूनी परीक्षा और पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग प्रणाली MedLEaPR-Uttarakhand के तहत शुरू कर दी है। इससे अब हाथ से लिखी रिपोर्टों की जगह कंप्यूटरीकृत और स्पष्ट डिजिटल रिपोर्ट मिलेगी। बेस अस्पताल प्रदेश में पहला राजकीय अस्पताल होगा, जहां जनता की सुविधा के लिए डिजिटल काम शुरू हो रहे हैं।
विदित है कि अस्पताल में प्रतिदिन सड़क दुर्घटना, मारपीट, जानवरों के हमले, विषाक्त पदार्थ सेवन, पानी में डूबने और अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े कई मामले आते हैं। ऐसे मामलों में एमएलसी रिपोर्ट इलाज के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल होती है। अब तक डॉक्टरों को एमएलसी रजिस्टर में रिपोर्ट हाथ से दर्ज करनी पड़ती थी, लेकिन नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने से पूरी प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक हो जाएगी।
नई प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पीजी कर रहे जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एमएलसी रिपोर्ट तैयार करने, अपलोड करने और सुरक्षित तरीके से साझा करने की प्रक्रिया सिखाई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित होगी और त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। साथ ही न्यायिक मामलों में संबंधित पक्षों को समय पर डिजिटल दस्तावेज उपलब्ध हो सकेंगे।
फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. वल्लियप्पन और सीनियर रेजिडेंट डॉ. पंकज शाहू ने बताया कि ऑनलाइन एमएलसी रिपोर्ट बनने से लोगों को स्पष्ट और पढ़ने में आसान दस्तावेज मिलेंगे। कंप्यूटरीकृत रिपोर्ट से मरीजों और परिजनों को काफी सुविधा होगी और विभाग इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने में जुटा है।

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एमएलसी रिपोर्ट मरीजों और उनके परिजनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से यह प्रक्रिया अब अधिक सरल, पारदर्शी और तेज हो गई है। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों को इसके संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और 1 मई से यह प्रणाली सुरक्षित एवं सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक डिजिटल, प्रभावी और जनहितकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जाएगा।--- डॉ आशुतोष सयाना, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर।

--✍️-मनमोहन✍️

प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी नवजात शिशुओं की जान बचाने में निभाएंगे अहम भूमिका : डॉ. सीएम शर्माबोले, नवजात शिशु मृत्युदर कम...
10/05/2026

प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी नवजात शिशुओं की जान बचाने में निभाएंगे अहम भूमिका : डॉ. सीएम शर्मा

बोले, नवजात शिशु मृत्युदर कम करने में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम साबित होगा मददगार

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशु देखभाल प्रशिक्षण आयोजित

“एक दिन, एक राष्ट्र, एक मिशन” के तहत स्वास्थ्यकर्मियों को दिया विशेष प्रशिक्षण

श्रीनगर। राष्ट्रीय नवजात शिशु विज्ञान मंच (एनएनएफ) की पहल पर श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में रविवार को राष्ट्रीय नवजात शिशु देखभाल दिवस के अवसर पर बुनियादी नवजात शिशु देखभाल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं की मृत्युदर को कम करना तथा जन्म के तुरंत बाद मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाना रहा।
बेस अस्पताल स्थित स्किल सेंटर में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना के संरक्षकत्व में किया गया। प्रशिक्षण में बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं एनएनएफ के नेशनल ट्रेनर डॉ. सीएम शर्मा ने जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशुओं की प्राथमिक देखभाल, आपातकालीन उपचार, सुरक्षित प्रसव उपरांत प्रबंधन तथा नवजात शिशुओं में आने वाली जटिल परिस्थितियों से निपटने के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डॉ. शर्मा ने कहा कि नवजात शिशु के जन्म के बाद का पहला मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि जन्म के तुरंत बाद कोई शिशु सांस नहीं ले पा रहा हो या रो नहीं रहा हो, तो सही समय पर उचित उपचार और देखभाल देकर उसकी जान बचाई जा सकती है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे देश में एक साथ आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि नवजात शिशु के जन्म के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी समय रहते सही उपचार देकर शिशुओं की जान बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से शिशु मृत्युदर कम करने में काफी मदद मिलेगी और आगे भी डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ को लगातार प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संदेश “एक दिन, एक राष्ट्र, एक मिशन — नवजात शिशुओं की जान बचाना, एक-एक सांस के साथ” रहा। इसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और नवजात मृत्यु दर कम करने का संकल्प लिया गया।
इस अवसर पर सीनियर रेजिडेंट डॉ. अजय आनंद गोस्वामी सहित जूनियर रेजिडेंट डॉ. ज्योति, डॉ. सर्वजीत, डॉ. महेश, डॉ. धीरज, डॉ. दीपांशु, डॉ. जाहेद, डॉ. अभिलाषा तथा नर्सिंग अधिकारी लक्ष्मी, विनीता और राकेश मौजूद रहे।
----✍️ Manmohan ✍️

एक दिन, पाँच ज़िंदगियाँ — समय पर उपचार से हार्ट अटैक पर जीतसम्मानित समाचार पत्रों का आभार...
10/05/2026

एक दिन, पाँच ज़िंदगियाँ — समय पर उपचार से हार्ट अटैक पर जीत

सम्मानित समाचार पत्रों का आभार...

DD news uttarakhand..
09/05/2026

DD news uttarakhand..

गढ़वाल मंडल के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर क...

बेस अस्पताल श्रीनगर बना जीवनदायिनी, देर रात महिला की सफल एंजियोप्लास्टीदेहरादून जाने से पहले मिला उपचार, बेस अस्पताल में...
09/05/2026

बेस अस्पताल श्रीनगर बना जीवनदायिनी, देर रात महिला की सफल एंजियोप्लास्टी

देहरादून जाने से पहले मिला उपचार, बेस अस्पताल में महिला को नया जीवन

कैथ लैब का कमाल : पांच हार्ट अटैक मरीजों को मिला सफल इलाज

डॉ. अमर उपाध्याय और टीम की तत्परता से बची महिला की जिंदगी

श्रीनगर। गढ़वाल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ऐतिहासिक साबित हो रही हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल श्रीनगर की अत्याधुनिक कैथ लैब ने शुक्रवार देर रात एक और मरीज को नया जीवन दिया। दिनभर चार गंभीर हृदय रोगियों का सफल उपचार करने के बाद देर रात पहुंची एक महिला की भी सफल एंजियोप्लास्टी कर चिकित्सकों ने उसकी जान बचाई।
रुद्रप्रयाग जिले के चन्द्रापुरी क्षेत्र की 45 वर्षीय महिला चोपता-फलासी क्षेत्र में एक देवकार्य में शामिल होने गई थी। इसी दौरान अचानक उसके सीने में तेज दर्द उठा और हालत बिगड़ने लगी। परिजन तुरंत महिला को चोपता अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग रेफर किया गया। वहां जांच के दौरान हार्ट अटैक के संकेत मिलने पर चिकित्सकों ने बिना देर किए महिला को श्रीनगर बेस अस्पताल भेज दिया।
शाम करीब सात बजे महिला बेस अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंची। यहां मौजूद चिकित्सकों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल उसे कैथ लैब में शिफ्ट किया। जांचों के बाद वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमर उपाध्याय और उनकी विशेषज्ञ टीम ने देर रात महिला की सफल एंजियोप्लास्टी कर उसकी जान बचा ली।
महिला के परिजनों ने भावुक होकर बताया कि यदि श्रीनगर में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती तो उन्हें इलाज के लिए देहरादून जाना पड़ता, जिससे कीमती समय बर्बाद होता और खतरा बढ़ सकता था। उन्होंने कहा कि बेस अस्पताल में ही समय पर बेहतर उपचार मिलने से परिवार को बड़ी राहत मिली है। खास बात यह रही कि पूरा इलाज आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क हुआ।
डॉ. अमर उपाध्याय ने बताया कि पहले दिन चार मरीजों की सफल एंजियोप्लास्टी और एक मरीज को पेसमेकर लगाया गया था। देर रात महिला के पहुंचने पर तुरंत उपचार कर उसकी जान बचाई गई। शनिवार को भी अस्पताल की ओपीडी में 25 से अधिक हृदय रोगियों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
इस दौरान चिकित्सकीय टीम में मेडिसिन विभाग के डॉ. विनोद तिवारी, डॉ. गीतांशु कपूर, टेक्नीशियन शिव चरण, दिनेश, सूरज तथा नर्सिंग अधिकारी ज्ञानेंद्र, अमित, आकाश, गीता, मनोज और सनी, मरीज सहायता एवं जनसंपर्क केंद्र के पीआरओ पंकज नौटियाल शामिल रहे।

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पहाड़ों में गंभीर मरीजों के लिए “गोल्डन ऑवर” बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में समय पर उपचार मिलना ही मरीज की जिंदगी बचाने का सबसे बड़ा आधार बनता है। कैथ लैब ने शुरुआत के पहले ही दिन यह साबित कर दिया है कि अब गढ़वाल क्षेत्र में भी आपात हृदय उपचार तेजी और दक्षता के साथ उपलब्ध कराया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज का प्रयास रहेगा कि भविष्य में यहां और अधिक विशेषज्ञ सेवाएं शुरू हों, ताकि दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के मरीजों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।--- डॉ आशुतोष सयाना, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर।

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पहाड़ में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, महिलाएं भी तेजी से हो रहीं प्रभावित

श्रीनगर। अस्पताल श्रीनगर की कैथ लैब में जिन पांच गंभीर हार्ट मरीजों का सफल उपचार हुआ, उनमें दो पुरुष और तीन महिलाएं शामिल रहीं। यह आंकड़ा पहाड़ों में बदलती जीवनशैली और बढ़ते हृदय रोगों की चिंता को भी सामने ला रहा है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमर उपाध्याय ने कहा कि पहले हृदय रोगों को पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब महिलाएं भी तेजी से हार्ट अटैक की चपेट में आ रही हैं। तनाव, अनियमित दिनचर्या, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और समय पर जांच न होना इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। रुद्रप्रयाग की महिला हो या चमोली की मरीज, समय पर इलाज मिलने से सभी को नया जीवन मिला। बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने और शुरुआती जांच बेहद जरूरी है।
--✍️मनमोहन✍️ सिंधवाल।

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